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पुलिस का खौफ: अपराध छोड़ कई बदमाश जोत रहे खेत, कई मंदिर में बजा रहे घंटी

Thu, 24 Feb 2022 03:13 PM IST
vivek shukla शिवम सिंह, गोरखपुर।
शिवम सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 24 Feb 2022 03:13 PM IST
सार

गोरखपुर जिले में 135 हिस्ट्रशीटर्स का तीन साल में नहीं मिला आपराधिक रिकॉर्ड, सूची ‘ब’ में डाले गए। पुलिस की रिपोर्ट में कोई मंदिर का पुजारी मिला तो कई खेती कर जीवन-यापन करते मिले।

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many miscreants Leaving crime plowing fields and bells ringing in temple
सांकेतिक - फोटो : iStock

विस्तार

अपराध की बुनियाद पर खौफ का साम्राज्य चलाने वाले हाथों में अब हल और घंटी आ गई है। सख्त कानून व्यवस्था का ही असर है कि पिछले कुछ वर्षों में 135 हिस्ट्रीशीटरों ने अपराध की दुनिया से तौबा कर लिया है। पुलिस हिस्ट्रीशीटरों की ‘ब’ सूची में डाल इनकी निगरानी कर रही है। पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में निष्क्रिय हिस्ट्रीशीटरों के कामों का सत्यापन कर जिक्र किया है। ज्यादातर खेती किसानी करते मिले है तो कई मंदिर में पूजा-पाठ कर अपनी जिंदगी गुजार रहे हैं।

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जानकारी के मुताबिक, अपराधियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस अफसरों ने कई अभियान चलाए। ऑपरेशन शिकंजा के तहत बदमाशों को सजा दिलाने के लिए पुलिस ने पैरवी की तो वहीं, ऑपरेशन गैंगस्टर, ऑपरेशन तमंचा जैसे कई अभियान से पुलिस के हाथ बदमाशों के गिरेबान तक पहुंचे। पुलिस की लगातार कार्रवाई का असर रहा कि पिछले कुछ साल में कई ने अपराध की दुनिया से तौबा करने में ही भलाई समझी। पड़ताल में सामने आया कि पिछले तीन साल में 135 हिस्ट्रीशीटर ऐसे हैं कि जिनकी अपराध में संलिप्तता नहीं मिली है।

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चौरीचौरा में सर्वाधिक 12 हिस्ट्रीशीटर सुधरे

चौरीचौरा में 90 में से 12, कोतवाली में 39 में 7, राजघाट में 48 में से 1, तिवारीपुर में 39 में से 8, कैंट में 24 में से 4, खोराबार में 55 में 3, रामगढ़ताल में 18 में से 2, गोरखनाथ में 55 में 7, शाहपुर में 40 में से 7, कैंपियरगंज में 47 में से 6, पीपीगंज में 62 में 2, सहजनवां में 33 में 5, गीडा में 40 में 7, चिलुआताल में 54 में 9, झंगहा में 73 में 9, पिपराइच में 71 में 10, गुलरिहा में 45 में 1, बांसगांव में 68 में 5, गगहा में 75 में 4, बेलीपार 48 में 3, गोला में 48 में 3, बड़हलगंज में 80 में 2, उरुवा बाजार में 38 में 2, बेलघाट में 23 में 5, खजनी में 71 में 4, सिकरीगंज में 47 में 2 हिस्ट्रीशीटरों ने अपराध की दुनिया से तौबा किया है।

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केस एक

सिकरीगंज के खदेरू शिवपुर में शिव मंदिर बनवाकर उसी में रहते हैं। वह दूसरे का खेत लेकर खेती करते हैं। 52 वर्षीय खदेरू जब 15 साल के थे तो साइकिल लूट कर अपराध की दुनिया में कदम रखे थे। अब वह अपराध से तौबा कर चुके हैं।

केस दो

उरुवा इलाके के जयराम भी अब खेती में घरवालों का सहयोग करते हैं। कभी वह भी अपराध में सक्रिय थे और हिस्ट्रीशीट खोली गई थी। अब यह अपराध में सक्रिय नहीं हैं, इस वजह से पुलिस इन्हें निष्क्रिय सूची में डालकर निगरानी करती है।

एसएसपी डॉ. विपिन ताड़ा ने कहा कि बदमाशों की निगरानी के लिए हिस्ट्रीशीट खोली जाती है। अपराध न करने वाले बदमाशों को निष्क्रिय श्रेणी में डाला जाता है। इसके बावजूद पुलिस उनकी नियमित निगरानी करती है। अपराधियों पर लगातार कार्रवाई की जा रही है।

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