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Holi 2023: छह की रात जलेगी होलिका, आठ को मनेगी होली
Tue, 28 Feb 2023 03:03 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 28 Feb 2023 03:03 PM IST
सार
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, दानवराज हिरण्यकशिपु के अंत और प्रहलाद की होलिका से रक्षा के उपलक्ष्य में होलिका दहन किया जाता है। इसके बाद होली मनाई जाती है। यह पर्व शत्रुता को भुलाकर मित्रता करने का है।
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होली
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
होली इस बार आठ मार्च को मनाई जाएगी। वहीं, होलिका दहन छह मार्च की मध्यरात्रि किया जाएगा। वाराणसी से प्रकाशित हृषीकेश पंचांग के अनुसार, छह मार्च दिन सोमवार को चतुर्दशी तिथि का मान शाम तीन बजकर 56 मिनट तक पश्चात पूर्णिमा तिथि है। इस दिन मचा नक्षत्र भी संपूर्ण दिन और रात्रि 11 बजकर 53 मिनट, सुधर्मा योग रात आठ बजकर 55 मिनट और ध्वांक्ष नामक औदायिक योग है।
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सात मार्च को पूर्णिमा तिथि का मान शाम पांच बजकर 39 मिनट तक ही है और सूर्यास्त पांच बजकर 49 मिनट पर हो जाएगा। ऐसी स्थिति में सात मार्च को रात्रि के समय पूर्णिमा का अभाव है। शास्त्र के अनुसार, होलिका का पूजन और दहन पूर्णिमाकालिन भद्रा रहित समय में किया जाता है।
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सात मार्च को रात में पूर्णिमा के अभाव के कारण होलिका का पूजन और दहन छह मार्च की रात में किया जाएगा। लेकिन, रंगभरी होली मधुमास में मनाई जाती है। आठ मार्च को मधुमास (चैत्र कृष्ण प्रतिपदा) होने से मधुमास का उत्सव (रंगभरी होली) इसी दिन होगा।
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होली का महत्व
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, दानवराज हिरण्यकशिपु के अंत और प्रहलाद की होलिका से रक्षा के उपलक्ष्य में होलिका दहन किया जाता है। इसके बाद होली मनाई जाती है। यह पर्व शत्रुता को भुलाकर मित्रता करने का है।
ऐसे करें होलिका दहन
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, शुभ मुहूर्त में स्नानादि के बाद होलिका दहन के समय दाहिने हाथ में जल, चंदन, अक्षत, द्रव्य आदि लेकर संकल्प करें। संकल्प करके किसी पेड़ की डाली को आरोपण कर उसके चारों ओर सूखी लकड़ी, कंडे, सूखा पुआल व झाड़-झंखाड़ रखें और होलिका का ध्यान करें। इसके बाद षोडशोपचार पूजन कर प्रार्थना करें। फिर अछूत कहे जाने वाले व्यक्ति के घर से अथवा प्रसूतिका स्त्री के घर से अग्नि मंगाकर या न उपलब्ध होने पर वहीं अग्नि प्रज्वलित कर होलिका जलाएं।
होलिका दहन का मुहूर्त
पंडित डॉ. जोखन पांडेय शास्त्री ने बताया कि छह मार्च को भद्रा शाम तीन बजकर 56 मिनट से सात मार्च को सुबह चार बजकर 48 मिनट तक होने से होलिका दहन भद्रा के पुंछ भाग होगा। यह समय छह मार्च को रात में 12 बजकर 23 मिनट से एक बजकर 35 मिनट है। इसीके मध्य होलिका दहन किया जाएगा। इसके अलावा भद्रा के बाद यानी सुबह चार बजकर 49 मिनट से सूर्योदय से पूर्व सुबह छह बजकर 11 मिनट के बीच भी होलिका दहन किया जा सकता है।
होलाष्टक लगा, नहीं होंगे शुभ कार्य
होलिका दहन से आठ दिन पूर्व लगने वाले होलाष्टक की शुरुआत सोमवार से हो गई। ऐसी मान्यता है कि होलाष्टक लगने के बाद अगले आठ दिनों तक किस भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, फाल्गुन मास के शुल्क पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक की शुरुआत हो गई है। जो छह मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त होगी। बताया कि इस दौरान मुंडन, गृह प्रवेश, सगाई, विवाह, विदाई सहित किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।
ऐसे करें होलिका दहन
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, शुभ मुहूर्त में स्नानादि के बाद होलिका दहन के समय दाहिने हाथ में जल, चंदन, अक्षत, द्रव्य आदि लेकर संकल्प करें। संकल्प करके किसी पेड़ की डाली को आरोपण कर उसके चारों ओर सूखी लकड़ी, कंडे, सूखा पुआल व झाड़-झंखाड़ रखें और होलिका का ध्यान करें। इसके बाद षोडशोपचार पूजन कर प्रार्थना करें। फिर अछूत कहे जाने वाले व्यक्ति के घर से अथवा प्रसूतिका स्त्री के घर से अग्नि मंगाकर या न उपलब्ध होने पर वहीं अग्नि प्रज्वलित कर होलिका जलाएं।
होलिका दहन का मुहूर्त
पंडित डॉ. जोखन पांडेय शास्त्री ने बताया कि छह मार्च को भद्रा शाम तीन बजकर 56 मिनट से सात मार्च को सुबह चार बजकर 48 मिनट तक होने से होलिका दहन भद्रा के पुंछ भाग होगा। यह समय छह मार्च को रात में 12 बजकर 23 मिनट से एक बजकर 35 मिनट है। इसीके मध्य होलिका दहन किया जाएगा। इसके अलावा भद्रा के बाद यानी सुबह चार बजकर 49 मिनट से सूर्योदय से पूर्व सुबह छह बजकर 11 मिनट के बीच भी होलिका दहन किया जा सकता है।
होलाष्टक लगा, नहीं होंगे शुभ कार्य
होलिका दहन से आठ दिन पूर्व लगने वाले होलाष्टक की शुरुआत सोमवार से हो गई। ऐसी मान्यता है कि होलाष्टक लगने के बाद अगले आठ दिनों तक किस भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं। ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, फाल्गुन मास के शुल्क पक्ष की अष्टमी तिथि से होलाष्टक की शुरुआत हो गई है। जो छह मार्च को होलिका दहन के साथ समाप्त होगी। बताया कि इस दौरान मुंडन, गृह प्रवेश, सगाई, विवाह, विदाई सहित किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।