फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Japanese quail special story from basti

बस्ती: जापानी बटेर का पालन कर हो सकते हैं मालामाल, ढाई दशक के लंबे प्रयोग के बाद हुआ है इसका विकास

Mon, 31 May 2021 06:45 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती।
अमर उजाला नेटवर्क, बस्ती। Published by: vivek shukla Updated Mon, 31 May 2021 06:45 PM IST
सार

  • उपयोग के लिए सिर्फ 30 दिन में तैयार हो जाते हैं जापानी बटेर
  • एक मुर्गी रखने की जगह पर रखे जा सकते हैं दस बटेर के बच्चे

विज्ञापन
Japanese quail special story from basti
जापानी बटेर। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

जापानी नस्लों के बटेर (पक्षी) का पालन अब व्यवसाय के रूप में अपनाकर किसान अधिक लाभ पा सकते हैं। इसके लिए जापान के पशुपालन वैज्ञानिकों ने नई नस्ल का विकास कर देश व प्रदेश में जगह-जगह उत्पादन शुरू कर दिया है।

विज्ञापन


बटेर पक्षी खेतों व वन क्षेत्रों में सबसे तेज भागने वाला पक्षी माना जाता है। 200 से 250 ग्राम के वजन वाली इस पक्षी का मांस और अंडा बहुत ही स्वादिष्ट माना जाता है। होटलों में इसकी बढ़ती मांग को देखते हुए जापान के वैज्ञानिकों ने तकरीबन 25 साल के अथक प्रयास के बाद इसकी नस्ल का बेहतर विकास किया है। देश में बड़ी संख्या में किसान इसका पालन कर लागत से कई गुना अधिक लाभ पा रहे हैं।
विज्ञापन

 
ये हैं बटेर की प्रमुख प्रजातियां
बटेर पालन के लिए मुख्य रूप से फराओ, इंग्लिश सफेद, कैरी उत्तम, कैरी उज्जवल, कैरी श्वेता, कैरी पर्ल व कैरी ब्राउन की जापानी नस्लें किसानों के लिए उपलब्ध हैं। इसकी प्रमुख खासियत यह है कि ये सिर्फ 30 दिनों में वयस्क हो जाते हैं और बेचने के लिए तैयार हो जाते हैं। साल भर के अंतराल में ही मांस के लिए बटेर का 10-11 उत्पादन ले सकते हैं। इसके चूजे बाजार में बेचने के लिए चार से पांच सप्ताह में ही तैयार हो जाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

अंडा उत्पादन में हैं बेजोड़

ये छह से सात सप्ताह में ही अंडे देने लायक हो जाते हैं। मादा प्रतिवर्ष 250 से 300 अंडे देती है। 80 प्रतिशत से अधिक अंडा उत्पादन 9-10 सप्ताह में ही शुरू हो जाता है। एक मुर्गी रखने के स्थान में ही 10 बटेर के बच्चे रखे जा सकते हैं। इसके साथ ही रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होने के चलते इनकी मृत्यु भी कम होती है।

बाराबंकी के गंजरिया फार्म पर मिलेंगे चूजे
बस्ती स्थित कृषि विज्ञान केंद्र बंजरिया के पशुपालन वैज्ञानिक डॉ. डीके श्रीवास्तव ने बताया कि बटेर पालन करने वाले किसानों को पूरी जानकारी यहां उपलब्ध कराई जा रही है और बाराबंकी स्थित गंजरिया समेत लखनऊ के कई निजी फार्मों से चूजे उपलब्ध कराने का इंतजाम है। किसान हमारे इस नंबर (8737983981) पर भी संपर्क कर आवश्यक जानकारी ले सकते हैं।



 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed