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एंटी अटैक आर्मी कैंप: ऐसा जो जवानों को अंधेरे में आतंकियों से करेगा सचेत, दुश्मन को बनाएगा निशाना

Wed, 17 May 2023 04:27 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 17 May 2023 04:27 PM IST
सार

आईटीएम के यांत्रिकी विभाग के अध्यक्ष विनीत राय और सिविल के अध्यक्ष आशुतोष गुप्ता के नेतृत्व में यह मॉडल, बीटेक के छात्र दिग्विजय यादव, अमन शर्मा और दीपक कुशवाहा ने तैयार किया है। इन छात्रों का कहना है कि यह पूरी तरह से सेंसर से लैस होगा और मौजूदा आर्मी कैंप से अलग है।

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ITM Students prepared such a model of anti attack army camp
आईटीएम गीडा। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (आईटीएम) गीडा के विद्यार्थियों ने एक ऐसा एंटी अटैक आर्मी कैंप का मॉडल तैयार किया है, जो न सिर्फ अंधेरे में आतंकी व नक्सली हमलों से जवानों को सचेत कर देगा बल्कि ऑटोमेटिक गन से कैंप के अंदर से दुश्मन को टार्गेट भी करेगा। आईटीएम के छात्रों ने यह एंटी अटैक आर्मी कैंप राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस के उपलक्ष्य में तैयार किया है। संस्थान की ओर से बनाए गए इस कैंप के संबंध में गृह एवं रक्षा मंत्री को भी पत्र भेजने की तैयारी है।

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आईटीएम के यांत्रिकी विभाग के अध्यक्ष विनीत राय और सिविल के अध्यक्ष आशुतोष गुप्ता के नेतृत्व में यह मॉडल, बीटेक के छात्र दिग्विजय यादव, अमन शर्मा और दीपक कुशवाहा ने तैयार किया है। इन छात्रों का कहना है कि यह पूरी तरह से सेंसर से लैस होगा और मौजूदा आर्मी कैंप से अलग है। यह वायरलेस, लैंडमाइंस, सेंसर, रेडियो फ्रिक्वेंसी मोशन सेंसर और कैमरे से लैस हैl
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इस सेंसर के रेडियो रिसीवर कैंप के अंदर व बाहर लगे हैं और इनके छोटे-छोटे लैंडमाइंस ट्रांसमीटर हैं। इस ट्रांसमीटर को कैंप से दूर चारों तरफ, जमीन के अन्दर छुपाकर फ़िट किया जाता है। जैसे इस लैंडमाइंस में लगे प्रेशर सेंसर स्विच पर कोई दबाव पड़ता है तो स्मार्ट कैंप में लगे अलार्म के रेड सिग्नल ब्लिंक करने लगेगा, जिससे कैंप के अंदर जवानों को दुश्मन के आने की सूचना मिल जाएगी और जवान समय रहते सतर्क होकर अपना बचाव करने में सक्षम होंगे।
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इसमें एक और भी सेंसर है जो वस्तु की गति को डिटेक्ट करते ही कैंप को सिग्नल भेजता है कि हमारे कैंप के रेड जोन क्षेत्र में कोई आया है। इस सेंसर को भी कैंप के 200 मीटर के एरिया में लगाया जा सकता है। कैंप में इलेक्ट्रिक सोलर गन भी लगाया गया है, जिसके माध्यम से कैंप के अंदर से दुश्मन को टार्गेट किया जा सकेगा। कैंप में लगे गन से हमारे जवान चारों तरफ रिमोट की सहायता से गोलियों की बौछार कर सकते हैं।

बताया कि कैंप का प्रोटोटाइप बनाने में 15 दिन का समय लगा है और इसे बनाने में, मेटल गन, हाफ इंच बैरल पाईप, 12 वोल्ट गियर मोटर, वायरलेस फ़ायरिंग, मैन्युअल फ़ायरिंग ट्रिगर, रेडियो सेंसर्स, सोलर 12 वोल्ट, बैटरी 9 वोल्ट, मॉनिटर डिस्प्ले आदि उपकरणों का प्रयोग किया गया हैं।

संस्थान के निदेशक डॉ एनके सिंह ने बताया कि छात्रों के द्वारा लाए गए इनोवेशन आईडिया अगर अच्छे हैं तो संस्थान उक्त छात्रों के आइडिया को नवाचार में बदलने के लिए हर संभव मदद प्रदान करता हैं। सेना के जवानों की सुरक्षा के लिए बनाया गया स्मार्ट कैंप जो देश के काम आ सकता है, इसके लिए हम कॉलेज प्रशासन की तरफ से देश के गृह मंत्री और रक्षा मंत्री को पत्र लिख रहे है। छात्रों के इस मॉडल को देखकर संस्थान के अध्यक्ष नीरज मातनहेलिया, सचिव श्याम बिहारी अग्रवाल, कोषाध्यक्ष निकुंज मातनहेलिया, संयुक्त सचिव अनुज अग्रवाल ने बधाई देते हुए प्रसन्नता व्यक्त की।



 

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