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मौनी अमावस्या: श्रद्धालु कल लगाएंगे आस्था की डुबकी
Thu, 08 Feb 2024 03:48 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 08 Feb 2024 03:48 AM IST
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श्रद्धापूर्वक मनाया जाएगा पर्व, श्रद्धालु स्नान के बाद करेंगे दान-पुण्य
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (मौनी अमावस्या) नौ फरवरी शुक्रवार को आस्था व श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। श्रद्धालु इस दिन राप्ती सहित आसपास की पवित्र नदियों और सरोवरों में आस्था की डुबकी लगाकर दान-पुण्य करेंगे।
वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि का मान सुबह सात बजकर 11 मिनट तक पश्चात अमावस्या तिथि, श्रवण नक्षत्र संपूर्ण दिन और रात को 11 बजकर 57 मिनट तक है। इस दिन व्यतिपात योग शाम सात बजकर 30 मिनट तक और उसके बाद वरियान योग है। इस दिन धूम्र नामक शुभ औदायिक योग भी है।
मौनी अमावस्या का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इस दिन मौन व्रत का पालन सभी के लिए आवश्यक है। मौन व्रत का पालन मनुष्यों को आत्मप्रशंसा और वाचालता से दूर रखने की प्रेरणा देता है। साथ ही कष्ट और विवादों से दूर मन को शांत रखता है। शांत मन शरीर को शांति प्रदान करता है। इससे शरीर स्वस्थ और सुदृढ़ होता है और मन में दूसरों के प्रति सेवाभाव उत्पन्न होता है। ग्रंथों के अनुसार, चंद्रमा को मन का स्वामी कहा गया है। अमावस्या को चंद्र दर्शन नहीं होता है, जिससे इस दिन मन की स्थिति दुर्बल रहती है। मौनी अमावस्या का व्रत योग पर आधारित महाव्रत है। इस दिन मौन व्रत धारण करके ही स्नान करना चाहिए। तिल और गुड़ का दान करने से शनि की पीड़ा समाप्त हो जाती है। इस दिन पीपल की पूजा का भी विशेष महत्व है। इस तिथि पर दान-स्नान से देवताओं की कृपा के साथ पितरों की भी कृपा प्राप्त होती है। इस दिन मनु ऋषि का जन्म भी माना जाता है। इसलिए इस दिन को मनु अमावस्या भी कहते हैं।
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ऐसे करें पूजन
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत का संकल्प लेकर संगम या पवित्र नदी में स्नान करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा का पीले फूल, केसर, चंदन, घी के दीपक और प्रसाद के साथ पूजन करें। भगवान का ध्यान करने के बाद विष्णु चालीसा या विष्णु सहस्त्र नाम का जप करें। मंदिर या नदी तट पर दीपदान करें। सायंकाल भी धूप से आरती करें। पीले मीठे पकवान का भोग लगाएं। अगले दिन गो माता को भोजन कराने के बाद व्रत का पारण करें।
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गोरखपुर। माघ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (मौनी अमावस्या) नौ फरवरी शुक्रवार को आस्था व श्रद्धा के साथ मनाई जाएगी। श्रद्धालु इस दिन राप्ती सहित आसपास की पवित्र नदियों और सरोवरों में आस्था की डुबकी लगाकर दान-पुण्य करेंगे।
वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, चतुर्दशी तिथि का मान सुबह सात बजकर 11 मिनट तक पश्चात अमावस्या तिथि, श्रवण नक्षत्र संपूर्ण दिन और रात को 11 बजकर 57 मिनट तक है। इस दिन व्यतिपात योग शाम सात बजकर 30 मिनट तक और उसके बाद वरियान योग है। इस दिन धूम्र नामक शुभ औदायिक योग भी है।
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मौनी अमावस्या का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इस दिन मौन व्रत का पालन सभी के लिए आवश्यक है। मौन व्रत का पालन मनुष्यों को आत्मप्रशंसा और वाचालता से दूर रखने की प्रेरणा देता है। साथ ही कष्ट और विवादों से दूर मन को शांत रखता है। शांत मन शरीर को शांति प्रदान करता है। इससे शरीर स्वस्थ और सुदृढ़ होता है और मन में दूसरों के प्रति सेवाभाव उत्पन्न होता है। ग्रंथों के अनुसार, चंद्रमा को मन का स्वामी कहा गया है। अमावस्या को चंद्र दर्शन नहीं होता है, जिससे इस दिन मन की स्थिति दुर्बल रहती है। मौनी अमावस्या का व्रत योग पर आधारित महाव्रत है। इस दिन मौन व्रत धारण करके ही स्नान करना चाहिए। तिल और गुड़ का दान करने से शनि की पीड़ा समाप्त हो जाती है। इस दिन पीपल की पूजा का भी विशेष महत्व है। इस तिथि पर दान-स्नान से देवताओं की कृपा के साथ पितरों की भी कृपा प्राप्त होती है। इस दिन मनु ऋषि का जन्म भी माना जाता है। इसलिए इस दिन को मनु अमावस्या भी कहते हैं।
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ऐसे करें पूजन
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत का संकल्प लेकर संगम या पवित्र नदी में स्नान करें। भगवान विष्णु की प्रतिमा का पीले फूल, केसर, चंदन, घी के दीपक और प्रसाद के साथ पूजन करें। भगवान का ध्यान करने के बाद विष्णु चालीसा या विष्णु सहस्त्र नाम का जप करें। मंदिर या नदी तट पर दीपदान करें। सायंकाल भी धूप से आरती करें। पीले मीठे पकवान का भोग लगाएं। अगले दिन गो माता को भोजन कराने के बाद व्रत का पारण करें।