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Gorakhpur News: पर्यावरण अनुकूल माहौल के लिए यांत्रिक कारखाना को मिला प्लेटिनम शील्ड
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गोरखपुर। पूर्वाेत्तर रेलवे के यांत्रिक कारखाना ने हरित औद्योगिक विकास और संसाधन दक्षता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के ग्रीन बिजनेस सेंटर की ओर से 19 जून को नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ग्रीनको समिट-2026 में यांत्रिक कारखाना, गोरखपुर को ग्रीनको प्लैटिनम शील्ड से सम्मानित किया गया।
ग्रीनको समिट में ग्रीनको प्लैटिनम शील्ड उन संस्थानों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को दैनिक कार्य संस्कृति व परिचालन व्यवस्था में सफलतापूर्वक समाहित किया है। ऊर्जा संरक्षण, जल संरक्षण, सौर ऊर्जा, अपशिष्ट न्यूनिकरण, हरित खरीद और संसाधन दक्षता के सतत प्रयासों ने यांत्रिक कारखाना को देश के अग्रणी हरित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में स्थापित किया है। इस वर्ष भारतीय रेल की केवल दो कार्यशालाओं को यह सम्मान प्राप्त हुआ, जिनमें यांत्रिक कारखाना, गोरखपुर भी शामिल है। यांत्रिक कारखाना के मुख्य कारखाना प्रबंधक डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने यह सम्मान ग्रहण किया।
मुख्य कारखाना प्रबंधक डॉ. शर्मा ने कहा कि कारखाने में जल और ऊर्जा संरक्षण के परिणाम स्पष्ट दिख रहे हैं। जल की खपत में लगभग 80 प्रतिशत कमी, विशिष्ट ऊर्जा खपत में लगभग 35 प्रतिशत सुधार एवं ऊर्जा आवश्यकता का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा सौर स्रोतों से पूरा किया जा रहा है।
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ग्रीनको समिट में ग्रीनको प्लैटिनम शील्ड उन संस्थानों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने पर्यावरणीय प्रतिबद्धताओं को दैनिक कार्य संस्कृति व परिचालन व्यवस्था में सफलतापूर्वक समाहित किया है। ऊर्जा संरक्षण, जल संरक्षण, सौर ऊर्जा, अपशिष्ट न्यूनिकरण, हरित खरीद और संसाधन दक्षता के सतत प्रयासों ने यांत्रिक कारखाना को देश के अग्रणी हरित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में स्थापित किया है। इस वर्ष भारतीय रेल की केवल दो कार्यशालाओं को यह सम्मान प्राप्त हुआ, जिनमें यांत्रिक कारखाना, गोरखपुर भी शामिल है। यांत्रिक कारखाना के मुख्य कारखाना प्रबंधक डॉ. सुनील कुमार शर्मा ने यह सम्मान ग्रहण किया।
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मुख्य कारखाना प्रबंधक डॉ. शर्मा ने कहा कि कारखाने में जल और ऊर्जा संरक्षण के परिणाम स्पष्ट दिख रहे हैं। जल की खपत में लगभग 80 प्रतिशत कमी, विशिष्ट ऊर्जा खपत में लगभग 35 प्रतिशत सुधार एवं ऊर्जा आवश्यकता का करीब 30 प्रतिशत हिस्सा सौर स्रोतों से पूरा किया जा रहा है।
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