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गोरखपुर: दहेज के लिए हत्या का जुर्म सिद्ध होने पर पति को आजीवन कारावास, चार साल पहले हुई थी घटना
Thu, 09 Dec 2021 03:12 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 09 Dec 2021 03:12 PM IST
सार
गोला थाना क्षेत्र के भड़सड़ा गांव में चार साल पहले घटना हुई थी। मृतका के मायके वालों को 27 मई 2017 को दोपहर दो बजे गांव के किसी व्यक्ति ने फोन करके बताया था कि उनकी बेटी की मृत्यु हो गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
गोरखपुर में दहेज के लिए पत्नी की हत्या का जुर्म सिद्ध होने पर पति रामाराव को अपर सत्र न्यायाधीश अभय प्रकाश नारायण ने आजीवन कारावास और 11 हजार का अर्थदंड दिया है। घटना चार साल पहले की है, जिसमें प्रतिदिन सुनवाई की गई।
अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी एचएन यादव और संजीत शाही ने कोर्ट को बताया कि वादी रामनिवास सागर ने अपनी लड़की अमिता की शादी गोला क्षेत्र के भड़सड़ा गांव निवासी अभियुक्त रामाराव से दो जून 2010 को की थी। हैसियत के मुताबिक दहेज भी दिया लेकिन अभियुक्त उससे संतुष्ट नहीं था और अतिरिक्त धन की मांग कर रहा था। इस बात को लेकर कई बार पंचायत भी हुई।
22 मई 2017 को अमिता के देवर श्यामा की शादी थी जिसमें वादी भी शामिल हुआ था। इसके बाद 27 मई 2017 को दोपहर दो बजे अभियुक्त के गांव के किसी व्यक्ति ने फोन करके बताया कि अमिता की मृत्यु हो गई है। वादी जब अभियुक्त के घर पहुंचा तो पता चला कि चुपके से दाह संस्कार कर दिया गया हैं। अभियुक्त ने वादी को अमिता की मृत्यु का कारण भी नहीं बताया।
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तीन जून 2017 को तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच की और अभियुक्त को दोषी पाते हुए आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियुक्त ने जुर्म से इंकार किया और फर्जी फंसाए जाने की बात कही। न्यायाधीश ने पत्रावली पर उपलब्ध सबूतों के आधार पर सजा सुनाई। इस मामले में हाईकोर्ट ने प्रतिदिन सुनवाई का आदेश दिया था।
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अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी एचएन यादव और संजीत शाही ने कोर्ट को बताया कि वादी रामनिवास सागर ने अपनी लड़की अमिता की शादी गोला क्षेत्र के भड़सड़ा गांव निवासी अभियुक्त रामाराव से दो जून 2010 को की थी। हैसियत के मुताबिक दहेज भी दिया लेकिन अभियुक्त उससे संतुष्ट नहीं था और अतिरिक्त धन की मांग कर रहा था। इस बात को लेकर कई बार पंचायत भी हुई।
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22 मई 2017 को अमिता के देवर श्यामा की शादी थी जिसमें वादी भी शामिल हुआ था। इसके बाद 27 मई 2017 को दोपहर दो बजे अभियुक्त के गांव के किसी व्यक्ति ने फोन करके बताया कि अमिता की मृत्यु हो गई है। वादी जब अभियुक्त के घर पहुंचा तो पता चला कि चुपके से दाह संस्कार कर दिया गया हैं। अभियुक्त ने वादी को अमिता की मृत्यु का कारण भी नहीं बताया।
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तीन जून 2017 को तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच की और अभियुक्त को दोषी पाते हुए आरोप पत्र कोर्ट में प्रेषित किया। कोर्ट में अभियुक्त ने जुर्म से इंकार किया और फर्जी फंसाए जाने की बात कही। न्यायाधीश ने पत्रावली पर उपलब्ध सबूतों के आधार पर सजा सुनाई। इस मामले में हाईकोर्ट ने प्रतिदिन सुनवाई का आदेश दिया था।