फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   meter readers again made wrong bill After billing agency fined In Gorakhpur

गोरखपुर: जुर्माने के बाद फिर बना दिया गलत बिल, जानिए क्या है पूरा मामला

Thu, 01 Jul 2021 02:38 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 01 Jul 2021 02:38 PM IST
सार

तीन महीने के बिलों की समीक्षा के बाद मुख्य अभियंता ने बिलिंग एजेंसी पर लगाया था 45 लाख रुपये का जुर्माना। 4 जून से 28 जून तक के बिलों की समीक्षा में एक बार फिर मिली खामियां।

विज्ञापन
meter readers again made wrong bill After billing agency fined In Gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर बिलिंग एजेंसी के मीटर रीडरों ने इस महीने भी 11 हजार विद्युत उपभोक्ताओं के गलत बिल बना दिए हैं। शहरी क्षेत्र में 4 जून से लेकर 28 जून तक बने बिजली बिलों की समीक्षा के बाद यह लापरवाही सामने आई है। इसमें मीटर रीडरों ने लापरवाही कर 989 कनेक्शनों पर सिलिंग डिफेक्ट श्रेणी में बिल बना दिया। इससे इन उपभोक्ताओं पर लाखों रुपये का बकाया दिख रहा है।
विज्ञापन


वहीं दस हजार कनेक्शनों का आरडीएफ श्रेणी में बिल बना दिया है। मुख्य अभियंता ने इसे लेकर एजेंसी के प्रबंधक को बुलाकर नाराजगी जताई है। उन्होंने साफ कहा कि उपभोक्ताओं को गलत बिल मिलने से काफी परेशानी हो रही है। एजेंसी को अपने रीडरों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने की जरूरत है। यह हाल तब है जब बिलिंग एजेंसी पर गलत बिल बनाने पर 45 लाख का जुर्माना पहले भी लगाया जा चुका है।
विज्ञापन

 
शहरी क्षेत्र के 1.80 लाख उपभोक्ताओं के घरों में बिजली बिल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बंगलुरु की कंपनी बीसीआईटीएस के पास है। एजेंसी 55 हजार स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं के घरों में भी बिजली बिल उपलब्ध कराती है। लॉकडाउन के पहले से ही एजेंसी पर बिल विरोधि गतिविधियों, टेबल रीडिंग बिल बनाने जैसी अन्य शिकायतें मिल रहीं थीं।
विज्ञापन
विज्ञापन


मुख्य अभियंता जोन राजेंद्र प्रसाद ने अप्रैल-21 में एक कमेटी की गठन किया। कमेटी की तरफ से दी गई रिपोर्ट में दिसंबर, जनवरी और फरवरी तीन महीनों में एजेंसी द्वारा गलत बिल बनाए जाने की बात सामने आई। इसके बाद उन्होंने एजेंसी के तीन महीने के 5.47 करोड़ रुपये भुगतान में से पेनाल्टी के 45 लाख रुपये काट लिए थे।

उपभोक्ताओं पर पड़ता है अधिक भार

अभियंताओं को उम्मीद थी कि इस कार्रवाई से एजेंसी अपनी कार्य प्रणाली में सुधार लाएगी। दूसरी तरफ खंड के अभियंताओं का कहना है कि बिलिंग एजेंसी ने बिल बनाने की  संख्या तो बढ़ा दी है। लेकिन बिल की क्वालिटी (रीडिंग, लोड व अन्य जानकारी) काफी खराब कर दी है। आलम यह है कि प्रत्येक खंड में सीडीएफ, आईडीएफ, एन, एनआर श्रेणी के बिल बनने से उपभोक्ता परेशान है।

उपभोक्ता इन बिलों को पाकर लगातार अभियंताओं के चक्कर में खंड से लेकर उपखंड कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। मुख्य अभियंता ने बताया कि एजेंसी पर तीन महीने में 45 लाख रुपये पेनाल्टी वसूली गई है। समीक्षा की गई इसके बाद इसमें लापरवाही सामने आने पर फिर से कटौती की जाएगी।

उपभोक्ताओं के बिल अगर सीडीएफ, आईडीएफ के साथ एनआर श्रेणी में आते हैं इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ता है। एजेंसी के रीडर बिल देकर अपना टारगेट तो पूरा कर लेंगे। लेकिन गलत बिल आने पर उपभोक्ता उसे सही कराने के लिए खंड से उपखंड कार्यालय के चक्कर लगाता है। ऐसे में अगर समय अधिक बीत जाता है कि उसे ब्याज के साथ अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed