{"_id":"650755cd92a0d5a5090c9f96","slug":"indias-guru-disciple-tradition-has-been-rich-prof-lalit-kumar-gorakhpur-news-c-7-gkp1038-308688-2023-09-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"समृद्ध रही है भारत की गुरु-शिष्य परंपरा : प्रो. ललित कुमार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समृद्ध रही है भारत की गुरु-शिष्य परंपरा : प्रो. ललित कुमार
Mon, 18 Sep 2023 01:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 18 Sep 2023 01:09 AM IST
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कला संकाय के संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग की ओर से 42वें दीक्षांत समारोह के सप्ताह के अंतर्गत ऑनलाइन विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ललित कुमार गौड़ ने संस्कृत साहित्य में विद्यमान दीक्षांत परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में गुरु-शिष्य परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। उन्होंने रघुवंशम में वर्णित कौत्स एवं वरतन्तु के मार्मिक प्रसंग को उपस्थापित किया। कला संकाय की अधिष्ठाता एवं संस्कृत विभाग की अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडे ने अतिथियों के स्वागत के साथ दीक्षांत परंपरा पर विचार रखे। संचालन डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. देवेंद्र पाल ने किया। इस अवसर पर विभागीय सहयोगी डॉ. लक्ष्मी मिश्रा, डॉ. कुलदीपक शुक्ल, डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह, डॉ. रंजन लता, डॉ. मृणालिनी, डॉ. स्मिता द्विवेदी, डॉ. ज्ञानधर भारती आदि रहे।
विज्ञापन
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कला संकाय के संस्कृत एवं प्राकृत भाषा विभाग की ओर से 42वें दीक्षांत समारोह के सप्ताह के अंतर्गत ऑनलाइन विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन हुआ।
कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ता कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. ललित कुमार गौड़ ने संस्कृत साहित्य में विद्यमान दीक्षांत परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत में गुरु-शिष्य परंपरा अत्यंत समृद्ध रही है। उन्होंने रघुवंशम में वर्णित कौत्स एवं वरतन्तु के मार्मिक प्रसंग को उपस्थापित किया। कला संकाय की अधिष्ठाता एवं संस्कृत विभाग की अध्यक्ष प्रो. कीर्ति पांडे ने अतिथियों के स्वागत के साथ दीक्षांत परंपरा पर विचार रखे। संचालन डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. देवेंद्र पाल ने किया। इस अवसर पर विभागीय सहयोगी डॉ. लक्ष्मी मिश्रा, डॉ. कुलदीपक शुक्ल, डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह, डॉ. रंजन लता, डॉ. मृणालिनी, डॉ. स्मिता द्विवेदी, डॉ. ज्ञानधर भारती आदि रहे।
विज्ञापन