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Gorakhpur News: 34 घंटे बाद रवाना हुई गोरखपुर-पुणे स्पेशल, प्लेटफॉर्म पर गुजरी दो रात

Tue, 21 May 2024 04:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Tue, 21 May 2024 04:03 AM IST
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Gorakhpur-Pune special left after 34 hours, spent two nights on the platform
फोटो
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अमरनाथ एक्सप्रेस 20 घंटे देरी से आई, जाने वाली सात घंटे री शेड्यूल, ट्रेन लेट होने परेशान रहे यात्री


संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। भीषण गर्मी के बीच गोरखपुर जंक्शन से ट्रेनों के देरी से जाने का सिलसिला जारी है। गोरखपुर-पुणे स्पेशल सोमवार को 34 घंटे की देरी से गई। इससे यात्रियों को दो रात स्टेशन पर ही गुजारनी पड़ी। इसके साथ ही अमरनाथ एक्सप्रेस 12 घंटे री शेड्यूल हो गई। घंटों देरी होने की वजह से स्टेशन पर पहुंचे यात्रियों को काफी परेशानी हुई।
गोरखपुर से जाने वाली ट्रेनों के लेट होने का कारण यह है कि यह ट्रेनें लेट आ रही हैं। इसके बाद यहां पर इनकी मेंटेनेंस में समय लग रहा है। यात्रियों के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि उन्हें यह नहीं पता कि आखिरकार ट्रेन चलेगी कब? स्टेशन प्रबंधन हर थोड़ी देर पर ट्रेन को री शेड्यूल करते हैं जिससे यात्री दुविधा में रहते हैं। यदि एक बार में ही गाड़ी 24 घंटे री शेड्यूल हो जाए तो वह आराम से घर चले जाएं और अगले दिन वापस आकर ट्रेन पकड़ लें।
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गोपालगंज के रामविलास पुणे में नौकरी करते हैं। पिछले दिनों घर में शादी की वजह से गांव आए थे। शनिवार की रात गोरखपुर से पुणे जाने वाली स्पेशल ट्रेन से उन्हें जाना था। साथ में दो बच्चे और पत्नी थीं। शनिवार को वह शाम में ही गोरखपुर पहुंच गए। आने पर पता चला कि यह गाड़ी अब सुबह जाएगी। इसके बाद उन्होंने सोचा कि गोपालगंज जाने के लिए कोई बेहतर साधन नहीं मिलेगा और फिर सुबह स्टेशन पर आना मुश्किल होगा। इसलिए उन्होंने प्लेटफॉर्म पर ही चादर बिछा लिया और इंतजार करने लगे।
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रास्ते के लिए घर से जो पूड़ी-सब्जी लाए थे उसे खाया। किसी तरह गर्मी और मच्छरों के बीच रात गुजरी। सुबह पता चला कि ट्रेन दोपहर में आएगी। इस दौरान सामुदायिक शौचालय में नहाए और बाहर से खरीदकर भोजन किया। दोपहर में पता चला कि ट्रेन अब शाम को जाएगी। परिवार के सभी सदस्य गर्मी में परेशान होकर रेलवे प्रशासन को कोस रहे थे। उनका कहना था कि यदि रविवार की शाम को ही ट्रेन चलानी थी तो पहले ही बता देते हम लोग उसी समय पहुंचते। 24 घंटे से आकर स्टेशन पर बैठे हैं। रविवार की शाम यह ट्रेन फिर री शेड्यूल हो गई। रात में फिर मैसेज आया कि ट्रेन सुबह जाएगी। दो रात प्लेटफॉर्म पर गुजारकर उनकी हालत खराब हो गई। रामविलास का कहना था कि हमें सोमवार को ड्यूटी ज्वॉइन करना था लेकिन हम अभी गोरखपुर में ही बैठे हैं।
लार रोड के हरीश सिंह भी शनिवार की शाम स्टेशन पर पहुंच गए। उन्हें अकेले पुणे जाना था। उन्होंने बताया कि ट्रेन एक बार में केवल दो से तीन घंटे री शेड्यूल हो रही थी। इसकी वजह से वह घर नहीं जा पाए। दो रात और एक दिन स्टेशन पर ही गुजर गया। पहले पता रहता तो घर चले गए होते। इतने देर में ही एक हजार रुपये से ज्यादा खर्च हो गए।
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थोड़ी-थोड़ी देर पर बदलता रहा समय
री शेड्यूल होने वाली ट्रेनों के समय में अचानक बदलाव नहीं हो रहा। इन्हें एक बार में तीन से चार घंटे ही री शेड्यूल किया जा रहा है। इसकी वजह से यात्री दुविधा में पड़ रहे कि वह प्लेटफॉर्म पर इंतजार करें या घर जाएं। ऐसा करते-करते ट्रेन 25 से 30 घंटे तक री शेड्यूल हो रही है। इसमें सबसे ज्यादा समस्या दूर-दराज से आने वाले यात्रियों को हो रही है। उनके पास इंतजार के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है।
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परिवार संग रात गुजारना कठिन
दूर-दराज से ज्यादातर यात्री परिवार संग यात्रा कर रहे हैं। ट्रेन लेट होने पर उनके सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि प्लेटफॉर्म पर रात कैसे गुजारी जाए। महिलाओं के लिए संकट और भी बढ़ जाता है। यात्रियों के पास इतना बजट नहीं कि वह दो दिन होटल में रह सकें। इसके अलावा खाने-पीने और अन्य चीजों में भी उनका काफी पैसा खर्च हो रहा है।
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सात घंटे री शेड्यूल हुई अमरनाथ एक्सप्रेस
गोरखपुर से सोमवार को दोपहर दो बजे के करीब अमृतसर जाने वाली अमरनाथ एक्सप्रेस पहले छह घंटे री शेड्यूल हुई। मैसेज आया कि अब ट्रेन रात आठ बजे जाएगी। अंबाला मंडल के शंभू स्टेशन पर चल रहे किसान आंदोलन की वजह से अमृतसर रूट की ट्रेनें लेट हो रही हैं। बीच में मार्ग परिवर्तन किया गया है। आम्रपाली एक्सप्रेस सोमवार को 13 घंटे की देरी से आई। वहीं, गरीबरथ 25 घंटे, जनसाधाराण 19 और शहीद एक्सप्रेस 15 घंटे की देरी से चल रही थी। हालांकि इनमें से कोई भी ट्रेन गोरखपुर से शुरू होने वाली नहीं हैं। यह पहले से ही लेट चल रही थीं।
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बुजुर्गों के लिए एफओबी समस्या
स्टेशन पर बीच वाला फुट ओवर ब्रिज बंद है। इसकी वजह से यात्रियों को प्लेटफॉर्म पार करने के लिए पश्चिम या पूर्वी छोर के एफओबी का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे सबसे ज्यादा समस्या बुजुर्ग यात्रियों को हो रही है। सोमवार को शंकर तिवारी को जनरल टिकट काउंटर से प्लेटफॉर्म नंबर पांच पर जाना था। बीच का एफओबी बंद देख वह पूर्वी छोर के एफओबी की तरफ बढ़े। वह लाठी के सहारे सीढ़ी चढ़ रहे थे। पूछने पर बताया कि लिफ्ट में उनको डर लगता है। बीच वाला ब्रिज बंद होने की वजह से बहुत परेशानी हो रही है।

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बोले यात्री
ट्रेन का कुछ समझ में ही नहीं आ रहा। एक बार में री शेड्यल नहीं हो रही। पहले से पता रहे तो हम लोग उसी समय से स्टेशन आते। इसकी वजह से बहुत परेशानी हो रही है।
- मनोज

अगर ट्रेन को 24 घंटे बाद चलाना है तो कम से कम इसकी सूचना पहले देनी चाहिए। स्टेशन पर आने के बाद थोड़ी-थोड़ी देरी पर टाइम बढ़ता जाता है।
रोहित
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