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महादेव एप : गोरखपुर के सीए से बनवाई थी कंपनी, यहां के अधिवक्ता ने की थी पैरवी- जानिए पूरा मामला

Tue, 30 Apr 2024 11:14 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो रोहित सिंह, गोरखपुर
रोहित सिंह, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Tue, 30 Apr 2024 11:14 AM IST
सार

एसटीएफ की जांच की जद में गोरखपुर के कुछ मोबाइल फोन विक्रेता और सिम बेचने वाले भी हैं। जांच में अभी तक सामने आया है कि अभय और दूसरे साथी ने गोरखपुर के बैंक रोड स्थित कई दूरसंचार कंपनियों के स्टोर से करीब 1300 कूटरचित आईडी पर सिम खरीदे थे।

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Abhay of Deoria had formed the company of Mahadev gaming app with the help of CA of Gorakhpur
एसटीएफ ने देवरिया के इन्हीं दोनों को गिरफ्तरा किया था। इन्होंने सीए का नाम भी बताया। - फोटो : स्त्रोत- एसटीएफ

विस्तार

महादेव बेटिंग एप मामले में एसटीएफ को महत्वपूर्ण जानकारी हाथ लगी है। पता चला है कि देवरिया के पकड़े गए दोनों आरोपियों ने 2021 में वहीं के एक अधिवक्ता के सहारे गोरखपुर के चार्टर्ड एकाउंटेंट (सीए) से कंपनी बनाई थी। इसी कंपनी पर महादेव गेमिंग गेमिंग वेबसाइट को इन्होंने तैयार किया था। इसे बनाने में जो रकम सीए को दी गई थी, उसका कुछ हिस्सा अधिवक्ता को भी मिला था।
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आरोपियों ने एसटीएफ से पूछताछ में गोरखपुर के सीए अभिषेक सिंह का नाम भी बताया है। इसी आधार पर एसटीएफ ने दर्ज कराए केस में अभिषेक सिंह का नाम भी जोड़ा है।
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सूत्रों ने बताया कि देवरिया के अधिवक्ता का गोरखपुर के सीए से जुड़ाव था। अधिवक्ता ने 2021 में देवरिया के संजीव सिंह और अभय सिंह को सीए के पास गोरखपुर भेजा था। यहां सीए से गेमिंग वेबसाइट के लिए कंपनी बनवाई गई थी।
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एसटीएफ ने जांच में पाया कि ये वेबसाइट गोरखपुर की आईपी एड्रेस पर बनी है। इस कंपनी के प्लेटफाॅर्म पर भी डिजिटल हस्ताक्षर सीए अभिषेक सिंह का मिला। इसी आधार पर गोपनीय तरीके से एसटीएफ की टीम अभिषेक सिंह के पीछे लगी थी। सूत्रों ने बताया कि एसटीएफ यह भी जांच करेगी कि सीए ने भी कंपनी पर बनें गेमिंग वेबसाइट से आर्थिक लाभ लिया है या नहीं।
 

Abhay of Deoria had formed the company of Mahadev gaming app with the help of CA of Gorakhpur
व्हाट्सएप चैटिंग के जरिए अभी भी धडल्ले से चल रहा है ऑनलाइन ठगी का गेमिंग प्लेटफार्म - फोटो : स्त्रोत- सूत्र

20 दिन पहले शहर में आई थी एसटीएफ
एसटीएफ लखनऊ की टीम 20 दिन पहले गोरखपुर आई थी। उन्हें सूचना मिली थी कि देवरिया के दोनों आरोपी भी सीए से मिलने वाले हैं। एसटीएफ इसी दौरान तीनों की गिरफ्तारी करने की तैयारी में थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। एसटीएफ ने कंपनी के आईपी एड्रेस के आधार पर सीए का दफ्तर से लेकर घर तक खंगाला था।

कुशीनगर का रहने वाला है मुख्य आरोपी
एसटीएफ को अभय सिंह ने बताया कि उसकी बुआ का लड़का अभिषेक सिंह, मूल रूप से कुशीनगर जिले के हाटा थाना क्षेत्र के धरमपुर गांव का निवासी है। वर्तमान में अभिषेक दुबई से इस धंधे को संचालित करता है। उसने प्रतिमाह 15 हजार रुपये वेतन और प्रत्येक सिम खरीदकर भेजने पर 500 रुपये मिलने की बात कही थी।

गोरखपुर से भी खरीदे और भेजे गए सिम
सूत्रों ने बताया कि एसटीएफ की जांच की जद में गोरखपुर के कुछ मोबाइल फोन विक्रेता और सिम बेचने वाले भी हैं। जांच में अभी तक सामने आया है कि अभय और दूसरे साथी ने गोरखपुर के बैंक रोड स्थित कई दूरसंचार कंपनियों के स्टोर से करीब 1300 कूटरचित आईडी पर सिम खरीदे थे।

इन्हीं नंबरों से कर लोगों को जोड़ते थे। देवरिया की एक मोबाइल की दुकान से भी पिछले साल सिम खरीदे गए थे। इन सिम को गोरखपुर से ही बसों के सहारे लखनऊ और फिर एयरपोर्ट के सहारे दुबई भेज दिया जाता था। इन नंबरों पर एसटीएफ ने केस दर्ज किया है।

गेमिंग एप से जुड़ने के लिए व्हाट्सएप पर फैला है पूरा रैकेट
 कूटरचित दस्तावेजों के सहारे सिम लेकर फिर ऑनलाइन बेटिंग (जुए) के धंधे में गोरखपुर के कई धंधेबाज अब भी सक्रिय हैं। शहर में महादेव, गेम, महादेव 303 महादेव विड्रॉल, पैसा समेत कई व्हाट्सएप प्लेटफाॅर्म हैं, जहां लोग जुए में रुपये लगाते हैं।

सूत्रों ने बताया कि ऑनलाइन जुए के बड़े धंधेबाजों ने नेपाल तक जाल बिछा लिया है। वहां खुले एक प्रतिष्ठित रिजाॅर्ट में टेबल की बुकिंग गोरखपुर से ही करके रखते हैं। पहले ये शहर में सभी वर्गों से जुड़े काले धंधे के सफेदपोशों के लिए जुए का प्लेटफाॅर्म तैयार करवाते थे, लेकिन पुलिस की सख्ती और बदनामी के डर से इन्होंने अपना धंधा डिजिटल कर दिया है।

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एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई - फोटो : अमर उजाला

एसपी सिटी कृष्न्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि महादेव बेटिंग एप के एक दूसरे प्लेटफॉम अन्ना रेड्डी एप से बेटिंग (जुए) नेटवर्क को गोरखपुर पुलिस ने तोड़ा था। जांच के दौरान पता चला कि युवा कम समय में ज्यादा कमाने के चक्कर में इस प्लेटफाॅर्म से जुड़ रहे हैं।

युवा अपना ध्यान इस तरह के एप से हटाते हुए पढ़ाई और कॅरिअर बनाने पर दें। हमारी नजर भी ऐसे एप और कंपनियों के प्लेटफाॅर्म पर है। युवाओं को पता नहीं चलता, लेकिन वो धीमे-धीमे अपराध के दलदल में फंसते जाते हैं।

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