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Gorakhpur News: विजिलेंस ने शुरू की जांच, आरआरबी चेयरमैन समेत पांच कर्मचारी रडार पर

Mon, 16 Dec 2024 01:03 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 16 Dec 2024 01:03 AM IST
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Gorakhpur News: Vigilance starts investigation, five employees including RRB Chairman on radar
गोरखपुर। रेल कोच फैक्टरी, रायबरेली में बिना परीक्षा के ही दो अभ्यर्थियों की फर्जी नियुक्ति के मामले में अब विजिलेंस ने भी जांच शुरू कर दी है। टीम ने आरआरबी (रेलवे भर्ती बोर्ड) दफ्तर जाकर फाइलें खंगाली और दस्तावेजों को कब्जे में लिया है। इस मामले में आरआरबी गोरखपुर के निलंबित चेयरमैन नुरुद्दीन अंसारी, रेलवे बोर्ड से नियुक्त असिस्टेंट सेक्रेटरी समेत पांच रेलकर्मी रडार पर हैं। जल्द ही टीम इनसे पूछताछ कर बयान दर्ज कर सकती है।
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रेलवे सूत्रों के मुताबिक, विजिलेंस की टीम तीन दिन पहले ही आरआरबी दफ्तर गई थी और नियुक्ति संबंधित कागजातों को उठा लाई है। प्राथमिक तौर पर गड़बड़ी मिली है। दस्तावेजों की पड़ताल की जा रही है। भर्ती प्रक्रिया में आरआरबी चेयरमैन, असिस्टेंट सेक्रेटरी, मुख्य कार्यालय अधीक्षक, निजी सचिव और एक वरिष्ठ लिपिक की भूमिका सीधे तौर पर थी।
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विजिलेंस अब इस पड़ताल में जुटी है कि फाइलों पर किस-किस ने अपनी आख्या में क्या रिपोर्ट लगाई है। बिना परीक्षा वाले दोनों कर्मचारियों के बेटों के कागजात शामिल किए गए हैं या नहीं। नियुक्ति के लिए पैनल चयन करने के दौरान किसने हस्ताक्षर किए हैं। इन सभी के मोबाइल रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। यही नहीं, पैनल में शामिल सभी अभ्यर्थियों से भी पूछताछ की तैयारी है।
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आरआरबी के दोनों कर्मचारियों को है बड़े अफसरों की शह



रेलवे भर्ती बोर्ड, गोरखपुर कार्यालय में तैनात रहे मुख्य कार्यालय अधीक्षक और निजी सचिव को कुछ बड़े अफसरों का शह है। इन्हीं दोनों ने अपने बेटों का नाम फर्जी तरीके से पैनल में शामिल करवा लिया। वर्ष 2018 में तकनीशियन और लोको पायलट की भर्ती के दौरान भी अनियमितता बरती गई थी। दिल्ली रेलवे विजिलेंस की टीम ने शिकायत पर नवंबर 2022 में रेलवे भाई बोर्ड, गोरखपुर के कार्यालय में छापा मारा था। अनियमितता मिलने पर रेलवे भर्ती बोर्ड गोरखपुर के तत्कालीन अध्यक्ष पीके राय को हटा दिया गया था। उस समय भी इन दोनों कर्मचारियों को हटाने का निर्देश जारी हुआ, लेकिन कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी। हालांकि अब मुख्य कार्यालय अधीक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं।




सेवानिवृत्त कार्यालय अधीक्षक की रुक सकती है पेंशन



रेलवे में नियम है कि अगर कोई अनियमितता में लिप्त पाया जाता है और सेवानिवृत्त हो चुका है तो चार साल तक उस पर कार्रवाई हो सकती है। आरोप सिद्ध होने पर रेलवे प्रशासन 25 फीसदी से लेकर 100 फीसदी पेंशन बंद करने की सिफारिश कर सकता है। फर्जी तरीके से पकड़ी गई नियुक्ति के मामले में कार्यालय अधीक्षक चंद्र शेखर आर्य सेवानिवृत्त हैं और उनके बेटे का नाम पैनल में शामिल कराया गया था। अब चंद्रशेखर की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं।
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