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विकास के लिए अपनी सोच बदले आधी आबादी : कुलपति
Sat, 02 Mar 2024 01:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Sat, 02 Mar 2024 01:32 AM IST
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सप्ताह पर गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन में हुआ कार्यक्रम
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सप्ताह के अवसर पर गुवा (गोरखपुर यूनिवर्सिटी वीमेन वेलफेयर एसोसिएशन) की ओर से सृजन शक्ति विषय पर संवाद भवन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि महिलाओं को सबसे पहले स्वयं के लिए पहल करनी होगी। अपने अधिकारों के लिए महिलाओं को अपनी वैचारिक सोच को बदलना होगा।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। अब नारी को खुद के लिए तैयार होना होगा और एक बेहतर और विकासशील सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। महिलाएं स्वयं की सोच के कारण पीछे रह जाती हैं। अपनी सोच को बदलकर ही आधी आबादी अपना विकास कर सकती है।
कार्यक्रम में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अंजू चौधरी ने कहा कि महिलाओं को पहले स्वयं को समझना होगा। महिलाओं को पाश्चात्य संस्कृति की ओर से मुख मोड़ना पड़ेगा। हमारे देश की संस्कृति महिलाओं के लिए समृद्ध है। इस अवसर पर गुवा अध्यक्ष एवं अंग्रेजी विभाग की प्रो. नंदिता सिंह ने कहा कि महिलाओं के मतों की गणना के साथ महिलाओं की समानता के अधिकार की शुरुआत हुई। इस वर्ष महिला दिवस की थीम भी महिलाओं को हर क्षेत्र में सम्मिलित कर आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है।
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सिविल कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक धर नारायण दुबे ने कहा कि महिलाओं को मैटरनिटी लीव मिलता है। भारत में दहेज उत्पीड़न पर कठोर कानून है। बहुत से ऐसे कानून हैं जो महिलाओं के लिए हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर उपयोग करना आना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. दिव्या रानी सिंह ने किया।
प्रो. सुनीता मुर्म ने गुवा की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. दीपक त्यागी, प्रो. राजेश मल्ल, प्रो. शरद मिश्रा, प्रो. उमेश त्रिपाठी, प्रो. अनिल द्विवेदी, प्रो. कीर्ति पांडेय आदि मौजूद रहे।
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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस सप्ताह के अवसर पर गुवा (गोरखपुर यूनिवर्सिटी वीमेन वेलफेयर एसोसिएशन) की ओर से सृजन शक्ति विषय पर संवाद भवन में कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि महिलाओं को सबसे पहले स्वयं के लिए पहल करनी होगी। अपने अधिकारों के लिए महिलाओं को अपनी वैचारिक सोच को बदलना होगा।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को आत्ममंथन करने की आवश्यकता है। अब नारी को खुद के लिए तैयार होना होगा और एक बेहतर और विकासशील सोच के साथ आगे बढ़ना होगा। महिलाएं स्वयं की सोच के कारण पीछे रह जाती हैं। अपनी सोच को बदलकर ही आधी आबादी अपना विकास कर सकती है।
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कार्यक्रम में राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अंजू चौधरी ने कहा कि महिलाओं को पहले स्वयं को समझना होगा। महिलाओं को पाश्चात्य संस्कृति की ओर से मुख मोड़ना पड़ेगा। हमारे देश की संस्कृति महिलाओं के लिए समृद्ध है। इस अवसर पर गुवा अध्यक्ष एवं अंग्रेजी विभाग की प्रो. नंदिता सिंह ने कहा कि महिलाओं के मतों की गणना के साथ महिलाओं की समानता के अधिकार की शुरुआत हुई। इस वर्ष महिला दिवस की थीम भी महिलाओं को हर क्षेत्र में सम्मिलित कर आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है।
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सिविल कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक धर नारायण दुबे ने कहा कि महिलाओं को मैटरनिटी लीव मिलता है। भारत में दहेज उत्पीड़न पर कठोर कानून है। बहुत से ऐसे कानून हैं जो महिलाओं के लिए हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर उपयोग करना आना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. दिव्या रानी सिंह ने किया।
प्रो. सुनीता मुर्म ने गुवा की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. दीपक त्यागी, प्रो. राजेश मल्ल, प्रो. शरद मिश्रा, प्रो. उमेश त्रिपाठी, प्रो. अनिल द्विवेदी, प्रो. कीर्ति पांडेय आदि मौजूद रहे।