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हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार है भारतीय नौसेना : प्रो. हरी सरन
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- डीडीयू में भारतीय नौसेना दिवस पर व्याख्यान का आयोजन किया गया
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। डीडीयू के रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन विभाग द्वारा भारतीय नौसेना दिवस के अवसर पर सोमवार को विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्य वक्ता प्रो. हरी सरन ने कहा कि आज की नौसेना हर चुनौती से निपटने को तैयार है। उन्होंने 21वीं शताब्दी को सामुद्रिक शताब्दी यानी एशिया की शताब्दी कहा।
प्रो. हरी सरन ने अपने उद्बोधन ने कहा कि 4 दिसंबर के अवसर पर भारतीय नौसेना दिवस का आयोजन 1971 के युद्ध में भारतीय नौसेना द्वारा किए गए साहसपूर्ण सैन्य अभियानों के उपलक्ष्य में किया जाता है। 1971 के युद्ध में भारत की विजय व बांग्लादेश के स्थापना में भारतीय नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
भारतीय नौसेना के रणनीतिक उद्देश्यों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना न सिर्फ एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में बल्कि वैश्विक नौसैनिक शक्ति के रूप में भारत की छवि को स्थापित करने का प्रयास कर रही है। इस दिशा में आने वाली प्रत्येक चुनौती से मजबूती से निपट रही है।
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उन्होंने भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही सागर परियोजना, सागरमाला परियोजना एवं भारतीय नौसेना को ट्रू ब्लू वाटर नेवी बनाने के लिए भविष्य की जरूरतों संबंधी जानकारी भी दी। विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह ने स्वागत और संचालन पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने किया। इस दौरान प्रो. श्रीनिवास मणि त्रिपाठी, प्रो. प्रदीप कुमार यादव, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. अभिषेक सिंह, शोध छात्र, स्नातक एवं परास्नातक के विद्यार्थी मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। डीडीयू के रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन विभाग द्वारा भारतीय नौसेना दिवस के अवसर पर सोमवार को विशिष्ट व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्य वक्ता प्रो. हरी सरन ने कहा कि आज की नौसेना हर चुनौती से निपटने को तैयार है। उन्होंने 21वीं शताब्दी को सामुद्रिक शताब्दी यानी एशिया की शताब्दी कहा।
प्रो. हरी सरन ने अपने उद्बोधन ने कहा कि 4 दिसंबर के अवसर पर भारतीय नौसेना दिवस का आयोजन 1971 के युद्ध में भारतीय नौसेना द्वारा किए गए साहसपूर्ण सैन्य अभियानों के उपलक्ष्य में किया जाता है। 1971 के युद्ध में भारत की विजय व बांग्लादेश के स्थापना में भारतीय नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका रही थी।
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भारतीय नौसेना के रणनीतिक उद्देश्यों का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना न सिर्फ एक क्षेत्रीय शक्ति के रूप में बल्कि वैश्विक नौसैनिक शक्ति के रूप में भारत की छवि को स्थापित करने का प्रयास कर रही है। इस दिशा में आने वाली प्रत्येक चुनौती से मजबूती से निपट रही है।
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उन्होंने भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही सागर परियोजना, सागरमाला परियोजना एवं भारतीय नौसेना को ट्रू ब्लू वाटर नेवी बनाने के लिए भविष्य की जरूरतों संबंधी जानकारी भी दी। विभागाध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह ने स्वागत और संचालन पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. हर्ष कुमार सिन्हा ने किया। इस दौरान प्रो. श्रीनिवास मणि त्रिपाठी, प्रो. प्रदीप कुमार यादव, डॉ. जितेंद्र कुमार, डॉ. अभिषेक सिंह, शोध छात्र, स्नातक एवं परास्नातक के विद्यार्थी मौजूद रहे।