{"_id":"6450aafea0a8bbe327031967","slug":"head-post-office-embezzlement-case-300-crores-stuck-in-19-lakh-accounts-2023-05-02","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"प्रधान डाकघर गबन मामला: 19 लाख खातों में फंसे हैं 300 करोड़, लंबे समय से नहीं हो रहा था संचालन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रधान डाकघर गबन मामला: 19 लाख खातों में फंसे हैं 300 करोड़, लंबे समय से नहीं हो रहा था संचालन
Tue, 02 May 2023 11:47 AM IST
vivek shukla
रोहित सिंह, गोरखपुर।
रोहित सिंह, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 02 May 2023 11:47 AM IST
सार
प्रवर डाक अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया कि जो खाते साइलेंट श्रेणी में डाले गए हैं, उन्हें अगर खाताधारक दोबारा शुरू कराना चाहता है, तो उन्हें केवाईसी भरनी होगी। साथ ही जरूरी प्रमाणपत्रों के साथ खाता फिर से शुरू करने के लिए प्रार्थना पत्र देना होगा। यदि खाताधारक के नामिनी आते हैं, तो उन्हें भी संबंधित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
विज्ञापन
post office
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गोरखपुर मंडल के डाकघरों में करीब 19 लाख निष्क्रिय खाते हैं, जिनमें करीब 300 करोड़ रुपए फंसे हैं। इन खातों में लंबे समय से लेनदेन नहीं किया गया है। इनमें ज्यादातर बचत खाते हैं। वहीं मासिक जमा योजना और एमआईएस श्रेणी के खातों को भी निष्क्रिय मानकर लेनदेन पर रोक लगा दी गई है। इन खातों की भी अगर जांच की जाए तो गबन के बड़े मामले सामने आ सकते हैं।
विज्ञापन
डाकघर का नियम है कि तीन साल तक अगर किसी खाते में लेनदेन नहीं हुआ है तो उसे निष्क्रिय मान लिया जाता है। इन खाताें को चालू करवाने के लिए खाताधारक को केवाईसी भरकर जमा करना पड़ता है। विभाग 12 सालों तक निष्क्रिय खातों के खाताधारकों का इंतजार करता है। इस समय सीमा के बीतने के बाद खातों को जब्त कर स्वत: सरकारी कोष में जमा कर दिया जाता है। डाक विभाग की जांच टीम ने जो मामले पकड़े हैं उसमें अधिकारियों ने लापरवाही बरती। निष्क्रिय खातों के रूपये सरकारी खजाने में जमा नहीं कराए।
विज्ञापन
इसे भी पढ़ें: गोरखपुर में 76 लाख रुपये के गबन में 33 डाककर्मी दोषी, फंसे हैं 300 करोड़
विज्ञापन
इसकी जानकार डाककर्मियों थी और उन्होंने इस मौके का फायदा उठाकर निष्क्रिय खातों से लाखों रूपये गबन कर लिए। सिर्फ गोरखपुर में ही चार डाकघरों से एक करोड़ रुपये से अधिक के गायब होने का आरोप लगा था। मामला खुलने पर गबन करने वाले डाककर्मियों ने 50 लाख रुपये वापस जमा भी करा दिए थे। जांच में जब से गड़बड़ी पकड़ी गई तो शक और गहराता गया।
दोबारा शुरू कर सकते हैं खाते, देनी होगी केवाईसी
प्रवर डाक अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया कि जो खाते साइलेंट श्रेणी में डाले गए हैं, उन्हें अगर खाताधारक दोबारा शुरू कराना चाहता है, तो उन्हें केवाईसी भरनी होगी। साथ ही जरूरी प्रमाणपत्रों के साथ खाता फिर से शुरू करने के लिए प्रार्थना पत्र देना होगा। यदि खाताधारक के नामिनी आते हैं, तो उन्हें भी संबंधित प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
वेलफेयर स्कीम में जमा करवाना होता है धन
12 साल तक खाताधारक का इंतजार किया जाता है। इसके बाद रिपोर्ट मंत्रालय को भेज दी जाती है। मंत्रालय की अनुमति मिलने के बाद निष्क्रिय खातों की रकम वेलफेयर स्कीम के तहत सरकारी खजाने में जमा करा दी जाती है।
एक लाख से अधिक खातों की हुई है जांच
उधर, प्रधान डाकघर के अलावा तीन अन्य डाकघरों में वित्तीय गड़बड़ी सामने आने के बाद मामले की विभागीय जांच शुरू करा दी गई। एक साल तक चली जांच में कुल एक लाख से अधिक खातों की जांच की गई। इसमें 68 हजार खाते तो सिर्फ पेंशन के थे। इसके अलावा निष्क्रिय खाते, फर्जी नाम से इंट्री, खाते पर फर्जी एटीएम कार्ड जारी होने के साथ अन्य वित्तीय लेन-देन संबंधी मामलों की जांच की गई।
वेलफेयर स्कीम में जमा करवाना होता है धन
12 साल तक खाताधारक का इंतजार किया जाता है। इसके बाद रिपोर्ट मंत्रालय को भेज दी जाती है। मंत्रालय की अनुमति मिलने के बाद निष्क्रिय खातों की रकम वेलफेयर स्कीम के तहत सरकारी खजाने में जमा करा दी जाती है।
एक लाख से अधिक खातों की हुई है जांच
उधर, प्रधान डाकघर के अलावा तीन अन्य डाकघरों में वित्तीय गड़बड़ी सामने आने के बाद मामले की विभागीय जांच शुरू करा दी गई। एक साल तक चली जांच में कुल एक लाख से अधिक खातों की जांच की गई। इसमें 68 हजार खाते तो सिर्फ पेंशन के थे। इसके अलावा निष्क्रिय खाते, फर्जी नाम से इंट्री, खाते पर फर्जी एटीएम कार्ड जारी होने के साथ अन्य वित्तीय लेन-देन संबंधी मामलों की जांच की गई।