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Gorakhpur News: बीटेक छात्र का शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपा, अलीगढ़ रवाना
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गोरखपुर। रामगढ़ताल क्षेत्र स्थित महादेव बॉयज हॉस्टल में आत्महत्या करने वाले बीटेक तृतीय वर्ष के छात्र घनेंद्र चौधरी (23) का शव पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। परिजन शव लेकर निजी एम्बुलेंस से अलीगढ़ के लिए रवाना हो गए।
जानकारी के अनुसार, अलीगढ़ जिले के खैर बाईपास रोड निवासी घनेंद्र चौधरी गोरखपुर यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहा था। वह महादेव बॉयज हॉस्टल में अकेले रहता था। घनेंद्र चौधरी बुधवार शाम हॉस्टल लौटा और अपने कमरे में चला गया। अगले दिन तक बाहर न निकलने पर वार्डेन ने सूचना दी। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव बरामद किया था। कमरे से मिले सुसाइड नोट में छात्र ने खुद को अच्छा बेटा और अच्छा छात्र न बन पाने की बात लिखते हुए माता-पिता से माफी मांगी थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।
शुक्रवार को पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे पिता बृजभानु चौधरी, चाचा प्रताप भानु और पारिवारिक मित्रों ने शव को अपने सुपुर्दगी में ले लिया। परिजनों ने बताया कि घनेंद्र इकलौता पुत्र था। परिवार को उससे बड़ी उम्मीदें थीं। छोटी बहन प्राची कक्षा आठवीं की छात्रा है। पिता एनएचआई में नौकरी करते हैं।
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परिजनों के मुताबिक, घनेंद्र शुरू से ही इंजीनियरिंग के प्रति गंभीर था। अच्छी रैंक आने के इंतजार में पहले एक बार प्रवेश नहीं लिया था। दूसरी बार परीक्षा पास कर बीटेक में दाखिला लिया। उन्होंने बताया कि घर से किसी तरह का दबाव नहीं था, हालांकि सेमेस्टर परीक्षा परिणाम को लेकर वह कभी-कभी चिंतित रहता था। घटना से एक दिन पहले उसने दो बार घर पर फोन किया था, लेकिन बातचीत सामान्य रही।
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जानकारी के अनुसार, अलीगढ़ जिले के खैर बाईपास रोड निवासी घनेंद्र चौधरी गोरखपुर यूनिवर्सिटी से बीटेक कर रहा था। वह महादेव बॉयज हॉस्टल में अकेले रहता था। घनेंद्र चौधरी बुधवार शाम हॉस्टल लौटा और अपने कमरे में चला गया। अगले दिन तक बाहर न निकलने पर वार्डेन ने सूचना दी। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव बरामद किया था। कमरे से मिले सुसाइड नोट में छात्र ने खुद को अच्छा बेटा और अच्छा छात्र न बन पाने की बात लिखते हुए माता-पिता से माफी मांगी थी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।
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शुक्रवार को पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे पिता बृजभानु चौधरी, चाचा प्रताप भानु और पारिवारिक मित्रों ने शव को अपने सुपुर्दगी में ले लिया। परिजनों ने बताया कि घनेंद्र इकलौता पुत्र था। परिवार को उससे बड़ी उम्मीदें थीं। छोटी बहन प्राची कक्षा आठवीं की छात्रा है। पिता एनएचआई में नौकरी करते हैं।
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परिजनों के मुताबिक, घनेंद्र शुरू से ही इंजीनियरिंग के प्रति गंभीर था। अच्छी रैंक आने के इंतजार में पहले एक बार प्रवेश नहीं लिया था। दूसरी बार परीक्षा पास कर बीटेक में दाखिला लिया। उन्होंने बताया कि घर से किसी तरह का दबाव नहीं था, हालांकि सेमेस्टर परीक्षा परिणाम को लेकर वह कभी-कभी चिंतित रहता था। घटना से एक दिन पहले उसने दो बार घर पर फोन किया था, लेकिन बातचीत सामान्य रही।