गोरखपुर शहर बढ़ा, सुविधाएं नहीं: देवरिया बाईपास पर जाम हुआ आम, हर रोज रेंगते हैं वाहन
25 साल में बढ़ी 20 गुना आबादी और 30 गुना यातायात पर सड़क नहीं हुई चौड़ी, करीब साढ़े सात किलोमीटर लंबे मार्ग पर दोनों तरफ हैं महत्वपूर्ण संस्थान, आवासीय और व्यावसायिक परिसर।
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देवरिया बाईपास रोड के आसपास की आबादी पिछले 25 वर्षों में बीस गुना बढ़ी है। उन दिनों के सापेक्ष इस मार्ग पर वाहन तीस गुना उतर चुके हैं। क्षेत्र की सूरत बदल गई, पर मार्ग की चौड़ाई नहीं बदली। इसका नतीजा यह है कि हर समय यहां जाम अब आम हो गया है। इस मार्ग पर हाल ही में बने प्राणि उद्यान ने यातायात के दबाव को बेलगाम कर दिया है। इसके चलते वाहन रेंगते नजर आते हैं। इस पर यदि ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में समस्या और बढ़ जाएगी।
जानकारी के अनुसार, शहर में भारी वाहनों का प्रवेश कम करने के लिए करीब 25 साल पहले देवरिया बाईपास रोड का निर्माण कराया गया था, जो अब जिले के व्यस्ततम मार्गों में से एक है। इस मार्ग पर भारी वाहन तो क्या, कार और दो पहिया वाहन भी रेंगते नजर आते हैं। इसकी वजह है, सड़क की क्षमता से अधिक आबादी और वाहनों का रेला। लोक निर्माण विभाग और गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) इस मार्ग को फोर लेन में तब्दील करने की कार्ययोजना बना चुके हैं, लेकिन कोई भी कार्ययोजना अब तक परवान नहीं चढ़ सकी। कारण सड़क के लिए जमीन की उपलब्धता नहीं होना बताया जा रहा है।
क्षेत्र की आबादी एक लाख से अधिक
सिक्टौर गांव के पास रहने वाले गोकुल सिंह ने बताया कि पच्चीस वर्ष पूर्व जब देवरिया बाईपास मार्ग का निर्माण किया गया था तो दूर-दूर आबादी के नाम पर चंद किसानों की झोपड़ियां ही दिखती थीं। सड़क के एक ओर वन विभाग के पेड़ पौधे थे तो दूसरी ओर वेटलैंड होने के कारण कोई उस ओर जमीन नहीं लेता था। वर्तमान में इस इलाके की आबादी एक लाख से अधिक है। शहर से दूर होने के कारण शायद ही ऐसा कोई घर-परिवार होगा, जिसके पास दो पहिया या चार पहिया वाहन न हों। ऐसे में इस मार्ग पर दबाव को समझा जा सकता है।
चौबीस घंटे रहता है यातायात का दबाव
पंचवटी तारामंडल निवासी केशव पांडेय कहते हैं कि बीस वर्ष पहले तक देवरिया बाईपास मार्ग पर भारी वाहन, ट्रक और बसों के अलावा दिन भर में कुछ कारें ही गुजरती थीं। गांवों में रहने वाले साइकिल सवार तो चलते थे, लेकिन बाइक-स्कूटर से गिने-चुने लोग की गुजरते थे। वर्तमान में यह सड़क जिले के सबसे व्यस्ततम मार्गों में से एक है। बीते दस-पंद्रह वर्ष में इस पर वाहनों का दबाव तीस गुना से भी ज्यादा है।
पीक समय में इस मार्ग पर प्रति घंटे डेढ़ हजार से अधिक वाहन गुजरते हैं। टू लेन होने के कारण पीक समय में रोजाना जाम लगता है। उनके मुताबिक प्रति दिन सुबह साढ़े नौ बजे से ग्यारह बजे तक, दोपहर में स्कूल बंद होने के एक घंटे बाद तक और शाम को कार्यालय बंद होने के एक घंटे बाद तक इस मार्ग का जाम से बुरा हाल रहता है। केशव पांडेय का कहना है कि यातायात व्यवस्था तब ही सुधर सकती है, जब इस मार्ग को कम से कम फोर लेन में अपग्रेड किया जाए।
सरकारी, व्यावसायिक संस्थानों का केंद्र है यह मार्ग
कभी शहरी आबादी को भारी वाहनों से बचाने के लिए बनाया गया देवरिया बाईपास मार्ग वर्तमान में कई महत्वपूर्ण सरकारी और व्यावसायिक संस्थानों का केंद्र बन चुका है। इस मार्ग पर वाणिज्य कर विभाग का कार्यालय, गोरखपुर विकास प्राधिकरण, भारतीय खाद्य निगम का दफ्तर है। इंडियन ऑयल कार्पोरेशन का क्षेत्रीय कार्यालय, वाणिज्यिक न्यायालय, स्टेट बैंक की पर्सनल बैंकिग ब्रांच सहित कई बैंकों के कार्यालय हैं। रामगढ़ ताल थाना भी इसी मार्ग पर मौजूद है। जन सेवाओं से जुड़े इन सरकारी कार्यालयों में रोजाना सैकड़ों लोगों का आना जाना होता है, जिससे इस मार्ग पर यातायात का दबाव अधिक रहता है।
आवासीय योजनाओं से बढ़ी आबादी
देवरिया बाईपास मार्ग पर लोहिया आवासीय योजना, पाम पैराडाइज, सहारा इस्टेट जैसी समूह आवासीय योजनाएं हैं। इस मार्ग पर अमर उजाला चौराहे से लेकर बुद्ध विहार चौराहे तक सड़क के दोनों ओर आवासीय, व्यावसायिक परिसर के साथ घनी आबादी है। दुकान, मॉल, व्यावसायिक कॉंप्लेक्स के कारण सड़क के दोनों ओर कहीं खाली जगह मुश्किल से दिखती है। इस मार्ग पर लगभग बीस प्रतिशत यातायात इन आवासीय और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में रहने और आने जाने वालों के कारण होता है।
शिक्षण और स्वास्थ्य सेवा संस्थाओं की भरमार
देवरिया बाईपास मार्ग पर सरमाउंट, सेंट्रल एकेडमी सेंट जेवियर्स, द पिलर्स, एचपी स्कूल, आत्मदीप विद्यालय, आरपीएम एकेडमी जैसी बड़ी शिक्षण संस्थाएं हैं। हजारों विद्यार्थियों को लाने व ले जाने के लिए इन विद्यालयों के पास सौ से अधिक स्कूल बसें हैं। इस मार्ग पर बीस से अधिक छोटे-बड़े निजी अस्पताल, नर्सिंग होम और विशेषज्ञ चिकित्सकों की क्लीनिक हैं। सभी निजी अस्पतालों तक मरीजों को लाने-ले जाने के लिए निजी एंबुलेंस भी इस मार्ग पर दौड़ती हैं। यातायात के दबाव के कारण ये एंबुलेंस भी जाम में फंसती हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक देवरिया बाई पास मार्ग को फोरलेन में बदला जाना समय की जरूरत है। यह अब बाईपास मार्ग नहीं, बल्कि एक लाख आबादी वाले इलाके से गुजरने वाला शहरी मार्ग हो चुका है।
मनोरंजन-पर्यटन से भी जुड़ गया है मार्ग
शहीद अशफाक उल्लाह प्राणि उद्यान खुलने के कारण देवरिया बाईपास पर्यटकों के आने-जाने के लिए मुख्य मार्ग है। प्राणि उद्यान में प्रतिदिन औसतन पांच सौ से अधिक लोग पहुंचते हैं। रविवार और छुट्टी के दिन तो यहां भीड़ बढ़ जाती है। पहले की तुलना में इस मार्ग पर यातायात का दबाव भी बढ़ा है। बुद्ध विहार मार्ग से नौकायन विहार रामगढ़ताल के पर्यटक भी प्राणि उद्यान आते जाते हैं। स्थानीय नागरिक मो. इस्लाम का कहना है कि 10-15 वर्ष में आबादी बढ़ने के कारण इस मार्ग पर यातायात बढ़ गया है। जिस तरह इस इलाके में विकास के कार्य चल रहे हैं, यदि जाम से निपटने के लिए स्थायी इंतजाम न किए गए तो समस्या दिनोंदिन बढ़ती जाएगी।
पीडब्ल्यूडी अधिशासी अभियंता एसपी भारतीय ने कहा कि देवरिया बाईपास मार्ग को फोरलेन में तब्दील करने के लिए नवंबर 2018 में ही विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई थी, लेकिन जमीन की कमी होने के कारण इसको अमल में नहीं लाया जा सका। शहर से देवरिया बाईपास की ओर जाने पर बाईं तरफ की जमीन जीडीए और निजी लोगों की है। दाहिनी तरफ की जमीन वन विभाग की है, इस कारण परियोजना परवान नहीं चढ़ सकी।