इस शख्स पर अंग्रेजों ने रखा था 300 रुपये का इनाम, 200 लोगों के साथ मिलकर उखाड़ डाली थी रेलवे लाइन
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आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. कृष्णा राय को जनता नहीं भूली। पहले के नेता में बड़ा ही भाव था। पर्चा दाखिला का शुल्क विपक्ष से भी ले लेते थे, उसमें से थे कृष्णा राय। पैदल ही प्रचार कर लगातार तीन बार जीते थे चुनाव।
कृष्णा राय के निजी सहायक रहे रमजान अंसारी से बातचीत पर यादें ताजा हुईं। देवरिया जिले के रामपुर कारखाना ब्लॉक के गांव कुशहरी निवासी कृष्णा राय ने 1942 के आंदोलन में महती भूमिका निभाई। गांधीजी ने जब अंग्रेज भारत छोड़ो, देशवासियों करो या मरो का नारा दिया तो उस समय कृष्णा राय ने 200 लोगों के साथ अहिल्यापुर देवरिया रेलवे लाइन उखाड़ दी।
टेलीफोन का तार काटकर अंग्रेज पुलिस हुक्मरानों से संपर्क तोड़ दिया। कृष्णा राय पर मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस उनको ढूंढने में लगी रही। परिवार वालों पर जुल्म ढाए गए। अंग्रेजों ने उनपर तीन सौ रुपये रुपये का इनाम घोषित करते हुए कमर के नीचे गोली मारने का आदेश दिया। तुर्तीपार स्टेशन पर उनकी गिरफ्तारी हुई। 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ तो बाइज्जत रिहा हुए।
1975 की इमरजेंसी में गए थे जेल
1957 में पहली बार सोशलिस्ट पार्टी से चुनाव लड़े देवरिया विधान सभा से और कांग्रेस से तीन सौ वोटों से हारे। 1962 में सोशलिस्ट पार्टी से चुनाव छह हजार वोटों से जीते। 1974 में 17 हजार वोटों से कांग्रेस के दीप नारायन मणि त्रिपाठी को हराकर उनके पांव छुए।
रमजान बताते हैं कि चुनाव में पर्चा दाखिला शुल्क के लिए कृष्णा राय को दीप नारायण मणि ने 251 रुपये और खर्चे के लिए 50 रुपये दिए थे। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 आधी रात को इमरजेंसी लगाई तो उसमें कृष्णा राय अपने निजी सहायक रमजान अंसारी, चंद्रिका के साथ गिरफ्तार हुए। डीआईआर मिसा के अंतर्गत 16 माह जेल में बंद रहे। कृष्णा राय का जन्म 15 अगस्त 1920 को हुआ था। 30 अक्तूबर 1988 को स्वर्गवास हो गया।