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Gorakhpur: कूल्हे में रक्त का प्रवाह कम होने पर करना पड़ा रहा प्रत्यारोपण, जानिए विशेषज्ञ क्या दे रहे हैं सलाह
Sat, 30 Jul 2022 01:19 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 30 Jul 2022 01:19 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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कूल्हे की हड्डी के रक्त का प्रवाह कम होने की वजह से कूल्हे के अंदर का हेड सूखने लगता है और धीरे-धीरे कूल्हा खराब हो जाता है। समय से इलाज न कराने पर कूल्हा काम करना बंद कर देता है। इसके बाद केवल प्रत्यारोपण ही विकल्प है।
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ये बातें शुक्रवार बीआरडी मेडिकल कॉलेज के हड्डी रोग विभागध्यक्ष डॉ. पवन प्रधान ने कहीं। वह कूल्हा प्रत्यारोपण पर आयोजित ऑनलाइन सेमिनार को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित रहे थे। उत्तर प्रदेश ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन की तरफ से आयोजित सेमिनार में शहर के अन्य जिलों के हड्डी रोग विशेषज्ञ शामिल हुए।
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डॉ. पवन प्रधान ने बताया कि कूल्हे में रक्त का प्रवाह जब बंद हो जाता है तो इस बीमारी में एक हाथ और पैर का ऑपरेशन करना पड़ता है। इसमें कूल्हे की पीछे की मांसपेशी रक्त की नस के साथ निकाल कर कूल्हे में लगाई जाती है। इससे रक्त का प्रवाह फिर से शुरू हो जाता है। कई बार कूल्हे प्रत्यारोपण की भी स्थिति आ जाती है।
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आईएमए के मीडिया प्रभारी डॉ. इमरान अख्तर ने बताया कि यह बीमारी खासतौर पर उन लोगों को होती है, जो लंबे समय तक शराब का सेवन करते हैं यार लंबे समय तक स्टेरॉयड का इस्तेमाल करते हैं। इस बीमारी की अब तक कोई दवा नहीं आई, जो मरीज को बिना ऑपरेशन के ठीक कर सके।