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दीक्षांत समारोह: गोरखपुर में बोलीं राज्यपाल, 'जीवन में कोई काम छोटा नहीं, इसी से तय होता है पद्मश्री का रास्ता'

Wed, 15 Dec 2021 06:02 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 15 Dec 2021 06:02 PM IST
सार

राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि जीवन व विचार बदलें शिक्षक तभी बदलेगा समाज। अपनी ताकत से आगे बढ़ो दुनिया तुम्हारे पीछे होगी।

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Governor Anandiben Patel presiding over 40th convocation of DDU Gorakhpur University convocation
गोरखपुर विश्वविद्यालय में राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल छात्रा को उपाधि देतीं। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि जीवन में कोई काम छोटा नहीं होता है। बहुत सारे लोगों ने छोटे काम से शुरूआत करके समाज में मिसाल कायम करके पद्मश्री हासिल किया है। जीवन व विचार बदलने का काम शिक्षक कर सकते हैं। समाज की दुर्दशा से बाहर निकालने के लिए अच्छे विषय रखें। जब तक विचार नहीं बदलेगा तब तक समाज बदलने वाला नहीं है।  

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कुलाधिपति बुधवार को दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के 40 वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि छोटे काम से ही बहुत लोगों ने समाज में एक मुकाम हासिल किया है। पद्मश्री पुरस्कारों की सूची में ऐसे ढेर सारे नाम हैं। ऐसे लोगों के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए।  पद्मश्री पाने वालों पर भी अध्ययन की जरूरत है। यह काम विश्वविद्यालय के शिक्षक व विद्यार्थी कर सकते हैं। जीवन में आगे बढ़ना है तो देश व दुनिया पर नजर रखना होगा।
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कुलाधिपति ने मेधावियों को दहेज से दूर रहने की नसीहत दी और कहा कि इस गोल्ड मेडल को घर की किसी खूटी पर टांग देना और जीवन में किसी से सोना नहीं मांगना। दहेज न लेने का संकल्प लेना है। किसी के सामने हाथ नहीं फैलाओ और आपनी ताकत से आगे बढ़ो। यकीन मानो दुनिया आपके पीछे होगी।

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यूपी की मिट्टी में क्या है? बेटियां तेजी से बढ़ रहीं हैं इस पर शोध कराएं

कुलाधिपति ने कहा कि आज ऐसा पहली बार देखने को मिला है कि छह से सात विद्यार्थी ऐसे हैं जिन्हें पांच से छह मेडल मिले। इनमें लड़कियों की संख्या 70 फीसदी है। इससे जितनी खुशी है उतने ही चिंता हो रही है। आखिर यूपी की मिट्टी में ऐस क्या है? बेटियां, बेटों से आगे हैं। समानता होनी चाहिए। इस पर शोध करने की जरूरत है।


 

स्कूली बच्चों को विश्वविद्यालय घुमाएं

कुलाधिपति ने कहा कि यह देखकर अच्छा लगा कि आज गोल्ड मेडल पाने वाले पीछे बैठे हैं और छोटे बच्चे पहली लाइन में। स्कूलों के बच्चों को विश्वविद्यालय लेकर आएं। यहां लैब, पुस्तकालय, नवाचार देखेंगे तो अभी से कुछ नया करने की सोच विकसित होगी।

छात्रों को अयोध्या व काशी ले जाएं

कुलाधिपति ने कहा कि छात्रों को काशी व अयोध्या घुमाने की जरूरत है। कुलपति काशी में हुए बदलाव पर पर्चा छपवा कर छात्रों में बांट सकते हैं। इससे जानकारी बढ़ेगी। मैं, दो दिन वाराणसी में रहीं हूं। छात्र वहां जाएंगे तो देखेंगे कि कैसे समय प्रबंधन से काम होता है। काशी कारीडोर बनाने में क्या-क्या दिक्कतें आई होंगी, कैसे उसका समाधान निकला होगा। तकनीकी का प्रयोग कैसे हुआ? इसी प्रकार अयोध्या का जिक्र करते हुए कहा कि वहां 50 फीट नीचे जब बालू मिला तो फाउंडेशन के लिए क्या तकनीक अपनाई गई? तीन महीने तक कैसे विशेषज्ञों ने मंथन किया? यह देखेंगे और जानेंगे तो सोच बदलेगी। विश्वविद्यालय इस कार्य में आगे बढ़ें।

प्रोत्साहित करना भी शिक्षा का हिस्सा

कुलाधिपति ने कहा कि प्रेरणा देना और प्रोत्साहित करना भी शिक्षा का हिस्सा है। अगर कोई बढ़िया प्रवचन है तो उसे छात्रों को सुनाना चाहिए। कुलपतियों की बैठक में मैं, तो अक्सर प्रवचन सुनाती हूं। आजादी का अमृत महोत्सव के प्रवचन भी छात्रों को सुनाएं।

सामाजिक बुराइयां प्रोजेक्ट का हिस्सा बनें

कुलाधिपति ने कहा कि सोच में बदलाव के लिए छात्रों को जेल की यात्रा कराएं। वहां जाकर देखें कि कितनी महिलाएं जेल में हैं। किस लिए वह जेल गईं। इन समस्याओं पर भी शोध कराएं। सामाजिक बुराइयों को विश्वविद्यालय प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाएं। साल भर में इसका भी कैलेंडर बनना चाहिए।

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