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जान जोखिम में डालकर जर्जर आवासों में रह रहा है पुलिसकर्मियों का परिवार, कई बार हो चुके हैं हादसे

Thu, 03 Sep 2020 04:38 PM IST
vivek shukla विष्णु त्रिपाठी, गोरखपुर।
विष्णु त्रिपाठी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 03 Sep 2020 04:38 PM IST
सार

  • 12 आवासों को निष्प्रयोज्य घोषित करने को भेजा गया था प्रस्ताव, पर नहीं मिली मंजूरी
  • पुलिस लाइंस में लगभग छह से सात हजार पुलिसकर्मी पर आवास महज 700

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Gorakhpur police line family of policemen is living in dilapidated houses
पुलिस लाइंस के जर्जर आवास। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की पुलिस लाइंस में कई साल से पुलिसकर्मियों का परिवार जान जोखिम में डालकर जर्जर आवासों में रह रहा है, लेकिन उनकी सुधि लेने वाला कोई नहीं है। पुलिसकर्मियों के घरवालों ने बताया कि अक्सर अधिकारी मौके का मुआयना करते हैं और तमाम निर्देश भी जारी करते हैं, लेकिन आज तक आवासों की मरम्मत नहीं कराई गई। कई बार हादसे भी हो चुके हैं, मगर मरम्मत और निर्माण की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।  

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हालत यह है कि 12 आवासों को निष्प्रयोज्य घोषित करने के लिए पुलिस की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन अभी तक इसे मंजूरी नहीं मिल सकी है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती तो नए सिरे से निर्माण कराया जाता। जानकारी के मुताबिक, अपने स्तर से पुलिस के जिम्मेदारों ने चार जर्जर आवासों को खाली कराया है, ताकि कोई हादसा न हो जाए।
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पुलिस लाइंस परिसर में स्थित ज्यादातर आवास जर्जर हो चुके हैं। पुलिस लाइन आटा चक्की स्थित ब्लॉक (के) के आवास पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं, जहां कई पुलिसकर्मियों के परिवार रहने को मजबूर हैं। पिछले दो साल से रंगाई-पुताई की बात तो दूर, इसकी मरम्मत तक नहीं कराई गई। इसी का नतीजा है कि कई बार हादसे हो चुके हैं। हादसे के बाद पुलिस के जिम्मेदार अफसर खानापूर्ति कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं।
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छत जर्जर, टपकता है बारिश का पानी
बरसात में तो मुश्किल और बढ़ जाती है। आवास की छत, दीवारों की हालत ऐसी है कि बारिश का पानी सीधे घर के अंदर टपकता है। बारिश का पानी कमरे के अंदर न पहुंच सके, इसके लिए एटीएस के इंस्पेक्टर संतोष सहित कई पुलिसकर्मियों ने छत पर प्लास्टिक बिछाया है। परिवार वाले बताते हैं कि प्राइवेट में मकान महंगे किराए पर मिलते हैं। इसलिए न चाहते हुए भी इन सरकारी आवासों में रहना पड़ता है।

पुलिसकर्मियों की संख्या की तुलना में बहुत कम हैं आवास

पुलिस सूत्रों के अनुसार, पुलिस लाइंस में जहां वर्तमान समय में लगभग 6 से 7 हजार पुलिसकर्मी हैं, वहीं आवासों की संख्या महज 700 है।

चार जर्जर आवासों को खाली कराया गया है
जानकारी के मुताबिक, चार जर्जर आवासों को खाली कराया गया है। टाइप तीन के तीन व टाइप दो के एक आवास में रहने वाले एक दीवान व अन्य सिपाहियों के परिवारों को दूसरे जगह भेजा गया है। सूत्रों के अनुसार, आवास खाली करने वाले पुलिसकर्मियों में तीन का तबादला गैर जनपद हो गया जबकि एक ने पादरी बाजार में अपना निजी मकान बनवा लिया।
 
इतने कम पैसे में कैसे हो मरम्मत
आवासों की मरम्मत न हो पाने की एक वजह धन की कमी भी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, अगर दस मकानों की मरम्मत का प्रस्ताव भेजा जाता है तो इंजीनियर सर्वे कर रिपोर्ट देता है। जिसके बाद पुलिस लाइंस में मरम्मत के लिए रकम आती है, जो कि बाद में कम पड़ जाती है। वजह यह है कि किसी मकान में काम ज्यादा होता है किसी में कम।

एक सप्ताह पहले गिर गया था छज्जा

जानकारी के अनुसार, एक सप्ताह पहले ही पुलिस लाइंस स्थित विजलेंस कार्यालय का छज्जा गिर गया था। तब पुलिसकर्मी बालबाल बचे थे। वहीं एक और आवास का प्लास्टर गिर गया था। कई मकानों के दरवाजे, खिड़कियां उखड़ चुकी हैं। इससे पहले भी कई बार प्लास्टर, छज्जा गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

पुलिस लाइंस के आरआई उमेश दूबे ने बताया कि समय समय पर आवासों की मरम्मत कराई जाती है। कई बार फंड कम पड़ जाता है। चार आवासों को खाली कराया जा चुका है। 12 आवासों को निष्प्रयोज्य घोषित करने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। पत्राचार किया जा रहा है कि जल्द से जल्द इसे निष्प्रयोज्य घोषित कराकर निर्माण शुरू कराया जा सके।

जल्द मिलेगा नए आवासों का तोहफा

एसएसपी जोगिंदर कुमार ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं था। प्रस्ताव भेजा गया है तो जर्जर आवासों को निष्प्रयोज्य घोषित कराकर नए आवासों का निर्माण शुरू कराया जाएगा। संबंधित विभाग को पत्र भेजा जाएगा। साथ ही जिन आवासों की मरम्मत की जरूरत है, उनकी मरम्मत कराई जाएगी। पैसे की कमी नहीं होने दी जाएगी।

आरआई उमेश दूबे के मुताबिक, जल्द ही पुलिसकर्मियों को कुछ नए आवासों का तोहफा मिलेगा। उन्होंने बताया कि पुलिस लाइंस में 250 क्षमता वाली बैरक बनकर तैयार हो गई है। जल्दी ही उसे आवंटित किया जाएगा। वहीं महिला पुलिसकर्मियों के लिए चार मंजिला भवन व पुरूष पुलिसकर्मियों के लिए बन रही आठ मंजिला भवन का निर्माण अंतिम चरण में है। इसी प्रकार 12 मंजिला दो भवनों के निर्माण का प्रस्ताव भी स्वीकृत हो गया है। इसमें से एक पुलिस लाइंस में धर्मशाला के पास तो दूसरा चिलुआताल थाने में बनाया जाएगा।

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