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Gorakhpur News: केमिकल लोचा सताए तो ध्यान-योग करें.. हार्मोंस रहते हैं कंट्रोल में

Mon, 12 Aug 2024 03:09 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 12 Aug 2024 03:09 AM IST
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If chemical stress is bothering you then do meditation and yoga. Hormones remain under control
ब्रेन केमिकल डोपामिन के एंडोरफिन के अनियंत्रित होने से स्टंटबाजी जैसीं हरकतें करते हैं युवा
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ये ब्रेन केमिकल्स व्यक्ति के व्यवहार को करते हैं प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। ब्रेन केमिकल्स और शरीर के अन्य हार्मोंस का असंतुलन जीवन में उथल-पुथल लाता है। खुशी देने वाला ब्रेन केमिकल डोपामिन के एंडोरफिन के अनियंत्रित होने से 18-20 साल के युवा स्टंटबाजी जैसीं उटपटांग हरकतें कर रहे हैं, जिससे उनका खुद का जीवन तो खतरे में पड़ ही रहा है, दूसरे भी प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस स्थिति से बचने के लिए परिवार-समाज को मजबूत करने की जरूरत है तो योग और ध्यान से भी काफी राहत मिलती है।
एलोपैथ के जानकार भी मानते हैं कि योग और ध्यान से इंद्रियों पर नियंत्रण आसान है। ऐसा करने से व्यक्ति दूसरी अन्य बीमारियों से भी बचा रहता है।
एम्स गोरखपुर के फाॅर्माकोलॉजी विभाग में असिस्टेंट प्रो. डॉ. विजयलक्ष्मी बताती हैं-भागदौड़ भरी जिंदगी, सफलता के लिए अतिरिक्त दबाव, आर्थिक व पारिवारिक कारण के अलावा पेशागत मजबूरियों के चलते भी लोगों की दिनचर्या पूरी तरह से बदल गई है। सोने-जागने, खाने से लेकर सभी कार्य बायोलॉजिकल क्लॉक (दिन-रात के चक्र) की बजाय व्यक्ति अपनी सुविधानुसार कर रहा है। इस वजह से हार्मोंस के उत्सर्जन पर भी प्रभाव पड़ता है।
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इनके अनियंत्रित होने की वजह से मानसिक ही नहीं, शारीरिक स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। हार्मोंस अनियंत्रित होने पर स्वभाव में चिड़चिड़ापन, घबराहट या उत्तेजना जैसे लक्षण भी स्वाभाविक हैं।
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हार्माेंस विशेषज्ञ डॉ. कन्हैया अग्रवाल बताते हैं-आजकल तमाम बीमारियों की वजह हार्माेंस का अनियंत्रित होना है। मधुमेह या शुगर की बीमारी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। इंसुलिन का जब शरीर में कम स्राव होता है तो ग्लूकोज का पाचन नहीं होता, जिससे व्यक्ति की पूरी दिनचर्या ही बिगड़ जाती है। बालक या बालिका में अगर सेक्स हार्माेंस का सही मात्रा में स्राव नहीं होता है तो उनके लक्षण में परिवर्तन आ जाता है, जैसे पुरुष में दाढ़ी या मूंछ का नहीं आना भी हार्मोंस की कमी के कारण ही होता है। इसलिए अगर स्वस्थ जीवनचर्या बनाए रखनी है तो हार्मोंस को नियंत्रित रखना सबसे जरूरी है।
ध्यान से खुद पर मिलता है नियंत्रण
ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़े शाहपुर सेंटर की इंचार्ज बीके पारुल का कहना है कि जब हम ध्यान मग्न होते हैं तो पिट्यूटरी ग्रंथि और हाइपो थैलेमस से स्रावित होने वाले हार्मोंस भी नियंत्रित रहते हैं। उन्होंने बताया कि व्यक्ति खुशी की तलाश में भटकता है और इसी की चाहत में गलत रास्ते पर चल पड़ता है। ध्यान खुद को जानने की प्रक्रिया है। जब हम ध्यान लगाते हैं, ज्ञान की बात सुनते हैं तब यह एहसास होता है कि आत्मा शरीर की मालिक है, इसलिए शरीर की क्रियाएं भी हमारे अनुसार ही संचालित होनी चाहिए। इससे मन मजबूत होता है। आत्मदर्शन और आत्म चिंतन से व्यक्ति में निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। युवा अगर प्रतिदिन आधे घंटे ध्यान मुद्रा में एकांतचित बैठें तो उनकी समस्या का स्वत: समाधान मिल जाएगा।

सांसों पर नियंत्रण के लिए जरूरी है प्राणायाम
योग प्रशिक्षक धर्मेंद्र चौरसिया ने बताया कि हमारे शरीर की क्रियाओं पर सांसों का नियंत्रण होता है। इसे चंद्रनाड़ी व सूर्यनाड़ी के जरिए समभाव में रखना होता है। चंद्रनाड़ी व सूर्यनाड़ी को नियंत्रित करने के लिए आधे घंटे का योगाभ्यास ही पर्याप्त है। इसकी विधि भी सामान्य है। केवल एक नाक की दबाकर श्वांस को अंदर लेना और दूसरे नाक से छोड़ना होता है। एक सप्ताह में ही इसका पर्याप्त अभ्यास हो जाता है। श्वास पर नियंत्रण होते ही व्यक्ति को खुद ही महसूस होने लगता है कि उसकी इंद्रिया अनियंत्रित नहीं, बल्कि उसकी इच्छानुसार व्यवहार कर रही हैं। युवा पीढ़ी इस वक्त तनाव और डिप्रेशन से जूझ रही है, इसलिए उनको प्राणायाम जरूर करना चाहिए। इससे वे हीनभावना और तनाव की समस्या से मुक्त हो जाएंगे। इससे उनमें दिमाग में अच्छा महसूस कराने वाले हार्मोंस का उत्सर्जन भी सामान्य होता है, जिससे उनका पूरा जीवन चक्र भी सामान्य हो जाता है। योग व प्राणायाम करने से नींद भी अच्छी आती है।
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