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जीवित्पुत्रिका व्रत: संतान की दीर्घायु के लिए माताओं ने रखा निर्जल व्रत, ये है व्रत की मान्यता
Wed, 29 Sep 2021 06:54 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 29 Sep 2021 06:54 PM IST
सार
व्रती महिलाओं ने की बरियार के पौधे की पूजा-अर्चना, व्रत की कथा सुन सभी के लिए की मंगलकामना।
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Jivitputrika Vrat 2021
- फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
जीवित्पुत्रिका व्रत (जिउतिया) का पर्व बुधवार को परंपरागत रूप से श्रद्धा के साथ मनाया गया। माताओं ने संतान की दीर्घायु होने की कामना के साथ निर्जल व्रत रखा। साथ ही सभी के लिए मंगलकामना भी की। दोपहर के बाद माताओं ने संतान की समृद्धि और आरोग्य के मनोरथ के साथ बरियार (पौधे) की पूजा की।
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इसके बाद जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा भी सुनीं। माताएं गुरुवार को अपने और अपनी संतान के गले में जिउतिया बांधने के बाद व्रत का पारण करेंगी। बुधवार को व्रत का दिन होने के चलते घरों में साफ-सफाई का सिलसिला भोर से ही शुरू हो गया। माताओं ने सूर्य के उगने से पूर्व सरगही खाकर पानी पिया। फिर पूरे दिन निर्जल व्रत रखने का संकल्प लिया।
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दोपहर के बाद चिचिहड़ा का दातून कर माताओं ने स्नान किया और नये वस्त्र धारण किए। उसके बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हुआ। माताएं व्रत का पारण बृहस्पतिवार को संतानों को जिउतिया बांधने के बाद करेंगी।
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ये है व्रत की पौराणिक मान्यता
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग में देवी कुंती ने कर्ण को नदी में प्रवाहित करने के बाद उसकी रक्षा के लिए बरियार पौधे की पूजा की। मान्यतानुसार बरियार का कुंती द्वारा पूजन किए जाने से ही कर्ण का शरीर वज्र के समान हुआ था। तभी से इस व्रत की शुरुआत मानी जाती है।