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Gorakhpur News: सीलिंग की भूमि पर झंडी लगाकर कराया कब्जा मुक्त
Thu, 21 Nov 2024 02:25 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Thu, 21 Nov 2024 02:25 AM IST
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महराजगंज/निचलौल। क्षेत्र के सेमरहना (बरगदही) गांव स्थित सीलिंग की भूमि को कुछ लोगों ने बैनामा कराकर कब्जा कर लिया था। जिस मामले में अमर उजाला ने 20 अक्तूबर के साथ ही 18 और 19 नवंबर को प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद राजस्व विभाग के जिम्मेदारों की नींद टूटी गई। फिर जिम्मेदारों ने मामले की जांच पड़ताल कर सीलिंग की भूमि को खरीदने वाले लोगों का नाम खतौनी से हटा दिया। फिर आगे की कार्रवाई करते हुए बुधवार को सीलिंग की भूमि पर पहुंच चारों तरफ से लाल झंडी लगाकर कब्जा मुक्त करा दिया। अमर उजाला के प्रकाशित खबर पर राजस्व विभाग की ओर से की गई इस बड़ी कार्रवाई की लोग काफी सराहना कर रहे हैं।
सीलिंग की जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए टीम के साथ मौके पर पहुंचे राजस्व निरीक्षक मनीष पटेल ने कहा की बीते दिनों क्षेत्र के बरगदही गांव निवासनी पूनम गुप्ता ने न्यायालय के आदेश पत्र सहित अन्य साक्ष्यों के साथ डीएम से शिकायत कर बताया था, कि वह वार्ड संख्या 95 सेमरहना और बरगदही से क्षेत्र पंचायत सदस्य है। सेमरहना (बरगदही) में स्थित सीलिंग भूमि से संबंधित दाखिल एक वाद अपर जिलाधिकारी न्यायालय में चल रहा था। इसकी सुनवाई 28 मार्च 2023 को करते हुए कुल 39.55 एकड़ भूमि सिंचित अतिरिक्त घोषित की गई थी। उक्त अतिरिक्त भूमि को आवंटन के लिए आदेश पत्र तहसील भेजा गया था। लेकिन आगे की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। वही कुछ लोग सीलिंग की भूमि को बैनामा कराकर कब्जा भी कर लिया है।
उक्त प्रकरण की जांच पड़ताल में पता चला की सीलिंग की कुल भूमि 39.55 एकड़ में से 20.27 एकड़ भूमि को कई खातेदारों को आवंटन कर दिया गया है। जबकि अभी भी गाटा संख्या 544 और 287 में 19.28 एकड़ सीलिंग भूमि बची हुई। उक्त गाटा संख्या की सीलिंग भूमि को कई लोग खरीदारी कर कब्जा कर लिए है। जांच रिपोर्ट के आधार पर रजिस्ट्रार कानूगो मनोज कुमार श्रीवास्तव ने 16 नवंबर को आदेश जारी करते हुए सीलिंग भूमि की खतौनी से खरीदारों का नाम हटा दी। वही इस मामले में लेखपाल अनिल सिंह, भारतेंदु मिश्रा और कमलेश कुमार शर्मा के साथ पहुंच सीलिंग की भूमि के चारों तरफ लाल झंडी लगाकर कब्जा मुक्त करा दिया गया है।
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लोगों ने अमर उजाला खबर की सराहना की
सीलिंग की भूमि पर राजस्व विभाग की ओर से की गई कार्रवाई पूरे क्षेत्र में चर्चा बनी रही। क्षेत्र के रहने वाले गोपाल गुप्त, कमलेश, नंदू पटेल, भूपति आदि ने कहा कि जमींदारी प्रथा के उन्मूलन के बाद 1961 में सीलिंग एक्ट लागू किया गया। कानून बनने के बाद एक परिवार को 15 एकड़ से ज्यादा सिंचित भूमि रखने का अधिकार नहीं है। असिंचित भूमि के मामले में यह रकबा 18 एकड़ तक है। इसे बेचा नहीं जा सकता। सिर्फ गरीबों को पट्टा किया जा सकता है। लेकिन विभाग के कुछ जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते क्षेत्र के अधिकांश सीलिंग की भूमि पर भू -माफिया का कब्जा है।
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सीलिंग की जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए टीम के साथ मौके पर पहुंचे राजस्व निरीक्षक मनीष पटेल ने कहा की बीते दिनों क्षेत्र के बरगदही गांव निवासनी पूनम गुप्ता ने न्यायालय के आदेश पत्र सहित अन्य साक्ष्यों के साथ डीएम से शिकायत कर बताया था, कि वह वार्ड संख्या 95 सेमरहना और बरगदही से क्षेत्र पंचायत सदस्य है। सेमरहना (बरगदही) में स्थित सीलिंग भूमि से संबंधित दाखिल एक वाद अपर जिलाधिकारी न्यायालय में चल रहा था। इसकी सुनवाई 28 मार्च 2023 को करते हुए कुल 39.55 एकड़ भूमि सिंचित अतिरिक्त घोषित की गई थी। उक्त अतिरिक्त भूमि को आवंटन के लिए आदेश पत्र तहसील भेजा गया था। लेकिन आगे की कार्रवाई नहीं हो पा रही है। वही कुछ लोग सीलिंग की भूमि को बैनामा कराकर कब्जा भी कर लिया है।
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उक्त प्रकरण की जांच पड़ताल में पता चला की सीलिंग की कुल भूमि 39.55 एकड़ में से 20.27 एकड़ भूमि को कई खातेदारों को आवंटन कर दिया गया है। जबकि अभी भी गाटा संख्या 544 और 287 में 19.28 एकड़ सीलिंग भूमि बची हुई। उक्त गाटा संख्या की सीलिंग भूमि को कई लोग खरीदारी कर कब्जा कर लिए है। जांच रिपोर्ट के आधार पर रजिस्ट्रार कानूगो मनोज कुमार श्रीवास्तव ने 16 नवंबर को आदेश जारी करते हुए सीलिंग भूमि की खतौनी से खरीदारों का नाम हटा दी। वही इस मामले में लेखपाल अनिल सिंह, भारतेंदु मिश्रा और कमलेश कुमार शर्मा के साथ पहुंच सीलिंग की भूमि के चारों तरफ लाल झंडी लगाकर कब्जा मुक्त करा दिया गया है।
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लोगों ने अमर उजाला खबर की सराहना की
सीलिंग की भूमि पर राजस्व विभाग की ओर से की गई कार्रवाई पूरे क्षेत्र में चर्चा बनी रही। क्षेत्र के रहने वाले गोपाल गुप्त, कमलेश, नंदू पटेल, भूपति आदि ने कहा कि जमींदारी प्रथा के उन्मूलन के बाद 1961 में सीलिंग एक्ट लागू किया गया। कानून बनने के बाद एक परिवार को 15 एकड़ से ज्यादा सिंचित भूमि रखने का अधिकार नहीं है। असिंचित भूमि के मामले में यह रकबा 18 एकड़ तक है। इसे बेचा नहीं जा सकता। सिर्फ गरीबों को पट्टा किया जा सकता है। लेकिन विभाग के कुछ जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते क्षेत्र के अधिकांश सीलिंग की भूमि पर भू -माफिया का कब्जा है।