अमर उजाला पड़ताल: होम आइसोलेशन के 85 प्रतिशत मरीजों के घरों तक पहुंचाई जा रहीं दवाएं, इस बार ज्यादा एक्टिव है प्रशासन
होम आइसोलेशन में रहने वाले 15 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं, जिनका मोबाइल नंबर ऑफ मिल रहा है। इस बीच किसी तरह अगर आरआरटी टीम और निगरानी समितियों के सदस्य मौके पर पहुंच भी जा रहे हैं तो पता चल रहा है कि वह कहीं और रह रहें हैं।
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स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम (आरआरटी) और निगरानी समितियों ने कोरोना संक्रमितों के घरों तक पहुंचना शुरू कर दिया है। फोन पर संक्रमितों का हालचाल लेने के साथ दवाएं तक पहुंचाई जा रहीं हैं। कई अलक्षणिक मरीज दवा लेने से मना भी कर दे रहे हैं। इसके बाद भी विभाग ऐसे लोगों पर नजर रखे हुए है। प्रतिदिन इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर से करीब दो से ढाई हजार फोन भी किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि रैपिड रिस्पांस टीम और निगरानी समितियां 85 प्रतिशत होम आइसोलेशन वाले मरीजों के घर पहुंच रहीं हैं। जबकि, पहली और दूसरी लहर में ऐसी स्थिति नहीं थी। स्वास्थ्य विभाग होम आइसोलेशन मरीजों को दवा तक नहीं पहुंचा पा रहा था।
मोबाइल जा रहा बंद, पते पर पहुंचने पर नहीं मिल रहे लोग
होम आइसोलेशन में रहने वाले 15 प्रतिशत मरीज ऐसे हैं, जिनका मोबाइल नंबर ऑफ मिल रहा है। इस बीच किसी तरह अगर आरआरटी टीम और निगरानी समितियों के सदस्य मौके पर पहुंच भी जा रहे हैं तो पता चल रहा है कि वह कहीं और रह रहें हैं। ये दिक्कतें आधार नंबर पर स्थायी पता दर्ज होने की वजह से हो रही है, क्योंकि कई ऐसे लोग हैं, जिनके आधार पर गांव और शहर का स्थायी पता दर्ज तो है, लेकिन वह रह कहीं और रहे हैं।
एक नजर आंकड़ों पर
- निगरानी समितियां- 1464
- आरआरटी टीम- 89 गांव में, शहर में 70
- होम आइसोलेशन वाले मरीजों की संख्या- 2112
इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर पर बनाए गए हैं 11 काउंटर
11 काउंटर बनाए गए हैं। इनमें 40 सीटें बनाई गईं हैं। डॉक्टर के तीन काउंटर, कांटेक्ट ट्रेसिंग काउंटर एक, होम आइसोलेशन काउंटर एक, वैक्सीनेशन काउंटर एक, निगरानी समिति काउंटर एक, सैनिटाइजेशन काउंटर एक, पुलिस काउंटर एक, डाटा फिडिंग काउंटर एक।
पॉजिटिव होने पर कर सकते हैं यहां संपर्क
0551-2202205, 0551-2204196, 9532797104, 9532041882, 8765134842। इन नंबरों पर करें व्हाट्सएप- 9532041882, 9532797104
कोविड जांच सेंटर प्रभारी डॉ एके सिंह ने कहा कि कोरोना संक्रमित मरीजों से फोन पर आरआरटी और निगरानी समितियां स्वास्थ्य संबंधी जानकारियां ले रहीं हैं। 85 प्रतिशत मरीजों के घर दवाएं भी पहुंचाई जा रहीं हैं। कई अलक्षणिक मरीज दवा लेने से मना भी कर दे रहे हैं, जबकि कई ऐसे मरीज हैं, जो पहले से दवा मंगा ले रहे हैं। इंटीग्रेटेड कोविड कमांड सेंटर से भी फोन कर मरीजों के स्वास्थ्य के बारे में प्रतिदिन जानकारी ली जा रही है।
5500 की जगह 10 हजार लोगों की होगी प्रतिदिन कोरोना जांच
कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए शासन ने जांच का दायरा बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसकी तैयारी स्वास्थ्य विभाग ने शुरू कर दी है। विभाग अब तक कोरोना के जहां 5500 सैंपल ले रहा था। अब यह संख्या बढ़ाकर 10 हजार कर दी गई है।
कोविड जांच के नोडल अधिकारी डॉ एके सिंह ने बताया कि मौजूदा समय में 5500 से 6000 के बीच कोरोना जांच की जा रही है। इसमें 70 प्रतिशत आरटीपीसीआर और 30 प्रतिशत जांच एंटीजन किट से की जा रही है। बताया कि 13 जनवरी को सात हजार लोगों की जांच की गई है। इसे बढ़ाकर 10 हजार किया जाएगा। इसके लिए सभी स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को अतिरिक्त किट भी भेज दी गई है।
केस- एक
शक्तिनगर कॉलोनी की रहने वाली 21 वर्षीय एक युवती 13 जनवरी को कोरोना संक्रमित हुई थी। रिपोर्ट आने के पांच घंटे बाद ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से फोन कर तबीयत के बारे में पूछा गया। साथ ही दवा किट उपलब्ध कराने की बात कही गई। लेकिन, युवती ने दवा लेने से मना कर दिया। बोली कि दवा मेरे पास उपलब्ध है।
केस- दो
एमएमएमयूटी के पास दिव्य नगर कॉलोनी के रहने वाला 32 वर्षीय युवक 12 जनवरी को कोरोना संक्रमित हुआ था। रिपोर्ट आने के पांच घंटे बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से फोन कर हाल चाल पूछा गया। इस बीच उन्हें दवा की किट उपलब्ध कराने की बात कही गई। लेकिन, अलक्षणिक होने की वजह से उन्होंने दवा लेने से इन्कार कर दिया।
केस- तीन
सूर्य विहार कॉलोनी की रहने वाली 18 वर्षीय युवती 13 जनवरी को कोरोना संक्रमित हुई थी। रिपोर्ट आने के सात घंटे बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से फोन कर स्वास्थ्य के बारे में पूछा गया। उन्होंने अलक्षणिक होने की जानकारी दी। इस पर दवा किट देने की बात कही गई, तो उन्होंने मना कर दिया।
केस- चार
झरना टोला के रहने वाला 26 वर्षीय युवक 12 जनवरी को कोरोना संक्रमित हुआ था। रिपोर्ट आने के चार घंटे बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने फोन पर स्वास्थ्य की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने बुखार होने की बात बताई। इस पर विभाग की ओर से उन्हें दवा किट उपलब्ध कराई गई। दवा में पैरासिटामॉल से लेकर अन्य दवाएं थीं।