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मनीष हत्याकांड: सीबीआई ने मानसी हॉस्पिटल के दो कर्मचारियों से की पूछताछ, सामने आई ये बड़ी बात
Wed, 17 Nov 2021 01:23 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 17 Nov 2021 01:23 PM IST
सार
सीबीआई की टीम ने मंगलवार को एनेक्सी भवन में ही पूरा दिन बिताया। सीबीआई ने विकास भवन से एक टाइपिस्ट मांग रखा है। पूरे दिन टीम के सदस्य कागजात की पड़ताल कर दस्तावेज सहेजते रहे।
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मनीष गुप्ता की फाइल फोटो।
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
कानपुर के कारोबारी मनीष गुप्ता हत्याकांड की जांच में जुटी सीबीआई ने मंगलवार को मानसी हॉस्पिटल के दो कर्मचारियों से करीब डेढ़ घंटे तक पूछताछ की है। यह वही अस्पताल है जहां मनीष को सबसे पहले ले जाया गया था। पूरे दिन सीबीआई मनीष गुप्ता के गोरखपुर आने से लेकर मौत तक की घटना को समझने और अब तक पूछताछ और दस्तावेज के आधार पर मिली जानकारी की सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी रही।
सीबीआई की टीम ने मंगलवार को एनेक्सी भवन में ही पूरा दिन बिताया। सीबीआई ने विकास भवन से एक टाइपिस्ट मांग रखा है। पूरे दिन टीम के सदस्य कागजात की पड़ताल कर दस्तावेज सहेजते रहे। बीते दिनों टीम ने मनीष के दोस्तों, वेटर, एसआईटी व स्थानीय पुलिस के साथ पूछताछ, सवाल-जवाब और एकत्र किए गए दस्तावेज हासिल किए थे। समझा जा रहा है कि मंगलवार को सीबीआई ने घटना के बारे में अब तक मिले तथ्यों, बयानों को अब लिपिबद्ध करना शुरू कर दिया है। शाम साढ़े पांच बजे के करीब मानसी हास्पिटल के कर्मचारियों को एक के बाद एक कर सीबीआई ने बुलाया। पहले मनीष तिवारी और फिर नितेश गुप्ता को बुलाया। दोनों कर्मचारियों से करीब सात बजे तक पूछताछ चली। कर्मचारियों ने बताया कि मनीष गुप्ता को जब लाया गया तब उनकी हालत गंभीर लग रही थी। डॉक्टर ने चेकअप के बाद उन्हें हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया था। सीबीआई घटना वाली रात के बारे में जानना चाहती थी।
मानसी हॉस्पिटल में पहले ले गए थे मनीष को
होटल से मनीष गुप्ता को सबसे पहले मानसी हॉस्पिटल ले जाया गया था। हालांकि पुलिस के रिकॉर्ड में इस हॉस्पिटल में ले जाने का जिक्र नहीं है। आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने पहले जिला अस्पताल ले जाने का जिक्र अपनी जीडी में किया था लेकिन जिला अस्पताल में ले जाने के कोई सबूत नहीं थे वहीं मानसी में ले जाने के सबूत सीसी टीवी फुटेज के रूप में मौजूद थे।
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सीबीआई की टीम ने मंगलवार को एनेक्सी भवन में ही पूरा दिन बिताया। सीबीआई ने विकास भवन से एक टाइपिस्ट मांग रखा है। पूरे दिन टीम के सदस्य कागजात की पड़ताल कर दस्तावेज सहेजते रहे। बीते दिनों टीम ने मनीष के दोस्तों, वेटर, एसआईटी व स्थानीय पुलिस के साथ पूछताछ, सवाल-जवाब और एकत्र किए गए दस्तावेज हासिल किए थे। समझा जा रहा है कि मंगलवार को सीबीआई ने घटना के बारे में अब तक मिले तथ्यों, बयानों को अब लिपिबद्ध करना शुरू कर दिया है। शाम साढ़े पांच बजे के करीब मानसी हास्पिटल के कर्मचारियों को एक के बाद एक कर सीबीआई ने बुलाया। पहले मनीष तिवारी और फिर नितेश गुप्ता को बुलाया। दोनों कर्मचारियों से करीब सात बजे तक पूछताछ चली। कर्मचारियों ने बताया कि मनीष गुप्ता को जब लाया गया तब उनकी हालत गंभीर लग रही थी। डॉक्टर ने चेकअप के बाद उन्हें हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया था। सीबीआई घटना वाली रात के बारे में जानना चाहती थी।
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मानसी हॉस्पिटल में पहले ले गए थे मनीष को
होटल से मनीष गुप्ता को सबसे पहले मानसी हॉस्पिटल ले जाया गया था। हालांकि पुलिस के रिकॉर्ड में इस हॉस्पिटल में ले जाने का जिक्र नहीं है। आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह ने पहले जिला अस्पताल ले जाने का जिक्र अपनी जीडी में किया था लेकिन जिला अस्पताल में ले जाने के कोई सबूत नहीं थे वहीं मानसी में ले जाने के सबूत सीसी टीवी फुटेज के रूप में मौजूद थे।
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आज होगी आरोपी पुलिसवालों की कोर्ट में पेशी
मनीष की हत्या के आरोप में जेल में निरुद्ध सभी पुलिस वालों की 17 नवंबर यानी आज कोर्ट में पेशी होगी। उन्हें अब तक न्यायिक हिरासत में रखा गया था। अब महत्वपूर्ण यह है कि पेशी के साथ ही यह न्यायिक हिरासत बढ़ती है या फिर सीबीआई उन्हें अपनी कस्टडी में लेती है।
एफआईआर में देरी पर भी है सीबीआई की नजर
मनीष गुप्ता की मौत की वजह तलाशने में जुटी सीबीआई एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी और पुलिसिया लापरवाही के सभी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन कर रही है। मनीष के गोरखपुर के दोस्तों ने अपने बयान में एफआईआर में देरी और लापरवाही के बारे में सवाल उठाए हैं।
सीबीआई, घटना के पहले और मौत के बाद के सभी पहलुओं पर जानकारी जुटा रही है। टीम ने एफआईआर में देरी और तहरीर बदलने से जुड़े पहलू पर भी गौर करना शुरू कर दिया है। मनीष गुप्ता के शव को मोर्चरी में रखवाने से पहले मेडिकल कॉलेज में कुछ मिनट के लिए कटी बिजली भी किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं थी, यह भी समझने का प्रयास किया जा रहा है। मनीष के गोरखपुर में रहने वाले दोस्तों ने मेडिकल कॉलेज में बिजली कटने की भी जानकारी दी थी। मीनाक्षी के बिना थाने गए ही तहरीर के आधार पर एफआईआर लिखने और एफआईआर की कापी को व्हाट्सएप पर भेजने की कार्यशैली भी सीबीआई समझ रही है।
एफआईआर में देरी पर भी है सीबीआई की नजर
मनीष गुप्ता की मौत की वजह तलाशने में जुटी सीबीआई एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी और पुलिसिया लापरवाही के सभी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन कर रही है। मनीष के गोरखपुर के दोस्तों ने अपने बयान में एफआईआर में देरी और लापरवाही के बारे में सवाल उठाए हैं।
सीबीआई, घटना के पहले और मौत के बाद के सभी पहलुओं पर जानकारी जुटा रही है। टीम ने एफआईआर में देरी और तहरीर बदलने से जुड़े पहलू पर भी गौर करना शुरू कर दिया है। मनीष गुप्ता के शव को मोर्चरी में रखवाने से पहले मेडिकल कॉलेज में कुछ मिनट के लिए कटी बिजली भी किसी साजिश का हिस्सा तो नहीं थी, यह भी समझने का प्रयास किया जा रहा है। मनीष के गोरखपुर में रहने वाले दोस्तों ने मेडिकल कॉलेज में बिजली कटने की भी जानकारी दी थी। मीनाक्षी के बिना थाने गए ही तहरीर के आधार पर एफआईआर लिखने और एफआईआर की कापी को व्हाट्सएप पर भेजने की कार्यशैली भी सीबीआई समझ रही है।