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गोरखपुर विश्वविद्यालय : त्रुटि सुधार के लिए ''सुधार पोर्टल'' का उपयोग करें विद्यार्थी
Wed, 29 Jul 2026 02:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
Updated Wed, 29 Jul 2026 02:34 AM IST
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गोरखपुर । परीक्षा परिणाम या शैक्षणिक अभिलेखों में हुई किसी भी प्रकार की त्रुटि को सुधारने के लिए विद्यार्थी प्रशासनिक भवन न आएं। इसके लिए विश्वविद्यालय के ''''सुधार पोर्टल'''' का उपयोग करें। ऑनलाइन आवेदन से समय और धन की बचत होगी तथा शिकायतों का पारदर्शी और समयबद्ध निस्तारण संभव होगा।
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से छात्र घर बैठे अपूर्ण परीक्षा परिणाम, विषय परिवर्तन, एबीसी/अपार अपडेट, नाम, माता-पिता के नाम, जन्मतिथि, लिंग, एनरोलमेंट नंबर समेत अन्य त्रुटियों के सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि समस्या निर्धारित श्रेणी में न हो तो ''''अन्य'''' विकल्प के तहत आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर आवेदन किया जा सकता है।विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, पोर्टल शुरू होने से अब तक 60,427 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 60,375 का निस्तारण किया जा चुका है और केवल 52 आवेदन लंबित हैं। वहीं, 1 जून 2026 से अब तक 1,113 आवेदन मिले, जिनमें 1,061 का निस्तारण हो चुका है। कुलपति ने कहा कि यह पोर्टल डिजिटल गवर्नेंस और छात्र-केंद्रित प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि किसी भी सुधार के लिए सीधे विश्वविद्यालय आने के बजाय ऑनलाइन पोर्टल का ही उपयोग करें।
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि इस पोर्टल के माध्यम से छात्र घर बैठे अपूर्ण परीक्षा परिणाम, विषय परिवर्तन, एबीसी/अपार अपडेट, नाम, माता-पिता के नाम, जन्मतिथि, लिंग, एनरोलमेंट नंबर समेत अन्य त्रुटियों के सुधार के लिए आवेदन कर सकते हैं। यदि समस्या निर्धारित श्रेणी में न हो तो ''''अन्य'''' विकल्प के तहत आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर आवेदन किया जा सकता है।विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, पोर्टल शुरू होने से अब तक 60,427 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 60,375 का निस्तारण किया जा चुका है और केवल 52 आवेदन लंबित हैं। वहीं, 1 जून 2026 से अब तक 1,113 आवेदन मिले, जिनमें 1,061 का निस्तारण हो चुका है। कुलपति ने कहा कि यह पोर्टल डिजिटल गवर्नेंस और छात्र-केंद्रित प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि किसी भी सुधार के लिए सीधे विश्वविद्यालय आने के बजाय ऑनलाइन पोर्टल का ही उपयोग करें।
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