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Gorakhpur News: लोटस वैली रिजार्ट के संचालक पर टॉयलेट के बहाने जांच से भागने का आरोप, केस दर्ज
Sun, 28 Jan 2024 07:58 AM IST
रोहित सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: रोहित सिंह
Updated Sun, 28 Jan 2024 07:58 AM IST
सार
सहायक आयुक्त ने तहरीर में आरोप लगाया कि मैनेजर महेंद्र मोहन लाल ने पंचनामे पर हस्ताक्षर कर दिया, लेकिन संचालक ने राजकीय कार्य में बाधा डालने की नियत से हस्ताक्षर नहीं किया। अधिकारियों से टायलेट जाने की बात बोलते हुए परिसर से ही कहीं और गायब हो गए। इसके अलावा जाने के साथ ही जांच प्रभावित करने के लिए परिसर की बिजली कटवा दी।
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जीएसटी की टीम रिजार्ट में छापा के दौरान जांच करती( फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वस्तु एवं सेवा कर( जीएसटी) सहायक आयुक्त, रेंज ए विनीत कुमार की तहरीर पर चिलुआताल थाने में लोटस वैली रिजार्ट के संचालक अवधेश पांडेय, नईम अहमद के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। इनके साथ तीन अज्ञात को भी आरोपी बनाया गया है। आरोप लगाया कि शासन की तरफ से सर्च वारंट जारी होने पर विभागीय अधिकारियों के साथ रिजार्ट में छापा मारा गया था। जांच के दौरान मौके पर मिले प्रपत्रों के पंचनामें पर संचालक ने हस्ताक्षर नहीं किया और पेशाब( टायलेट) करने का बहाना कर मौके से गायब हो गए। इससे शासकीय काम पूर्ण होने में काफी विलंब हो गया।
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तहरीर देकर आरोप लगाया कि 23 जनवरी को जीएसटी की टीम नकहा स्थित लोटस वैली रिजार्ट जांच के लिए पहुंची थी। उनके साथ विभाग के पांच अन्य अधिकारी भी थे। जांच में रिजार्ट की बुकिंग, कैटरिंग, फर्म द्वारा किए गए जीएसटी भुगतान की जांच की गई। इसमें कुछ गड़बड़ी मिली। इसी आधार पर पत्रावलियों का पंचनामा तैयार कर मौके पर मौजूद लोगों का हस्ताक्षर लिया जा रहा था। मैनेजर महेंद्र मोहन लाल ने पंचनामे पर हस्ताक्षर कर दिया, लेकिन संचालक ने राजकीय कार्य में बाधा डालने की नियत से हस्ताक्षर नहीं किया।
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अधिकारियों से टायलेट जाने की बात बोलते हुए परिसर से ही कहीं और गायब हो गए। इसके अलावा जाने के साथ ही जांच प्रभावित करने के लिए परिसर की बिजली कटवा दी। विभाग के अधिकारियों द्वारा फोन पर संपर्क करने पर उनका मोबाइल फोन भी बंद रहा था। पहले विभागीय कार्य में सहयोग नहीं दिया और फिर अखबारों में जीएसटी विभाग के अधिकारियों और राज्य सरकार की छवि धूमिल करने के लिए आरोप लगाने लगे। इससे सरकार के साथ विभागीय अधिकारियों की छवि धूमिल होेने के साथ मानहानि भी हुई है। इसी तहरीर के आधार पर गुलहरिया थाने में विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
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