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Exclusive: अवैध लाइन का खेल, मुनाफा आता गया और बिछती गईं लाइनें

Wed, 14 Feb 2024 12:24 PM IST
vivek shukla रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 14 Feb 2024 12:24 PM IST
सार

पावर कारपोरेशन के नियम के मुताबिक, बिजली लाइन के खींचने के लिए संबंधित अवर अभियंता काम के मद में स्टोर से केबल, खंभा और ट्रांसफार्मर स्वीकृत करवाता है। लेकिन, कई मामले पकड़े गए जिसमें अवैध लाइनें खींच दी गई। हर बार सिर्फ ठेकेदार और फर्म पर मुकदमा दर्ज कर मामले को हल्का कर दिया गया।
 

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Illegal line game profits kept coming and lines kept getting laid in Gorakhpur
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर के जगदीशपुर कस्बे के पास कुछ दिनों पहले निजी कॉलोनी शिवशक्ति नगर में लेजर पावर फर्म की ओर से नियम विरूद्ध 500 मीटर तक अवैध लाइन खींच दी गई थी। मामले में अधिशासी अभियंता की तहरीर पर एंटी थेफ्ट थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। इसमें अज्ञात के नाम पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया। लेकिन, कॉलोनी में अवैध लाइन खींचने के मामले में विभाग की किसी जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय नहीं की गई।

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यह मामला नया है, पहले भी इस तरह कई बार अवैध लाइनें खींच दी गई और मुनाफा के खेल में जिम्मेदार बिजली निगम को चूना लगाते रहे।
पावर कारपोरेशन के नियम के मुताबिक, बिजली लाइन के खींचने के लिए संबंधित अवर अभियंता काम के मद में स्टोर से केबल, खंभा और ट्रांसफार्मर स्वीकृत करवाता है। लेकिन, कई मामले पकड़े गए जिसमें अवैध लाइनें खींच दी गई। हर बार सिर्फ ठेकेदार और फर्म पर मुकदमा दर्ज कर मामले को हल्का कर दिया गया।
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लाइनमैनों की होती है बड़ी भूमिका
बिजली निगम के एक सेवानिवृत्त अभियंता ने बताया कि लाइनमैन जानते हैं कि क्षेत्र में उनके बिना सहमति के बिजली आपूर्ति सुचारु ढंग से नहीं चल सकती है। क्षेत्र के अभियंता भी लाइनमैनों के प्रति सरल हो जाते हैं, क्योंकि आपूर्ति व्यवस्था बिजली उपकेंद्र से लेकर उपभोक्ता के घरों तक लाइनमैन के जिम्मे होता है। इसी जिम्मेदारी में लाइनमैन मनमाना खेल करते हैं।

सूत्र बताते हैं कि कई लाइनमैन से बिजली उपकेंद्र से सीधे उपभोक्ताओं के घरों तक अवैध बिजली की लाइन तक चलाते हैं। इसके बदले उनका और उनके साहबानों का प्रतिमाह रकम तय रहती है। कनेक्शन देने के बाद घर जाकर लाइन जोड़ने से लेकर फाल्ट बनाने में लाइनमैनों को सुविधा शुल्क देना ही पड़ता है। वरना शिकायत दर्ज कराने के बाद भी अंधेरे में ही रहना पड़ेगा।

 

बिल से पकड़ी गईचोरी
बिजली निगम के सूत्रों ने बताया कि ग्रामीण वितरण मंडल प्रथम में 500 मीटर तक अवैध लाइन खींच कर दो घरों में आपूर्ति दी गई थी। मामले को लेकर निगम के एकअधिकारी ने दूसरे अधिकारी को बताया भी। लेकिन, मामला तब खुला जब इसी फर्म की तरफ से अवैध लाइन का बिल भेज दिया गया। अगर ये बिल नहीं आता तो लाइन बेफिक्री के साथ जलती रहती।

एमडी को नहीं लिखा गया पत्र, मामला दबाने की कोशिश
बिजली निगम के अभियंता की तहरीर पर एंटी थेफ्ट थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया। लेकिन, खंड के किसी भी जिम्मेदार की तरफ से फर्म को ब्लैक लिस्ट करने या अन्य किसी कार्रवाई के लिए एमडी को सूचना नहीं दी गई। केस दर्ज हुए लगभग चार महीने हो गए निगम की तरफ से आज तक एमडी को पत्र लिखकर इस फर्म के कार्यप्रणाली और इसे प्रतिबंधित करने के लिए पत्र नहीं लिखा गया।

 

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ऐसे होता है अभियंता और स्टोर के बीच में खेल
सूत्रों ने बताया कि बिजली निगम के जिम्मेदार प्रतिमाह या एक माह छोड़कर ओएंडएम में अपने कार्यों और बिजली उपकरणों की मांग भरते हैं। सामान की मांग को पोर्टल पर भरना होता है। उपकरणों की मांग भरने के बाद एसडीओ जांच कर आगे बढ़ाते हैं। फिर अधिशासी अभियंता स्वीकृति देते हैं। इसके बाद सामान की मांग सूची स्टोर को चली जाती। वहां से इसे जारी किया जाता। स्टोर से ही गड़बड़ी शुरू हो जाती है।

वितरण खंड से स्वीकृत कर भेजे गए सामानों की सूची का इनवाइस (प्राप्ति रसीद) स्टोर का कर्मचारी अवर अभियंता के नाम से काट देता है। अवर अभियंता इसे मंथली एकाउंट (मासिक खाते) में दर्ज कर लेते हैं और स्टोर से जारी रसीद भी ले लेते हैं। इसके बाद ठेकेदार और जिम्मेदारों के बीच खेल शुरू होता है। कागज में सामान जेई या जिम्मेदार ले लेते हैं, लेकिन भौतिक रूप से सामान स्टोर में ही रह जाता है। बाद में इसका इस्तेमाल पैसे लेकर किया जाता है।

मुख्य अभियंता आशू कालिया ने कहा कि लेजर पॉवर फर्म के पास केंद्र सरकार की स्वीकृत योजना के तहत बिजली व्यवस्था सुधार का बड़ा काम है। इस अवैध लाइन की बात सामने आने पर फर्म के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। फर्म की तरफ से गोरखपुर प्रभारी की सेवा खत्म कर दी गई। इसके अलावा विभागीय जिम्मेदारों की जांच के साथ उन्हें आरोप पत्र भी जारी किया गया है। अन्य मामलों को लेकर भी निगम की तरफ से गोपनीय जांच और प्रमाणों के संकलन किए जा रहे हैं। जल्द ही इन मामलों में जो भी दोषी होगा, उनपर कार्रवाई की जाएगी।

एंटी थेफ्ट थाना प्रभारी राधेश्याम राय ने कहा कि केस दर्ज कर विवेचना चल रही है। इसमें लाइन बनाने के समय के तथ्यों की जांच करने के साथ विभागीय संलिप्तता की जांच चल रही है। कुछ और मामले भी हैं। एक महीने में जांच में महत्वपूर्ण तथ्यों के साथ एमडी को विभागीय जिम्मेदारों के साथ फर्म पर कार्रवाई के लिए पत्र लिखा जाएगा।

 

केस 1
हरपुर उपकेंद्र क्षेत्र में खेत से बिजली के पोल हटाकर सड़क पर लगाया गया और इसके बाद तार खींचा गया। आरोप था कि कई पोल बिना एस्टीमेट स्वीकृत के सुविधा शुल्क लेकर शिफ्ट कर दिए गया था। इसे लेकर एक वीडियो भी वायरल हुआ था। आरोप लगे थे कि निजी लाभ पहुंचाने के चक्कर में लाइन शिफ्ट किया गया था। मामले में जांच टीम गठित हुई, लेकिन समय के साथ रिपोर्ट भी सुस्त होते चली गई।

केस 2
कौड़ीराम के बड़हलगंज कस्बे से सटे सिधुआपार (लक्ष्मीपुर) गांव में प्लाटिंग करने वाले प्रापर्टी डीलर को लाभ पहुंचाने को निविदा कर्मी ने पोल व लाइन शिफ्ट कर लिया था। यहां रातों-रात पोल व लाइन शिफ्ट कर दिया गया था। मामले की ग्रामीणों की सूचना पर मौके पर जांच-पड़ताल में यह तथ्य सामने आया कि गांव में लगे ट्रांसफार्मर की आड़ में लाइन को शिफ्ट किया गया। इस मामले में भी लाइनमैन पर कार्रवाई की गई, लेकिन निगम की तरफ से कानूनी कार्रवाई नहीं की गई।

केस 3
ऊर्जा मंत्री ने फोटो खींचकर भेजा तो चौरीचौरी में 14 वर्ष पहले खींची गई अवैध लाइन सामने आ गई। जबकि, जिम्मेदार अभियंता और लाइनमैन बेफिक्र थे। मामले में मुकदमा भी दर्ज किया गया। अभियंताओं ने 14 वर्ष पहले खींची गई अवैध लाइन पर कार्रवाई करने की जगह वर्तमान में प्लाटिंग करने वाले फर्म पर मुकदमा दर्ज करवा दिया। आरोप लगाया कि वहां लगे 9 खंभों पर फर्म का नाम था। लेकिन, ये खंभे स्टोर से कैसे आए ? लाइन कैसे खींची गई ? जिम्मेदार कौन था ? मुकदमा दर्ज कर पर्दा डाल दिया गया।

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