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माफिया चंदन सिंह: श्रीप्रकाश शुक्ला की तरह बिहार में तड़तड़ाई थी गोलियां, अपराध से अध्यात्म..जेल से छलावा

Sun, 15 Jun 2025 05:50 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Sun, 15 Jun 2025 05:50 PM IST
सार

कोरोना काल के समय चंदन ने तारामंडल इलाके के एक प्रतिष्ठित व्यापारी के पास गुर्गे भेजे थे। इन गुर्गों ने व्यापारी को चंदन की एक रिकार्डिंग सुनाई। इसमें चंदन बोल रहा था-पहचान तो रहे ही होंगे... अब मैं अध्यात्म की ओर मुड़ गया हूं। कुछ सहयोग की उम्मीद है।

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Gorakhpur's mafia Chandan Singh had fired in Bihar, fired more than 100 rounds on BJP leader
आरोपी चंदन सिंह - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

 माफिया चंदन सिंह का नाम 19 साल में पूर्वांचल में तेजी से उभरा और आपराधिक वारदातों के जरिये वह कुख्यात हो गया। चंदन ने सिर्फ यूपी ही नहीं, बल्कि बिहार में भी अपना खौफ फैला दिया था। उसने अपने गुर्गे बिसई सिंह के साथ मिलकर वहां के एक भाजपा नेता पर 100 राउंड से अधिक फायरिंग की थी, हालांकि उनकी जान बच गई थी। चंदन सिंह माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला की तरह बिहार में अपना खौफ जमाना चाहता था।
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इसी वारदात के बाद चंदन की गिरफ्तारी के लिए एसटीएफ से लेकर गोरखपुर की पुलिस भी उसकी तलाश करने लगी। इसी बीच एसटीएफ की टीम ने बाराबंकी से चंदन को गिरफ्तार कर लिया था। चर्चा है कि बाराबंकी के एक सफेदपोश के कहने पर ही उसने इस वारदात को अंजाम दिया था और फिर भागकर यहीं चला आया।
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चिलुआताल थाने के कुसहरा गांव का देवकी नंदन सिंह 14 साल में कुख्यात चंदन सिंह बन गया। 2006 में मामूली विवाद में एक हत्या में नाम आने के बाद वह चर्चा में आया था। जेल से छूटने के बाद उसने अपराध की तरफ कदम बढ़ा दिए।

इस दौरान उसने सहजनवां, कुशीनगर और संतकबीरनगर के कुछ मनबढ़ युवकों को अपना गुर्गा बना लिया। 2013 में आजमगढ़ में हुई एक व्यापारी से लूट के मामले में पुलिस और एसटीएफ चंदन की तलाश में जुटी थी। इसी बीच मई 2013 में चंदन की गिरफ्तारी हो गई।

12 अगस्त 2013 को देवरिया जेल से चंदन को दूसरे जिले में न्यायालय में पेशी पर ले जाया गया। पुलिसकर्मी उसे न्यायालय में पेश कराने के बाद ट्रेन से लेकर लौट रहे थे। देवरिया के बैतालपुर स्टेशन के पास वह चलती ट्रेन से हथकड़ी पहने कूदकर फरार हो गया। इसके बाद उसने लखनऊ में अपना ठिकाना बना लिया। वहीं के एक होटल से गिरोह संचालित करता था। रंगदारी और लूटपाट धड़ल्ले से करने लगा।

पुलिस की चंगुल से दूसरी बार फरार हो गया था चंदन
रंगदारी और बिहार में नेता के ऊपर फायरिंग के मामले में 18 जुलाई 2014 को बाराबंकी पुलिस और एसटीएफ ने चंदन को गिरफ्तार कर लिया। तब से जेल में ही रह रहा है। बताया जाता है कि जेल में ही रहकर वह अपराध की दुनिया को संचालित कर रहा था।

पुलिस सूत्रों की मानें तो चंदन जहां भी रहा, उसने वहां अपना गैंग खड़ा कर लिया। दो साल तक जेल में रहने के दौरान मई 2016 में चंदन की तबीयत बिगड़ गई। उसे आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। 31 मई 2016 को पुलिस को चकमा देकर चंदन फिर से फरार हो गया। फरारी के दौरान चंदन की गतिविधियां बढ़ती चली गईं।

इसी बीच उस पर 50 हजार रुपये का इनाम भी घोषित हो गया। इधर, चंदन को पकड़ने के लिए एसटीएफ ने जाल बिछाया। एसटीएफ ने 24 दिसम्बर 2016 को उसे गुजरात के अहमदाबाद से गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद से ही लगातार चंदन जेल में रह रहा है।
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2013 में करवाई थी ऑटो चालक और व्यापारी की हत्या
पुलिस सूत्रों की मानें तो 2013 में तारामंडल स्थित एक ट्रेडिंग कंपनी के व्यापारी पर फायरिंग के चक्कर में दूसरे एक व्यापारी की हत्या चंदन के गुर्गे ने कर दी थी। इस दौरान एक ऑटो ड्राइवर भी चपेट में आ गया और उसकी भी मौत हो गई थी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि उस दिन मनबढ़ युवक एक शोरूम पर पहुंचे।

वहां कर्मचारी से ट्रेडर्स की दुकान का पता पूछा। उसके बताए पते पर मनबढ़ों ने जाकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। जबकि जिस शोरूम पर पता पूछा था, उनका टार्गेट वही था। चंदन ने शोरूम के निदेशक को पहले फोन कर विजय चौक के एक व्यापारी के पिता की हत्या का जिक्र करते हुए अपना परिचय दिया और रंगदारी की मांग की थी।

फोन पर कहा था- खबर तो पढ़े ही होंगे...खबर नहीं बनना है तो रुपयों का इंतजाम कर दो। उस समय चंदन के फोन को पुलिस ने सर्विंलांस पर रखा था। व्यापारी और चंदन के बीच की बातचीत वायरल हो गई थी।

''अब मैं अध्यात्म की ओर मुड़ गया हूं..कुछ सहयोग की उम्मीद है''
कोरोना काल के समय चंदन ने तारामंडल इलाके के एक प्रतिष्ठित व्यापारी के पास गुर्गे भेजे थे। इन गुर्गों ने व्यापारी को चंदन की एक रिकार्डिंग सुनाई। इसमें चंदन बोल रहा था-पहचान तो रहे ही होंगे... अब मैं अध्यात्म की ओर मुड़ गया हूं। कुछ सहयोग की उम्मीद है।

रिकार्डिंग सुनने के बाद व्यापारी से गुर्गे ने सहयोग में रुपयों की बात कही। इसी बीच परिवार के कुछ सदस्य आ गए, जो सरकारी गनर के साथ रहते थे। ये देखकर गुर्गे वहां से चले गए। इसके बाद दोबारा नहीं आए।

गोलघर के व्यापारी से सरकारी कर्मचारी को रकम देने को कहा
2018 से 19 के बीच में चंदन सिंह की ऑडियो रिकार्डिंग सामने आई थी। बताया जाता है कि जिला अस्पताल के पास रहने वाले एक शख्स ने इस रिकार्डिंग को गोलघर के एक व्यापारी को ले जाकर बतौर चंदन के संदेश के रूप में सुनाया था।

इसमें चंदन ने कहा था कि वह रकम एक सरकारी विभाग के बाबू को दे देगा। वह जाकर व्यापारी से संपर्क करेगा। इसी बीच इसकी जानकारी पुलिस को हो गई। जांच की गई तो रिकार्डिंग फर्जी पाई गई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि ऐसे भी चंदन के नाम से रिकार्डिंग भेजकर उस समय तक व्यापारियों से रुपये वसूले गए थे।

सुबह व्यापारी से आठ लाख लूटे और रात में हो गया गिरफ्तार
वर्ष 2013 की घटना है। चंदन सिंह ने सुबह बड़हलगंज में अपने एक गुर्गे के साथ देवरिया के एक व्यापारी से आठ लाख रुपये लूट लिए। रुपये लूटकर वह आराम से फरार हो गया। पुलिस ने पूरे दिन उसकी तलाश की लेकिन वह हाथ नहीं आया।

उसी रात शाहपुर थाने की पुलिस ने आपरेशन हंट के तहत शिवपुर सहबाजगंज निवासी छोटू सिंह के घर दबिश दी। चंदन सिंह अपने साथी के साथ छोटू के ही घर पर रुका था। पुलिस ने छोटू सिंह को आवाज लगाई तो वह बाहर निकल आया।

इधर, छोटू सिंह से पुलिस पूछताछ कर रही थी और चंदन सिंह को लगा कि पुलिस उसकी ही तलाश में पहुंची है, तो वह व्यापारी से लूटे गए रुपये लेकर छत से कूद गया। पुलिसकर्मियों की उसपर नजर पड़ गई। पुलिस के जवानों ने उसे दौड़ाकर पकड़ लिया। उसके पास से लूटी गई रकम भी बरामद हो गई। साथ में राइफल भी मिली थी।
 

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