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Gorakhpur News: कानपुर की पतंग, बरेली के धागे...जानलेवा बन रहे चीनी मांझे
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- शहर के कोतवाली इलाके में दुकानों पर मिलते हैं चीनी मांझे
- गोरखपुर में चीनी मांझे से पहले भी हो चुके हैं कई हादसे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पतंगबाजी का शौक अक्सर लोगों की जान पर भारी पड़ता नजर आता है। कानपुर की रंग-बिरंगी पतंगें और बरेली के धागे शहर में आ रहे हैं। इनके साथ इस्तेमाल हो रहा चीनी मांझा गंभीर खतरे का कारण बनता जा रहा है। जिले में कई घटनाएं हुई हैं जिसमें चीनी मांझे से जान जाते बची है। प्रतिबंध के बावजूद बाजार में यह जानलेवा मांझा खुलेआम बिक रहा है। लखनऊ में चीनी मांझे से हुई युवक की मौत के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब पुलिस-प्रशासन अभियान चलाकर सख्ती से कार्रवाई करेगा।
शहर के कोतवाली इलाके में कई ऐसी दुकानें हैं, जहां चीनी मांझा आसानी से मिल जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मांझा बेहद पतला और तेज होता है, जो सामान्य धागे की तुलना में कई गुना खतरनाक है। दोपहिया वाहन चालकों, राहगीरों और पक्षियों के लिए यह किसी धारदार हथियार से कम नहीं। आए दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां मांझे से गला कटने, हाथ-पैर जख्मी होने और यहां तक कि जान जाने तक की घटनाएं हो चुकी हैं। शहर में पिछले कुछ वर्षों में यहां कई लोग इस खतरनाक मांझे का शिकार हो चुके हैं। कहीं बाइक सवार की गर्दन में मांझा फंस गया तो कहीं बच्चों और पक्षियों की मौत हो गई। इसके बावजूद चीनी मांझे की बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है।
सूत्रों ने बताया कि चीनी मांझे की मांग अधिक मुनाफे की वजह से बनी हुई है और कुछ दुकानदार चोरी-छिपे इसकी बिक्री करते हैं। इससे न केवल कानून का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। इस संबंध में एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि अभियान चलाकर चीनी मांझा बेचने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
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केस 1
अक्तूबर 2025 में शाहपुर थाना क्षेत्र के जंगल हकीम नंबर दो, मोहनापुर चुन्नीपुर निवासी महेंद्र निषाद (45) की गर्दन चीनी मांझे से गहराई तक कट गई थी। महेंद्र साइकिल से पादरी बाजार जा रहे थे। घर से बमुश्किल 200 मीटर आगे बढ़े होंगे, तभी चीनी मांझा उनके गर्दन में लिपट गया। दरअसल, रास्ते में एक किशोर पतंग उड़ा रहा था। पतंग कटी बच्चे उसे लूटने दौड़ पड़े। उसी समय साइकिल से गुजर रहे महेंद्र निषाद के गले में मांझा फंस गया। महेंद्र ने खुद को बचाने की कोशिश की लेकिन मांझे की धार इतनी तेज थी कि उनका गला कट गया था। वह सड़क पर लहूलुहान होकर गिर पड़े थे। आसपास के लोगों ने उन्हें उठाया और एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत को गंभीर बताया था।
केस 2
अगस्त 2025 में गोरखनाथ इलाके में प्रतिबंधित चीनी मांझे की चपेट में आने से स्कूटी सवार शिक्षक घायल हो गए थे। विवेकपुरम में रहने वाले प्रमोद सिंह की चीनी मांझे से गर्दन व बाएं हाथ की एक अंगुली कट गई थी। गनीमत रही कि स्कूटी की रफ्तार धीमी थी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
केस 3
जुलाई 2025 में चीनी मांझे की चपेट में आने से एक युवक की जान पर बन आई थी। सूरजकुंड आवास से मां को बाइक से लेकर धर्मशाला जा रहे अमित की सूरजकुंड पुल पर मांझे की चपेट में आने से गले की चार नस कट गई थी। उसे इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया था।
- गोरखपुर में चीनी मांझे से पहले भी हो चुके हैं कई हादसे
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। पतंगबाजी का शौक अक्सर लोगों की जान पर भारी पड़ता नजर आता है। कानपुर की रंग-बिरंगी पतंगें और बरेली के धागे शहर में आ रहे हैं। इनके साथ इस्तेमाल हो रहा चीनी मांझा गंभीर खतरे का कारण बनता जा रहा है। जिले में कई घटनाएं हुई हैं जिसमें चीनी मांझे से जान जाते बची है। प्रतिबंध के बावजूद बाजार में यह जानलेवा मांझा खुलेआम बिक रहा है। लखनऊ में चीनी मांझे से हुई युवक की मौत के बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर अब पुलिस-प्रशासन अभियान चलाकर सख्ती से कार्रवाई करेगा।
शहर के कोतवाली इलाके में कई ऐसी दुकानें हैं, जहां चीनी मांझा आसानी से मिल जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह मांझा बेहद पतला और तेज होता है, जो सामान्य धागे की तुलना में कई गुना खतरनाक है। दोपहिया वाहन चालकों, राहगीरों और पक्षियों के लिए यह किसी धारदार हथियार से कम नहीं। आए दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां मांझे से गला कटने, हाथ-पैर जख्मी होने और यहां तक कि जान जाने तक की घटनाएं हो चुकी हैं। शहर में पिछले कुछ वर्षों में यहां कई लोग इस खतरनाक मांझे का शिकार हो चुके हैं। कहीं बाइक सवार की गर्दन में मांझा फंस गया तो कहीं बच्चों और पक्षियों की मौत हो गई। इसके बावजूद चीनी मांझे की बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है।
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सूत्रों ने बताया कि चीनी मांझे की मांग अधिक मुनाफे की वजह से बनी हुई है और कुछ दुकानदार चोरी-छिपे इसकी बिक्री करते हैं। इससे न केवल कानून का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि आम लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। इस संबंध में एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि अभियान चलाकर चीनी मांझा बेचने वाले दुकानदारों पर कार्रवाई की जाएगी।
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केस 1
अक्तूबर 2025 में शाहपुर थाना क्षेत्र के जंगल हकीम नंबर दो, मोहनापुर चुन्नीपुर निवासी महेंद्र निषाद (45) की गर्दन चीनी मांझे से गहराई तक कट गई थी। महेंद्र साइकिल से पादरी बाजार जा रहे थे। घर से बमुश्किल 200 मीटर आगे बढ़े होंगे, तभी चीनी मांझा उनके गर्दन में लिपट गया। दरअसल, रास्ते में एक किशोर पतंग उड़ा रहा था। पतंग कटी बच्चे उसे लूटने दौड़ पड़े। उसी समय साइकिल से गुजर रहे महेंद्र निषाद के गले में मांझा फंस गया। महेंद्र ने खुद को बचाने की कोशिश की लेकिन मांझे की धार इतनी तेज थी कि उनका गला कट गया था। वह सड़क पर लहूलुहान होकर गिर पड़े थे। आसपास के लोगों ने उन्हें उठाया और एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उनकी हालत को गंभीर बताया था।
केस 2
अगस्त 2025 में गोरखनाथ इलाके में प्रतिबंधित चीनी मांझे की चपेट में आने से स्कूटी सवार शिक्षक घायल हो गए थे। विवेकपुरम में रहने वाले प्रमोद सिंह की चीनी मांझे से गर्दन व बाएं हाथ की एक अंगुली कट गई थी। गनीमत रही कि स्कूटी की रफ्तार धीमी थी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
केस 3
जुलाई 2025 में चीनी मांझे की चपेट में आने से एक युवक की जान पर बन आई थी। सूरजकुंड आवास से मां को बाइक से लेकर धर्मशाला जा रहे अमित की सूरजकुंड पुल पर मांझे की चपेट में आने से गले की चार नस कट गई थी। उसे इलाज के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया गया था।