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Gorakhpur News: खतौनी हो गई रियल टाइम, फिर भी जमीन की जांच में ढीली हो रही है जेब

Sun, 09 Jun 2024 05:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Sun, 09 Jun 2024 05:05 AM IST
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Khatauni has become real time, still the pockets are getting loose in the investigation of land.
-जमीन की जानकारी चाहिए तो खर्च होंगे पांच हजार
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-65 प्रतिशत खतौनियों में नहीं हो पाया है अंश निर्धारण

-खतौनी के साथ रजिस्ट्री की निकलवानी पड़ रही नकल
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। जमीन की खरीद-फरोख्त में फर्जीवाड़े और विवादाें को रोकने के लिए शुरू की गई रियल टाइम खतौनी बनने के बावजूद भी जमीन के बारे जानकारी लेने में लोगों की जेब ढीली हो रही है। एक खतौनी में हिस्सेदारी पता करने के लिए खतौनी के साथ रजिस्ट्री की नकल भी निकलवानी पड़ रही है। इसमें ही पांच रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। जरूरतमंदों को 10 से 15 दिनों तक कचहरी का चक्कर भी काटना पड़ रहा है।
खतौनियों के रियल टाइम होने के बाद भी पहले जैसी समस्याएं हैं, क्योंकि 65 प्रतिशत से अधिक खतौनियों में अंश निर्धारण नहीं हो पाया है। अंश निर्धारण नहीं होने के कारण खतौनी में पता नहीं चल पा रहा है कि किस खातेदार का कितना हिस्सा है? कहीं धोखाधड़ी न हो जाए, इसकी जांच के लिए रजिस्ट्री कार्यालय में जमीन का मुआयना और रजिस्ट्री की नकल निकालने के लिए भागदौड़ करनी पड़ रही है। अधिवक्ताओं के माध्यम से खतौनियों में हुई एक रजिस्ट्री की नकल निकालने के लिए 800 से 1000 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। इसके अलावा नकल में भी मोटी रकम ली जा रही है। अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव ने बताया कि रियल टाइम खतौनी में अंश निर्धारण हो जाए हो तो लोगों को परेशान नहीं होना पड़ेगा। अंश का पता लगाने के लिए रजिस्ट्री की नकल देखनी पड़ रही है।
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राजस्व बोर्ड ने सभी खतौनियों को 30 जून तक रियल टाइम करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। तहसील सदर में निर्धारित तिथि तक खतौनियां रियल टाइम अपडेट होने की पूरी संभावना है, लेकिन अंश निर्धारण पूरा होने में संशय है। ऐसी स्थिति में आम आदमी को राहत देने का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। अधिवक्ता मनोज कुमार गुप्ता ने बताया कि बिना अंश निर्धारण वाली खतौनियों में किसी व्यक्ति के रकबा से अधिक बिक्री करने की आंशका बनी हुई है, जबकि खरीद करने के लिए लोगों को खतौनियों के सभी रजिस्ट्री की नकल निकालनी पड़ रही है।
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प्लाट है, लेकिन पड़ोसी को भी पता नहीं
जिले में 529 खतौनियों को रियल टाइम अपडेट करके अंश निर्धारण करना है, इसमें वे 15 राजस्व गांव भी शामिल हैं, जिनकी खतौनियां भूलेख पोर्टल पर नहीं दिख रही थीं, हालांकि अब इन गांवों की खतौनियां भी दिख रही हैं। राजस्व विभाग का लक्ष्य है कि 20 दिन में सभी खतौनियों को रियल टाइम कर दिया जाए। 28 राजस्व गांवों की खतौनियों की पत्रावली लेखपालों को दे दी गई, लेकिन उन्हें पता नहीं चला पा रहा है कि जिसने जमीन खरीदा है, वह कहां पर है। रजिस्ट्री देखने के बाद ही पता चलेगा कि जिसने खरीदा है उसका हिस्सा कितना है? पड़ोसी भी नहीं बता पा रहे हैं कि उनके बगल में किसकी जमीन है।

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केस एक
खतौनी के रियल टाइम होने के बावजूद भी पता नहीं चल पा रहा है कि किसका हिस्सा कितना है? मुझे शहर में एक जमीन खरीदनी है तो पता ही नहीं चल पा रहा है कि उस खतौनी में कितने रकबे की रजिस्ट्री हुई है। अब खतौनी में हुई सभी रजिस्ट्री की नकल निकलवा रहा हूं ताकि कोई धोखाधड़ी होने की गुंजाइश न रहे।
कमलेश कुमार, बशारतपुर

केस दो
जमीन खरीद के मामले में मैंने खतौनी में हुए आठ रजिस्ट्री की नकल निकालने के लिए अधिवक्ता को शुल्क दिया है। एक खतौनी के लिए 900 रुपये शुल्क दिया हूं। नकल के इंतजार में जमीन खरीदने में देर हो रही है, जबकि अंश निर्धारण होने पर पहली नजर में पता चल जाएगा कि बेचने वाले के नाम कितनी जमीन है।

अभिषेक तिवारी, डोहरिया



खतौनी को रियल टाइम अपडेट करने के लिए तेजी से कार्य किया जा रहा है। शत प्रतिशत खतौनियों में अंश निर्धारण करने का लक्ष्य है। इसके लिए लेखपाल संबंधित राजस्व गांवों में जा रहे हैं और लोगों से बात करके अंश निर्धारण कर रहे हैं।
विकास सिंह, तहसीलदार सदर
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