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Gorakhpur News: भू-माफिया कमलेश ने खुद ही उगल दिए थे मददगार के नाम, पुलिस साक्ष्यों पर कर रही काम

Mon, 23 Oct 2023 11:12 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 23 Oct 2023 11:12 AM IST
सार

सब रजिस्ट्रार चंद्रशेखर शाही को गिरफ्तार करने के साथ ही पुलिस अब पूरे नेटवर्क को खंगालने लगी हैं। पुलिस की जांच में इतना तो साफ हो गया है कि पूरा नेटवर्क सरकारी कर्मचारियों के सांठगांठ से चल रहा था। यही वजह है कि सब रजिस्ट्रार को जेल भेजने के साथ ही पुलिस अब अन्य कर्मचारियों के भूमिका की जांच कर रही है।

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Land mafia Kamlesh himself had revealed the names of his government assistants.
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

गोरखपुर में सीलिंग की जमीन बेचकर करोड़पति बना भू माफिया कमलेश यादव ने खुद ही अपने सरकारी मददगारों के नाम उगल दिए थे। उसने पुलिस को बता दिया था कि कैसे वह तहसील से फर्जी दस्तावेज तैयार कराता था और फिर किसी दूसरे को भू स्वामी की जगह पर खड़ा करके रजिस्ट्री करा देता था।

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कमलेश के बयान के आधार पर ही पुलिस साक्ष्य जुटाने का काम शुरू की तो जांच में एक-एक कर सभी तथ्यों की पुष्टि होने लगी और फिर शनिवार को सब रजिस्ट्रार चंद्रशेखर शाही को जेल भेजा गया। अब इसके साथ ही पुलिस उन कर्मचारियों की भी जांच तेज कर दी है, जो भू माफिया के इस काम में मददगार थे। फिलहाल, पुलिस के अलावा प्रशासनिक टीम विभागीय जांच कर रही है।
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जानकारी के मुताबिक, भू माफिया कमलेश यादव अपने साथी दीनानाथ प्रजापति व अन्य के साथ मिलकर कई लोगों को सीलिंग की जमीन बेची है। उसके खिलाफ सबसे पहले एक सैनिक की पत्नी सामने आई, जिसके बाद एक-एक करके 31 केस दर्ज किए गए। अब पुलिस की जांच चौरीचौरा तहसील तक पहुंच गई है।
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सब रजिस्ट्रार चंद्रशेखर शाही को गिरफ्तार करने के साथ ही पुलिस अब पूरे नेटवर्क को खंगालने लगी हैं। पुलिस की जांच में इतना तो साफ हो गया है कि पूरा नेटवर्क सरकारी कर्मचारियों के सांठगांठ से चल रहा था। यही वजह है कि सब रजिस्ट्रार को जेल भेजने के साथ ही पुलिस अब अन्य कर्मचारियों के भूमिका की जांच कर रही है।

सूत्रों की माने तो कमलेश यादव ने सब रजिस्ट्रार के अलावा चार अन्य लोगों का नाम भी बताया है, जिन्होंने तहसील में फर्जी रजिस्ट्री में उसकी मदद की थी। पुलिस एक-एक की भूमिका की जांच कर रही थी। पुलिस साक्ष्य संकलन कर रही है। पुलिस के हाथ कुछ साक्ष्य भी लग गए हैं, जिसकी मदद से जांच में कई और लोगों का गर्दन फंसना तय माना जा रहा है।

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पूछने पर जमीन को बता देता था कमलेश का

अब पुलिस उसकी तलाश कर रही है, जो सीलिंग की जमीन के बारे में तहसील में जाकर पूछने पर खरीदने वाले को यह बता देता था कि जमीन सीलिंग नहीं, बल्कि कमलेश यादव की है। वह कूटरचित खतौनी तक उपलब्ध करा देता था। वैसे तो कमलेश ने इसमें भी एक सरकारी कर्मचारी का नाम उगला था, पुलिस इसकी पुष्टि कर रही है। पुलिस जांच कर रही है कि कहीं कमलेश का कोई साथी ही तो नहीं था, जो तहसील में खरीदार के जाने के समय मौजूद रहता था और बता देता था कि जमीन कमलेश की है।
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