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राहत: अब हिंदी में भी कर सकेंगे इंजीनियरिंग की पढ़ाई, एमएमएमयूटी ने शुरू की तैयारी
Tue, 01 Jun 2021 11:15 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 01 Jun 2021 11:15 AM IST
सार
एआईसीटीई की अनुमति के बाद एमएमएमयूटी में कोर्स की चल रही है तैयारी। हिंदी मीडियम से पढ़ाई करने वाले यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ।
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MMMUT Gorakhpur
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
अब हिंदी माध्यम से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी हिंदी में ही इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर सकेंगे। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) ने आठ भाषाओं में पढ़ाई की अनुमति दी है। इसका सर्वाधिक लाभ ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को मिलेगा।
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) ने हिंदी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराने की तैयारी शुरू कर दी है। एआइसीटीई ने नए सत्र के लिए हैंडबुक जारी की है, जिसमें इसका जिक्र है कि देश के सभी तकनीकी संस्थान या विश्वविद्यालय नए अकादमिक सत्र (2021) से अपनी जरूरत के मुताबिक हिंदी, मराठी, गुजराती, बंगाली सहित आठ क्षेत्रीय भाषाओं में अध्ययन-अध्यापन करा सकते हैं।
संस्थानों को यह सहूलियत नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए दी गई है, जिसमें मातृभाषा में अध्ययन को बढ़ावा देने पर जोर है। जो संस्थान अपनी क्षेत्रीयता का ध्यान रखते हुए इनमें से जिस भाषा में पढ़ाई कराने के इच्छुक हैं, उन्हें एक बार एआइसीटीई में आवेदन करना होगा। हैंडबुक प्राप्त होते ही मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने अपने विद्यार्थियों की जरूरत का ख्याल रखने हुए उन्हें हिंदी में पढ़ाई का विकल्प देने की तैयारी शुरू कर दी है।
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मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) ने हिंदी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराने की तैयारी शुरू कर दी है। एआइसीटीई ने नए सत्र के लिए हैंडबुक जारी की है, जिसमें इसका जिक्र है कि देश के सभी तकनीकी संस्थान या विश्वविद्यालय नए अकादमिक सत्र (2021) से अपनी जरूरत के मुताबिक हिंदी, मराठी, गुजराती, बंगाली सहित आठ क्षेत्रीय भाषाओं में अध्ययन-अध्यापन करा सकते हैं।
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संस्थानों को यह सहूलियत नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए दी गई है, जिसमें मातृभाषा में अध्ययन को बढ़ावा देने पर जोर है। जो संस्थान अपनी क्षेत्रीयता का ध्यान रखते हुए इनमें से जिस भाषा में पढ़ाई कराने के इच्छुक हैं, उन्हें एक बार एआइसीटीई में आवेदन करना होगा। हैंडबुक प्राप्त होते ही मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय ने अपने विद्यार्थियों की जरूरत का ख्याल रखने हुए उन्हें हिंदी में पढ़ाई का विकल्प देने की तैयारी शुरू कर दी है।
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किताबों के संबंध में आ सकती है दिक्कत
इंजीनियरिंग की सभी किताबें अंग्रेजी भाषा में ही हैं। ऐसे में हिंदी भाषा में पढ़ाई का विकल्प चुनने वाले विद्यार्थियों को इस संबंध में दिक्कत आ सकती है। हालांकि विश्वविद्यालय इस परेशानी का समाधान निकालने पर भी मंथन कर रहा है।
एमएमएमयूटी कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि जापान, जर्मनी, चीन, फ्रांस, रूस आदि विकसित देशों में स्थानीय भाषा में पढ़ाई होती है। कोई भी छात्र अपनी मातृभाषा में विषय को जितना बेहतर समझ सकता है, उतना दूसरी भाषा में नहीं। ऐसे में आठ क्षेत्रीय भाषाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए अनुमति देना एआइसीटीई की बेहतरीन पहल है। बहुत जल्द विद्यार्थियों को हिंदी में पठन-पाठन का विकल्प देने जा रहे हैं।
इंजीनियरिंग की सभी किताबें अंग्रेजी भाषा में ही हैं। ऐसे में हिंदी भाषा में पढ़ाई का विकल्प चुनने वाले विद्यार्थियों को इस संबंध में दिक्कत आ सकती है। हालांकि विश्वविद्यालय इस परेशानी का समाधान निकालने पर भी मंथन कर रहा है।
एमएमएमयूटी कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने बताया कि जापान, जर्मनी, चीन, फ्रांस, रूस आदि विकसित देशों में स्थानीय भाषा में पढ़ाई होती है। कोई भी छात्र अपनी मातृभाषा में विषय को जितना बेहतर समझ सकता है, उतना दूसरी भाषा में नहीं। ऐसे में आठ क्षेत्रीय भाषाओं में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए अनुमति देना एआइसीटीई की बेहतरीन पहल है। बहुत जल्द विद्यार्थियों को हिंदी में पठन-पाठन का विकल्प देने जा रहे हैं।