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Gorakhpur News: रिश्तेदारों से मिलें, देश देखें और गोरखपुर को जानें
Tue, 29 Sep 2026 02:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Tue, 29 Sep 2026 02:51 AM IST
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गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों को पढ़ाई के साथ अपने आसपास की दुनिया को देखने और समझने की सीख दी। अमर उजाला बाल मेला सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि छुट्टी मिले तो घर में बैठे रहने के बजाय रिश्तेदारों से मिलें, देश देखें और अपने शहर गोरखपुर को जानें। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में क्या-क्या है, इसकी जानकारी होनी चाहिए। शहर की सामाजिक, आर्थिक और विरासत से जुड़ी चीजों को जिज्ञासा के साथ देखना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समय मिले तो परिवार के साथ गोरखनाथ मंदिर और गीता प्रेस जाएं। रेलवे स्टेशन जाकर देखें कि वहां व्यवस्था कैसे काम करती है। अवसर मिले तो एयरपोर्ट की अनुमति लेकर उसकी व्यवस्था को समझें। रोडवेज बस स्टैंड, रामगढ़ताल, बुढ़िया माई मंदिर, राप्ती-रोहिन संगम और शहर के प्राचीन स्थलों को भी देखें। गोरखपुर के तीन गुरुद्वारों और अन्य पौराणिक एवं विरासत स्थलों को जानने का प्रयास करें।
उन्होंने कहा कि रेती चौक और मुक्तेश्वरनाथ मंदिर जैसे नाम भी शहर के इतिहास से जुड़े सवाल खड़े करते हैं। बच्चों को यह जानने की जिज्ञासा होनी चाहिए कि किसी स्थान का नाम ऐसा क्यों पड़ा और उसके पीछे क्या इतिहास रहा होगा।
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मुख्यमंत्री ने प्रेस देखने की भी सलाह दी। कहा कि बच्चों को यह जानना चाहिए कि पत्रकार दिन-रात मेहनत कर सही खबर जनता तक कैसे पहुंचाते हैं और अफवाहों पर विराम कैसे लगता है। उन्होंने कहा कि यही जिज्ञासा आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। जिज्ञासा के बाद प्रयास, मेहनत और मंजिल हासिल करने का जज्बा जरूरी है।
इस दौरान अजय शाही, संजय जायसवाल, इंद्रजीत ओझा, संजीव कुमार, सलील श्रीवास्तव, कनक हरि अग्रवाल, नीरज शाही आदि मौजूद रहे।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि समय मिले तो परिवार के साथ गोरखनाथ मंदिर और गीता प्रेस जाएं। रेलवे स्टेशन जाकर देखें कि वहां व्यवस्था कैसे काम करती है। अवसर मिले तो एयरपोर्ट की अनुमति लेकर उसकी व्यवस्था को समझें। रोडवेज बस स्टैंड, रामगढ़ताल, बुढ़िया माई मंदिर, राप्ती-रोहिन संगम और शहर के प्राचीन स्थलों को भी देखें। गोरखपुर के तीन गुरुद्वारों और अन्य पौराणिक एवं विरासत स्थलों को जानने का प्रयास करें।
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उन्होंने कहा कि रेती चौक और मुक्तेश्वरनाथ मंदिर जैसे नाम भी शहर के इतिहास से जुड़े सवाल खड़े करते हैं। बच्चों को यह जानने की जिज्ञासा होनी चाहिए कि किसी स्थान का नाम ऐसा क्यों पड़ा और उसके पीछे क्या इतिहास रहा होगा।
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मुख्यमंत्री ने प्रेस देखने की भी सलाह दी। कहा कि बच्चों को यह जानना चाहिए कि पत्रकार दिन-रात मेहनत कर सही खबर जनता तक कैसे पहुंचाते हैं और अफवाहों पर विराम कैसे लगता है। उन्होंने कहा कि यही जिज्ञासा आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। जिज्ञासा के बाद प्रयास, मेहनत और मंजिल हासिल करने का जज्बा जरूरी है।
इस दौरान अजय शाही, संजय जायसवाल, इंद्रजीत ओझा, संजीव कुमार, सलील श्रीवास्तव, कनक हरि अग्रवाल, नीरज शाही आदि मौजूद रहे।