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‘वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम’ बताएगा नदी का सटीक जलस्तर
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‘वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम’ बताएगा नदी का सटीक जलस्तर
गोरखपुर। अब रेल पुलों पर नदियों का जलस्तर ‘वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम’ से मापा जाएगा। पूर्वोत्तर रेलवे के दायरे में महत्वपूर्ण नदियों पर बने पुल पर इसे लगा दिया गया है। मापन यंत्र में लगे सेंसर के जरिए पल-पल के जलस्तर की जानकारी मिलेगी। यही नहीं इस सिस्टम से जुड़े अधिकारियों के मोबाइल पर जलस्तर की जानकारी भी आती रहेगी।
पारंपरिक गेज पद्धति से नदियों का जलस्तर पता करने में तत्कालिक सूचनाएं नहीं मिल पाती थी। इससे रेलवे ट्रैक और पुल पर खतरे का भांप पाना मुश्किल होता था और कभी-कभी बाढ़ का पानी ट्रैक पर भी आ जाता है। लेकिन आधुनिक ‘वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम’ के इस्तेमाल से मॉनिटरिंग करना आसान हो जाएगा। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि अभी दारागंज-झूसी के बीच स्थित आइजट ब्रिज, मांझी-बकुलहा के बीच स्थित पुल संख्या 16 एवं पनियहवा-बाल्मिकी नगर के बीच स्थित पुल संख्या 50, शारदा नदी पर पुल संख्या 97 पर इस सिस्टम को लगाया गया है। भविष्य में सभी बड़े पुलों पर ‘वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम’ को लगाए जाने की योजना है।
सिस्टम ऐसा करेगा काम
सोलर सिस्टम के माध्यम से रेल पुल के पास नदी में एक सेंसर लगाया जाता है, जिसमें एक चिप भी होती है। यह सेंसर ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा होता है। इस नई प्रणाली में रेल पुलों से संबद्ध सहायक मंडल इंजीनियर, कार्य निरीक्षक एवं रेल पथ निरीक्षक आदि के मोबाइल नंबर फीड किए गए हैं। प्रतिदिन नियमित अंतराल पर नदियों के जल स्तर के घटने एवं बढ़ने की जानकारी एसएमएस के माध्यम से यह प्रणाली संबंधित अधिकारियों को स्वत: भेज देती है।
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गोरखपुर। अब रेल पुलों पर नदियों का जलस्तर ‘वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम’ से मापा जाएगा। पूर्वोत्तर रेलवे के दायरे में महत्वपूर्ण नदियों पर बने पुल पर इसे लगा दिया गया है। मापन यंत्र में लगे सेंसर के जरिए पल-पल के जलस्तर की जानकारी मिलेगी। यही नहीं इस सिस्टम से जुड़े अधिकारियों के मोबाइल पर जलस्तर की जानकारी भी आती रहेगी।
पारंपरिक गेज पद्धति से नदियों का जलस्तर पता करने में तत्कालिक सूचनाएं नहीं मिल पाती थी। इससे रेलवे ट्रैक और पुल पर खतरे का भांप पाना मुश्किल होता था और कभी-कभी बाढ़ का पानी ट्रैक पर भी आ जाता है। लेकिन आधुनिक ‘वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम’ के इस्तेमाल से मॉनिटरिंग करना आसान हो जाएगा। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि अभी दारागंज-झूसी के बीच स्थित आइजट ब्रिज, मांझी-बकुलहा के बीच स्थित पुल संख्या 16 एवं पनियहवा-बाल्मिकी नगर के बीच स्थित पुल संख्या 50, शारदा नदी पर पुल संख्या 97 पर इस सिस्टम को लगाया गया है। भविष्य में सभी बड़े पुलों पर ‘वाटर लेवल मॉनिटरिंग सिस्टम’ को लगाए जाने की योजना है।
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सिस्टम ऐसा करेगा काम
सोलर सिस्टम के माध्यम से रेल पुल के पास नदी में एक सेंसर लगाया जाता है, जिसमें एक चिप भी होती है। यह सेंसर ट्रैक मैनेजमेंट सिस्टम से जुड़ा होता है। इस नई प्रणाली में रेल पुलों से संबद्ध सहायक मंडल इंजीनियर, कार्य निरीक्षक एवं रेल पथ निरीक्षक आदि के मोबाइल नंबर फीड किए गए हैं। प्रतिदिन नियमित अंतराल पर नदियों के जल स्तर के घटने एवं बढ़ने की जानकारी एसएमएस के माध्यम से यह प्रणाली संबंधित अधिकारियों को स्वत: भेज देती है।
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