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Gorakhpur News: रामलखना में बन रही विरासत वाटिका
Mon, 22 Jul 2024 05:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Mon, 22 Jul 2024 05:23 AM IST
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- कड़जहां रायगंज के रामलखना में साढ़े आठ एकड़ में बन रही वाटिका
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। प्रदेश के धरोहर वृक्षों की संतति तैयार करने के उद्देश्य से वन विभाग तिलकोनिया रेंज के कड़जहां के पास रायगंज के रामलखना में विरासत वाटिका बना रहा है। गोरखपुर के साथ ही प्रदेश के 11 जिलों में विरासत वाटिका तैयार की जा रही है। इसके तहत रविवार को साढ़े आठ एकड़ में चिह्नित वाटिका में पौधारोपण शुरू हुआ। यहां प्रदेश के 948 धरोहर वृक्षों की कलम से तैयार पौधों को रोपा जा रहा है।
डीएफओ विकास यादव के निर्देश पर उप प्रभागीय वनाधिकारी और तिलकोनिया रेंजर लव सिंह की टीम धरोहर वृक्षों के पौधों का रोपण कर रही है। रेंजर लव सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार की पहल पर उन वृक्षों का कलम कर यहां पर लाए गए हैं। पौधारोपण के साथ ही उनके सामने एक बोर्ड पर लिखा जा रहा है कि वह किस जिले के धरोहर वृक्ष की संतति हैं। कितने वर्ष के हैं और उन वृक्षों की उस जिले में क्या उपयोगिता है।
तिलकोनिया रेंजर ने बताया ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि अगर धरोहर वृष कभी नष्ट हो जाए तो आने वाले समय में उनकी संतति के माध्यम से उन्हें याद किया जा सके। धरोहर वृक्षों में बरगद, पीपल, इमली, नीम, महुआ, पारिजात समेत अन्य हैं। रामगढ़ की नर्सरी में जिन पौधों को तैयार किया गया है, वह 100 से 200 वर्ष पुराने वृक्षों के है।
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गोरखपुर। प्रदेश के धरोहर वृक्षों की संतति तैयार करने के उद्देश्य से वन विभाग तिलकोनिया रेंज के कड़जहां के पास रायगंज के रामलखना में विरासत वाटिका बना रहा है। गोरखपुर के साथ ही प्रदेश के 11 जिलों में विरासत वाटिका तैयार की जा रही है। इसके तहत रविवार को साढ़े आठ एकड़ में चिह्नित वाटिका में पौधारोपण शुरू हुआ। यहां प्रदेश के 948 धरोहर वृक्षों की कलम से तैयार पौधों को रोपा जा रहा है।
डीएफओ विकास यादव के निर्देश पर उप प्रभागीय वनाधिकारी और तिलकोनिया रेंजर लव सिंह की टीम धरोहर वृक्षों के पौधों का रोपण कर रही है। रेंजर लव सिंह ने बताया कि प्रदेश सरकार की पहल पर उन वृक्षों का कलम कर यहां पर लाए गए हैं। पौधारोपण के साथ ही उनके सामने एक बोर्ड पर लिखा जा रहा है कि वह किस जिले के धरोहर वृक्ष की संतति हैं। कितने वर्ष के हैं और उन वृक्षों की उस जिले में क्या उपयोगिता है।
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तिलकोनिया रेंजर ने बताया ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि अगर धरोहर वृष कभी नष्ट हो जाए तो आने वाले समय में उनकी संतति के माध्यम से उन्हें याद किया जा सके। धरोहर वृक्षों में बरगद, पीपल, इमली, नीम, महुआ, पारिजात समेत अन्य हैं। रामगढ़ की नर्सरी में जिन पौधों को तैयार किया गया है, वह 100 से 200 वर्ष पुराने वृक्षों के है।
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