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Gorakhpur News: वक्फ की संपत्तियों की भेज दी गलत रिपोर्ट, दोबारा मांगी गई
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पुराने सर्वे रिपोर्ट से मिलान कराने पर मिली गड़बड़ी
गोरखपुर। जिले में वक्फ की संपत्तियों की सर्वे रिपोर्ट कई तहसील प्रशासन की ओर से गलत भेज दी गई है। रिपोर्ट में गांव और वक्फ की जमीनों का रकबा ही गलत दर्शाया गया है। वहीं कुछ जगहों पर कितनी जमीनें हैं इसका जिक्र ही नहीं है। तहसील प्रशासन से रिपोर्ट को सही कराकर दोबारा भेजने को कहा गया है। वहीं, जिन तहसीलों की सही रिपोर्ट आई है उसका भी मिलान अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड के कार्यालय से कराया जा रहा है।
शासन स्तर पर वक्फ की संपत्तियों को लेकर 22-23 जनवरी को समीक्षा होने वाली है। इसी क्रम में वक्फ की संपत्तियों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। इसके लिए सभी तहसीलों से विस्तार से रिपोर्ट मांगी गई थी। दो दिन पहले सदर तहसील को छोड़कर बाकी जगहों रिपोर्ट आई थी, जिसमें आधी-अधूरी रिपोर्ट भेज दी गई। मसलन, एक ही नाम के दो गांव हैं और वक्फ की जमीन जिस गांव में नहीं है उसमें दिखाया गया है।
अल्पसंख्यक विभाग के कर्मचारियों ने जब पुरानी रिपोर्ट से मिलान कराया तो गड़बड़ी पकड़ी गई। सबसे ज्यादा गड़बड़ी सदर तहसील की रिपोर्ट में मिली है। अब सभी तहसीलों से बृहस्पतिवार तक दुरूस्त कराकर नई रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। 1986 में प्रशासन ने जब सर्वे कराया था तो उस दौरान कुल 1466 संपत्तियां वक्फ की मिली थीं, लेकिन इसमें महराजगंज की जमीनें भी शामिल थीं। गोरखपुर में 1059 संपत्तियां थीं, जिसमें सबसे ज्यादा सदर तहसील में 598 संपत्तियां है।
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कोट
वक्फ की संपत्तियां का रकबा के साथ विवरण मांगा गया था। कुछ तहसीलों से अधूरी रिपोर्ट मिली है, दोबारा रिपोर्ट मांगी गई है। एक-दो दिन में कंपाइल करके रिपोर्ट शासन को भेज दिया जाएगा।
कृष्णा करुणेश, डीएम
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गोरखपुर। जिले में वक्फ की संपत्तियों की सर्वे रिपोर्ट कई तहसील प्रशासन की ओर से गलत भेज दी गई है। रिपोर्ट में गांव और वक्फ की जमीनों का रकबा ही गलत दर्शाया गया है। वहीं कुछ जगहों पर कितनी जमीनें हैं इसका जिक्र ही नहीं है। तहसील प्रशासन से रिपोर्ट को सही कराकर दोबारा भेजने को कहा गया है। वहीं, जिन तहसीलों की सही रिपोर्ट आई है उसका भी मिलान अल्पसंख्यक कल्याण बोर्ड के कार्यालय से कराया जा रहा है।
शासन स्तर पर वक्फ की संपत्तियों को लेकर 22-23 जनवरी को समीक्षा होने वाली है। इसी क्रम में वक्फ की संपत्तियों का ब्यौरा जुटाया जा रहा है। इसके लिए सभी तहसीलों से विस्तार से रिपोर्ट मांगी गई थी। दो दिन पहले सदर तहसील को छोड़कर बाकी जगहों रिपोर्ट आई थी, जिसमें आधी-अधूरी रिपोर्ट भेज दी गई। मसलन, एक ही नाम के दो गांव हैं और वक्फ की जमीन जिस गांव में नहीं है उसमें दिखाया गया है।
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अल्पसंख्यक विभाग के कर्मचारियों ने जब पुरानी रिपोर्ट से मिलान कराया तो गड़बड़ी पकड़ी गई। सबसे ज्यादा गड़बड़ी सदर तहसील की रिपोर्ट में मिली है। अब सभी तहसीलों से बृहस्पतिवार तक दुरूस्त कराकर नई रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है। 1986 में प्रशासन ने जब सर्वे कराया था तो उस दौरान कुल 1466 संपत्तियां वक्फ की मिली थीं, लेकिन इसमें महराजगंज की जमीनें भी शामिल थीं। गोरखपुर में 1059 संपत्तियां थीं, जिसमें सबसे ज्यादा सदर तहसील में 598 संपत्तियां है।
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वक्फ की संपत्तियां का रकबा के साथ विवरण मांगा गया था। कुछ तहसीलों से अधूरी रिपोर्ट मिली है, दोबारा रिपोर्ट मांगी गई है। एक-दो दिन में कंपाइल करके रिपोर्ट शासन को भेज दिया जाएगा।
कृष्णा करुणेश, डीएम