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Gorakhpur News: समूह बनवाकर माइक्रो फाइनेंस कंपनियां कर रही कर्ज देने का खेल
Tue, 22 Oct 2024 05:33 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 22 Oct 2024 05:33 AM IST
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चर्चा करतीं महिलाएं।
महराजगंज।
माइक्रो फाइनेंस कंपनियां समूह बनवाकर लोन देने का खेल कर रही है। वे खुद तो मोटा मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन एक बार लोन के जाल में फंसने के बाद महिलाएं उससे निकलने की कोशिश में और फंसती चली जाती है। बिना कोई कागजात के लोन मिलने के कारण महिलाएं एक के बाद दूसरे समूह का हिस्सा बन कर अलग-अलग बैंकों से लोन ले लेती हैं और नहीं चुका पाने पर कंपनियाें के एजेंटों की प्रताड़ना सहने को मजबूर होती हैं, जिसके तनाव में कई महिलाएं जान भी दे देती हैं।
जानकारी के अनुसार, जिले में 80 माइक्रो फाइनेंस कंपनियां संचालित हैं। इनका गांव-गांव में नेटवर्क फैला हुआ है। ये गांव में 10 महिलाओं का समूह बनवाते हैं, जिनमें ज्यादातर गरीब परिवार की महिलाएं होती हैं। माइक्रो फाइनेंस कंपनियां इसके बाद महिलाओं को उनकी छोटी-बड़ी जरूतों के लिए बिना कागजात के कुछ ही समय में 10 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक लोन उपलब्ध करा देती हैं। लोन देते वक्त ब्याज के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी जाती। बस इतना कहा जाता है कि छोटी सी रकम ह ज्यादा देनी होगी। जरूरतमंद महिलाएं इसमें फंस जाती हैं। उन्हें लगता है कि वे चुका लेंगी, लेकिन कुछ महीने बीतने के बाद ये ब्याज ज्यादा लगने लगता है तो महिलाएं दूसरे समूह का हिस्सा बन कर दूसरी कंपनी से लोन ले लेती हैं और पहले का चुकाती हैं। इसी तरह वे एक के बाद दूसरे कंपनी के कर्ज के जाल में फंसती जाती हैं। दूसरी तरफ कंपनी मोटा ब्याज कमातीं हैं। नहीं मिलने पर उनके एजेंट महिलाओं से बदसलूकी करते हैं और कई बार उनके घर के सामान तक बेच देते हैं।
परतावल क्षेत्र के मोहम्मदपुर गांव में जाने पर समूह की महिलाएं परेशान दिखीं। वे सभी एक जगह पर बैठक कर अपने प्रपत्रों को देख रही थीं। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंटों ने इतना दहशत बना रखा है कि गांव में किसी व्यक्ति को देखकर कर्ज लेने वाली महिलाएं सहम जाती हैं। वह कुछ बोलने से परहेज करती हैं।
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सूत्रों की माने तो गांव में समूह बने हैं, इसमें महिलाएं शामिल हैं। एक ही समूह की महिलाएं दूसरे समूह में भी शामिल हो जा रहीं हैं। उसमें अध्यक्ष मंत्री का नाम बदल जा रहा है। यह खेल इसलिए हो रहा है कि इसमें कंपनियां आसानी से लोन दे रही हैं। यही वजह है कि एक महिला कई बार कई कंपनियों से कर्ज लेकर आसानी से अपना काम कर रही हैं।
सूत्रों पर यकीन करें तो इस पूरे खेल में गांव की कुछ महिलाओं को शामिल किया गया है। कुछ रकम देकर एजेंट अपना काम कर ले रहे हैं। कर्ज लेने वाली महिलाओं का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई व परिवार के इलाज में रकम खर्च कर दी, अब लोन चुकाने में दिक्कत हो रही है।
पहले का लोन चुकाया नहीं दूसरी कंपनी से लिया
ग्रामीण क्षेत्रों में मकड़जाल की तरह फैले माइक्रो फाइनेंस कंपनियों में समूह की महिलाएं इस कदर उलझ गई हैं कि इससे उबरना मुश्किल है। परिवार वालों की बिना जानकारी के बहुत सारी महिलाओं ने पहले कर्ज लिया और जब ब्याज की रकम नहीं चुका पाईं तो दूसरे फाइनेंस कंपनी से और लोन ले लिया। इस तरह से एक के बाद एक कंपनियों से लोन लेती गईं। स्थिति यह है कि कई महिलाएं दिन में घर छोड़कर गांव में इधर-उधर रहती हैं।
सिर्फ आधार कार्ड की गारंटी पर आसानी से मिल गया लोन
परतावल ब्लाॅक के मुहम्मदपुर गांव की गुड्डी ने एक कंपनी से पहले 50 हजार का लोन लिया। कंपनी के लोगों ने इसकी ईएमआई बना दी। हर हफ्ते वसूली करने पहुंच जाते थे। ब्याज बढ़ता गया तो गुड्डी ने दूसरी कंपनी से लोन ले लिया। सिर्फ आधार कार्ड की गारंटी पर आसानी से लोन मिल गया। ब्याज चुकता न होने पर यह सिलसिला बढ़ता गया और धीरे-धीरे उसने कई कंपनियों से लोन ले लिया। अब आलम यह है कि आए दिन लोन देने वाली कंपनियों के एजेंट आते हैं और धमकी देते हैं। यही हाल गांव की विमला, बेबी, तरीकुन, फुलजहां, शनिचरा, शांति, नूरजहां, जिऊता, मुनीता, रूखसाना, समीरून, पूजा, मनोरमा, रंभावती का भी है। एक कंपनी से लोन लेने के बाद ब्याज चुकता न होने पर एक के बाद एक करीब 10 से अधिक कंपनियों से लोन ले चुकी महिलाएं परेशान हैं। इनमें से अधिकांश महिलाओं के पति रोजी रोजगार के लिए घर से बाहर हैं। अधिकतर महिलाएं बच्चों की पढ़ाई व दवा कराने में रकम खर्च कर चुकी हैं। पहले जहां कंपनी के एजेंट हफ्ते में एक बार आते थे वहीं वसूली न होने के कारण अब वह हर रोज आना शुरू कर दिए हैं।
शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी
माइक्रो फाइनेंस लिमिटेड इंस्टीट्यूट नेटवर्क (एमएफआईएन) असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट धीरज सोनी ने बताया कि नियम के अनुसार माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट सुबह 6 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक ऋण दाताओं के घर पर किस्त वसूली के लिए जा सकते हैं। अगर कोई भी एजेंट वसूली करने के दौरान ऋण दाताओं से जोर जबरदस्ती करता है तो शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के ऋण वितरण में पासबुक पर टोल फ्री नंबरों की व्यवस्था है। इस पर अपनी शिकायत दर्ज कराकर समस्याओं का समाधान करा सकते हैं। किन-किन माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से ऋण लिए गए हैं, उसकी भी जांच पड़ताल की व्यवस्था है। अगर ऋण वितरण में लापरवाही बरती गई है तो संबंधित फाइनेंस कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
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माइक्रो फाइनेंस कंपनियां समूह बनवाकर लोन देने का खेल कर रही है। वे खुद तो मोटा मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन एक बार लोन के जाल में फंसने के बाद महिलाएं उससे निकलने की कोशिश में और फंसती चली जाती है। बिना कोई कागजात के लोन मिलने के कारण महिलाएं एक के बाद दूसरे समूह का हिस्सा बन कर अलग-अलग बैंकों से लोन ले लेती हैं और नहीं चुका पाने पर कंपनियाें के एजेंटों की प्रताड़ना सहने को मजबूर होती हैं, जिसके तनाव में कई महिलाएं जान भी दे देती हैं।
जानकारी के अनुसार, जिले में 80 माइक्रो फाइनेंस कंपनियां संचालित हैं। इनका गांव-गांव में नेटवर्क फैला हुआ है। ये गांव में 10 महिलाओं का समूह बनवाते हैं, जिनमें ज्यादातर गरीब परिवार की महिलाएं होती हैं। माइक्रो फाइनेंस कंपनियां इसके बाद महिलाओं को उनकी छोटी-बड़ी जरूतों के लिए बिना कागजात के कुछ ही समय में 10 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक लोन उपलब्ध करा देती हैं। लोन देते वक्त ब्याज के बारे में पूरी जानकारी नहीं दी जाती। बस इतना कहा जाता है कि छोटी सी रकम ह ज्यादा देनी होगी। जरूरतमंद महिलाएं इसमें फंस जाती हैं। उन्हें लगता है कि वे चुका लेंगी, लेकिन कुछ महीने बीतने के बाद ये ब्याज ज्यादा लगने लगता है तो महिलाएं दूसरे समूह का हिस्सा बन कर दूसरी कंपनी से लोन ले लेती हैं और पहले का चुकाती हैं। इसी तरह वे एक के बाद दूसरे कंपनी के कर्ज के जाल में फंसती जाती हैं। दूसरी तरफ कंपनी मोटा ब्याज कमातीं हैं। नहीं मिलने पर उनके एजेंट महिलाओं से बदसलूकी करते हैं और कई बार उनके घर के सामान तक बेच देते हैं।
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परतावल क्षेत्र के मोहम्मदपुर गांव में जाने पर समूह की महिलाएं परेशान दिखीं। वे सभी एक जगह पर बैठक कर अपने प्रपत्रों को देख रही थीं। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंटों ने इतना दहशत बना रखा है कि गांव में किसी व्यक्ति को देखकर कर्ज लेने वाली महिलाएं सहम जाती हैं। वह कुछ बोलने से परहेज करती हैं।
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सूत्रों की माने तो गांव में समूह बने हैं, इसमें महिलाएं शामिल हैं। एक ही समूह की महिलाएं दूसरे समूह में भी शामिल हो जा रहीं हैं। उसमें अध्यक्ष मंत्री का नाम बदल जा रहा है। यह खेल इसलिए हो रहा है कि इसमें कंपनियां आसानी से लोन दे रही हैं। यही वजह है कि एक महिला कई बार कई कंपनियों से कर्ज लेकर आसानी से अपना काम कर रही हैं।
सूत्रों पर यकीन करें तो इस पूरे खेल में गांव की कुछ महिलाओं को शामिल किया गया है। कुछ रकम देकर एजेंट अपना काम कर ले रहे हैं। कर्ज लेने वाली महिलाओं का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई व परिवार के इलाज में रकम खर्च कर दी, अब लोन चुकाने में दिक्कत हो रही है।
पहले का लोन चुकाया नहीं दूसरी कंपनी से लिया
ग्रामीण क्षेत्रों में मकड़जाल की तरह फैले माइक्रो फाइनेंस कंपनियों में समूह की महिलाएं इस कदर उलझ गई हैं कि इससे उबरना मुश्किल है। परिवार वालों की बिना जानकारी के बहुत सारी महिलाओं ने पहले कर्ज लिया और जब ब्याज की रकम नहीं चुका पाईं तो दूसरे फाइनेंस कंपनी से और लोन ले लिया। इस तरह से एक के बाद एक कंपनियों से लोन लेती गईं। स्थिति यह है कि कई महिलाएं दिन में घर छोड़कर गांव में इधर-उधर रहती हैं।
सिर्फ आधार कार्ड की गारंटी पर आसानी से मिल गया लोन
परतावल ब्लाॅक के मुहम्मदपुर गांव की गुड्डी ने एक कंपनी से पहले 50 हजार का लोन लिया। कंपनी के लोगों ने इसकी ईएमआई बना दी। हर हफ्ते वसूली करने पहुंच जाते थे। ब्याज बढ़ता गया तो गुड्डी ने दूसरी कंपनी से लोन ले लिया। सिर्फ आधार कार्ड की गारंटी पर आसानी से लोन मिल गया। ब्याज चुकता न होने पर यह सिलसिला बढ़ता गया और धीरे-धीरे उसने कई कंपनियों से लोन ले लिया। अब आलम यह है कि आए दिन लोन देने वाली कंपनियों के एजेंट आते हैं और धमकी देते हैं। यही हाल गांव की विमला, बेबी, तरीकुन, फुलजहां, शनिचरा, शांति, नूरजहां, जिऊता, मुनीता, रूखसाना, समीरून, पूजा, मनोरमा, रंभावती का भी है। एक कंपनी से लोन लेने के बाद ब्याज चुकता न होने पर एक के बाद एक करीब 10 से अधिक कंपनियों से लोन ले चुकी महिलाएं परेशान हैं। इनमें से अधिकांश महिलाओं के पति रोजी रोजगार के लिए घर से बाहर हैं। अधिकतर महिलाएं बच्चों की पढ़ाई व दवा कराने में रकम खर्च कर चुकी हैं। पहले जहां कंपनी के एजेंट हफ्ते में एक बार आते थे वहीं वसूली न होने के कारण अब वह हर रोज आना शुरू कर दिए हैं।
शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी
माइक्रो फाइनेंस लिमिटेड इंस्टीट्यूट नेटवर्क (एमएफआईएन) असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट धीरज सोनी ने बताया कि नियम के अनुसार माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के एजेंट सुबह 6 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक ऋण दाताओं के घर पर किस्त वसूली के लिए जा सकते हैं। अगर कोई भी एजेंट वसूली करने के दौरान ऋण दाताओं से जोर जबरदस्ती करता है तो शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के ऋण वितरण में पासबुक पर टोल फ्री नंबरों की व्यवस्था है। इस पर अपनी शिकायत दर्ज कराकर समस्याओं का समाधान करा सकते हैं। किन-किन माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से ऋण लिए गए हैं, उसकी भी जांच पड़ताल की व्यवस्था है। अगर ऋण वितरण में लापरवाही बरती गई है तो संबंधित फाइनेंस कंपनी के विरुद्ध कार्रवाई होगी।