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Gorakhpur News: सीएचसी-पीएचसी पर नहीं कर रहे मेडिकोलीगल, जिला अस्पताल पर बढ़ा बोझ
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फोटो-
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- 25 दिन के अंदर जिला अस्पताल में मेडिकोलीगल के 1172 मामले आए, 80 फीसदी ग्रामीण इलाकों के - जिला अस्पताल प्रशासन ने सीएमओ को पत्र लिखकर की शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्सीडेंट और मारपीट में घायल मरीजों की इलाज नहीं किया जा रहा है। इन मरीजों को सीधे जिला अस्पताल या फिर बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेज दिया जा रहा है। इससे इन स्थानों पर इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों पर बोझ बढ़ रहा है और वे अन्य मरीजों का इलाज नहीं कर पा रहे हैं। ऐसी शिकायत जिला अस्पताल प्रशासन ने सीएमओ को पत्र लिखकर की है।
जिला अस्पताल में पिछले 25 दिनों के अंदर 1172 मेडिकोलीगल के मामले सामने आए हैं। इसमें अलग-अलग थाना क्षेत्रों के 1124 मेडिकोलीगल और सड़क हादसे के 48 मामले शामिल हैं। इन मामलों की वजह से इमरजेंसी में ड्यूटी करने वाले डॉक्टर अन्य मरीजों का इलाज नहीं कर पा रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ने इसकी शिकायत सीएमओ से की है। शिकायत में यह भी बताया है कि 22 दिनों के अंदर जो भी मामले सामने आए हैं, उनमें 80 फीसदी मेडिकोलीगल ग्रामीण क्षेत्र के हैं। जिनका मेडिकोलीगल वहां हो सकता था। लेकिन, कोर्ट जाने के चक्कर में सीएचसी और पीएचसी के डॉक्टर इससे बचना चाहते हैं। इसकी वजह से ऐसे मामले सीधे जिला अस्पताल भेज दे रहे हैं।
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सीएमओ से एसआईसी ने की शिकायत
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. राजेंद्र ठाकुर और डॉ. शाहनवाज ने सीएमओ डॉ आशुतोष दुबे से मुलाकात कर उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया है। सीएमओ को बताया कि अस्पताल की इमरजेंसी में एक शिफ्ट में एक ही डॉक्टर तैनात रहते हैं। वह मेडिकोलीगल में ही उलझे रहते हैं। घायलों के साथ मौजूद पुलिसकर्मी दबाव बनाते हैं। इसकी वजह से दूसरे मरीजों का इलाज प्रभावित होता है। सीएमओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी सीएससी-पीएचसी प्रभारियों को निर्देश दिया है कि प्राथमिक इलाज कर ही मेडिकोलीगल किया जाए।
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सीटी स्कैन में सबसे ज्यादा परेशानी
मेडिकोलीगल के दौरान सबसे ज्यादा दिक्कत सीटी स्कैन कराने में होती है। इसकी वजह यह है कि मरीजों की भीड़ जिला अस्पताल में सबसे अधिक है। सीटी स्कैन के लिए हर दिन 70 से 80 सामान्य मरीज आते हैं। एक सीटी स्कैन में करीब 15 से 20 मिनट का समय लगता है। इसकी वजह से सीटी स्कैन में दिक्कत होती है। यही हाल बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीज के मामले में एमआरआई का भी है।
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यह है मेडिकोलीगल का नियम
जिला अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. शाहनवाज ने बताया कि जिस थानाक्षेत्र में घटना हुई है। उसी से संबंधित सामुदायिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) मेडिकोलीगल कराना चाहिए। इसे लेकर कई बार हाईकोर्ट आदेश जारी कर चुका है। इसके बाद भी पुलिसकर्मी घायलों को सीधे लेकर जिला अस्पताल से चले आ रहे हैं। इसकी वजह से घायलों का समय पर प्राथमिक इलाज नहीं मिल पाता है और उन्हें शारीरिक दिक्कतों के साथ समय भी ज्यादा लग जाता है। इसकी वजह से कानूनी अड़चनें भी आती हैं।
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- 25 दिन के अंदर जिला अस्पताल में मेडिकोलीगल के 1172 मामले आए, 80 फीसदी ग्रामीण इलाकों के - जिला अस्पताल प्रशासन ने सीएमओ को पत्र लिखकर की शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एक्सीडेंट और मारपीट में घायल मरीजों की इलाज नहीं किया जा रहा है। इन मरीजों को सीधे जिला अस्पताल या फिर बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेज दिया जा रहा है। इससे इन स्थानों पर इमरजेंसी में तैनात चिकित्सकों पर बोझ बढ़ रहा है और वे अन्य मरीजों का इलाज नहीं कर पा रहे हैं। ऐसी शिकायत जिला अस्पताल प्रशासन ने सीएमओ को पत्र लिखकर की है।
जिला अस्पताल में पिछले 25 दिनों के अंदर 1172 मेडिकोलीगल के मामले सामने आए हैं। इसमें अलग-अलग थाना क्षेत्रों के 1124 मेडिकोलीगल और सड़क हादसे के 48 मामले शामिल हैं। इन मामलों की वजह से इमरजेंसी में ड्यूटी करने वाले डॉक्टर अन्य मरीजों का इलाज नहीं कर पा रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ने इसकी शिकायत सीएमओ से की है। शिकायत में यह भी बताया है कि 22 दिनों के अंदर जो भी मामले सामने आए हैं, उनमें 80 फीसदी मेडिकोलीगल ग्रामीण क्षेत्र के हैं। जिनका मेडिकोलीगल वहां हो सकता था। लेकिन, कोर्ट जाने के चक्कर में सीएचसी और पीएचसी के डॉक्टर इससे बचना चाहते हैं। इसकी वजह से ऐसे मामले सीधे जिला अस्पताल भेज दे रहे हैं।
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सीएमओ से एसआईसी ने की शिकायत
जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. राजेंद्र ठाकुर और डॉ. शाहनवाज ने सीएमओ डॉ आशुतोष दुबे से मुलाकात कर उन्हें पूरे मामले से अवगत कराया है। सीएमओ को बताया कि अस्पताल की इमरजेंसी में एक शिफ्ट में एक ही डॉक्टर तैनात रहते हैं। वह मेडिकोलीगल में ही उलझे रहते हैं। घायलों के साथ मौजूद पुलिसकर्मी दबाव बनाते हैं। इसकी वजह से दूसरे मरीजों का इलाज प्रभावित होता है। सीएमओ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी सीएससी-पीएचसी प्रभारियों को निर्देश दिया है कि प्राथमिक इलाज कर ही मेडिकोलीगल किया जाए।
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सीटी स्कैन में सबसे ज्यादा परेशानी
मेडिकोलीगल के दौरान सबसे ज्यादा दिक्कत सीटी स्कैन कराने में होती है। इसकी वजह यह है कि मरीजों की भीड़ जिला अस्पताल में सबसे अधिक है। सीटी स्कैन के लिए हर दिन 70 से 80 सामान्य मरीज आते हैं। एक सीटी स्कैन में करीब 15 से 20 मिनट का समय लगता है। इसकी वजह से सीटी स्कैन में दिक्कत होती है। यही हाल बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीज के मामले में एमआरआई का भी है।
यह है मेडिकोलीगल का नियम
जिला अस्पताल के इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. शाहनवाज ने बताया कि जिस थानाक्षेत्र में घटना हुई है। उसी से संबंधित सामुदायिक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) मेडिकोलीगल कराना चाहिए। इसे लेकर कई बार हाईकोर्ट आदेश जारी कर चुका है। इसके बाद भी पुलिसकर्मी घायलों को सीधे लेकर जिला अस्पताल से चले आ रहे हैं। इसकी वजह से घायलों का समय पर प्राथमिक इलाज नहीं मिल पाता है और उन्हें शारीरिक दिक्कतों के साथ समय भी ज्यादा लग जाता है। इसकी वजह से कानूनी अड़चनें भी आती हैं।