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Gorakhpur News: मकानों में दरार आने की जांच पूरी, अब तय होगा मुआवजा

Tue, 30 Apr 2024 11:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Tue, 30 Apr 2024 11:21 AM IST
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Investigation into cracks in houses completed, now compensation will be decided in Gorakhpur
हरिसेवकपुर नंबर दो निर्माणाधीन गोड़धोइया नाला। - फोटो : अमर उजाला

गोड़धोइया नाला के किनारे मकानों की दरार देखने पहुंची टीम ने जांच पूरी कर डीएम को सौंप दी है। चार किमी लंबाई में करीब 12 से 15 मकानों में दरारें मिली हैं। प्रशासन अब इन मकानों के मुआवजे की रकम तय करेगा। इसके बाद मकान मालिकों से प्रशासन के हक में रजिस्ट्री की पहल करेगा।

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राजगनर के राजेश श्रीवास्तव के मकान में कई स्थानों पर दरार आने के मामले में एसडीएम मृणाली अविनाश जोशी ने संयुक्त जांच टीम बनाई थी। जल निगम के अधीक्षण अभियंता रतनसेन सिंह, अधिशासी अभियंता पंकज कुमार, एई विनय चौधरी एवं जेई प्रमोद तिवारी के साथ राजस्व विभाग एवं लोक निर्माण विभाग की टीम ने दो दिनों तक जांच की।
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टीम ने करीब 12 से 15 ऐसे मकान पाए हैं, जिनमें हल्की दरारें हैं। टीम की रिपोर्ट के बाद अब प्रशासन आगे की कार्रवाई करेगा।

उधर, राजनगर के राजेश श्रीवास्तव का कहना है कि उनकी मकान में भले ही दरार आ गया है, लेकिन उसे ठीक कराकर रहेंगे। वे अपना मकान प्रशासन को नहीं देना चाहते हैं। उनका कहना है कि लापरवाही निर्माण कराने वाली संस्था से हुई है, इसलिए प्रशासन उनकी मकान की मजबूती से मरम्मत कराए।
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डीएम कृष्णा करुणेश ने बताया कि जिन मकानों की नींव में दरार आई, वहां के लोगों को उचित मुआवजा देकर प्रशासन रजिस्ट्री करा लेगा। इसके लिए मकान मालिकों की सहमति ली जाएगी।

धोबी घाट के पास भी प्लाटिंग कर बेच दी गई सीलिंग की जमीन
गोड़धोइया नाला के करीब हरिसेवकपुर नंबर दो ही नहीं, धोबी घाट के पास भी खाली जमीनों की प्लाटिंग कर बेच दिया गया। इसके अलावा नाला के पूरब दिशा में करीब 50 हजार वर्ग फीट जमीन सीलिंग की है। इन जमीनों पर भी धंधेबाजों की नजर है। सूत्रों की मानें तो कुछ जमीनें बेच भी दी गई हैं।

जमीनों के धंधेबाज ज्यादातर बिहार के गोपालगंज, थावे और सिवान के आसपास के लोगों को अपने चंगुल में फंसाते हैं। जमीनों के दस्तावेजों में हेरफेर बड़ी चालाकी से फंसा लेते हैं। उधर, प्रशासनिक अमले को भी मिलाकर रखते हैं, जिससे कोई रोकता-टोकता भी नहीं है।


शाहपुर के शैलेश कुमार कहना है कि नाला के किनारे ज्यादातर जमीनें सीलिंग की हैं। साईंधाम में भी दो से तीन एकड़ जमीन सीलिंग की है, जिसकी प्लाटिंग हुई है। जांच हो तो सारा सच सामने आ जाएगा।

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