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Gorakhpur News: सुभिक्ष योग में आज होगी मौनी अमावस्या, श्रद्धालु करेंगे स्नान
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राप्ती व सरयु में श्रद्धालु करेंगे स्नान, घाट के किनारे लगेगा मेला
मौन रहकर स्नान व व्रत से व्यक्ति के भीतर होती है आध्यात्मिक उन्नति
गोरखपुर। मौनी अमावस्या बुधवार को सुभिक्ष योग में मनाई जाएगी। श्रद्धालु राप्ती व सरयू सहित पवित्र नदियों में स्नान कर दान करेंगे। नदियों के विभिन्न घाटों पर मेले का भी आयोजन किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने का विधान है। मौन व्रत से व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक उन्नति होती है। इसके माध्यम से वाणी की शुद्धता और मोक्ष की प्राप्ति संभव है। यह व्रत आत्मिक शांति और साधना में गहराई लाने का एक सशक्त माध्यम है।
गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल ने बताया कि इस दिन को सिद्धि योग, श्रवण नक्षत्र व बुधवार के संयोग से सुभिक्ष योग बन रहा है। मौनी अमावस्या को मौन रहकर स्नान करने व दान करने से श्रद्धालुओं के कष्ट कटते हैं। उनके जीवन में उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। अमावस्या तिथि मंगलवार 28 जनवरी की शाम 7:10 बजे लग गई। यह तिथि 29 जनवरी बुधवार को शाम 6:28 बजे तक रहेगी। उदया तिथि में अमावस्या होने पर मौनी अमावस्या का स्नान भी बुधवार को ही होगा।
गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ के सहायक आचार्य डॉ. प्रांगेश कुमार मिश्र ने बताया कि मौनी अमावस्या का अलग ही महत्व है। साधक इस दिन मौन रहकर व्रत करते हैं क्योंकि मौन रहकर मन को नियंत्रित करना और ध्यान में एकाग्रता लाना सरल हो जाता है। मौनी अमावस्या पर दान का महत्व है। इस दिन तिल, अन्न, वस्त्र और धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है। गुरु गोरक्षनाथ आरती समिति के महामंत्री अनुराग मझवार ने बताया कि राप्ती तट पर दीपोत्सव कार्यक्रम किया जा सकता है। इसके बारे में मंथन चल रहा है।
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मौन रहकर स्नान व व्रत से व्यक्ति के भीतर होती है आध्यात्मिक उन्नति
गोरखपुर। मौनी अमावस्या बुधवार को सुभिक्ष योग में मनाई जाएगी। श्रद्धालु राप्ती व सरयू सहित पवित्र नदियों में स्नान कर दान करेंगे। नदियों के विभिन्न घाटों पर मेले का भी आयोजन किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखने का विधान है। मौन व्रत से व्यक्ति के भीतर आध्यात्मिक उन्नति होती है। इसके माध्यम से वाणी की शुद्धता और मोक्ष की प्राप्ति संभव है। यह व्रत आत्मिक शांति और साधना में गहराई लाने का एक सशक्त माध्यम है।
गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ के ज्योतिष विभागाध्यक्ष डॉ. दिग्विजय शुक्ल ने बताया कि इस दिन को सिद्धि योग, श्रवण नक्षत्र व बुधवार के संयोग से सुभिक्ष योग बन रहा है। मौनी अमावस्या को मौन रहकर स्नान करने व दान करने से श्रद्धालुओं के कष्ट कटते हैं। उनके जीवन में उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है। अमावस्या तिथि मंगलवार 28 जनवरी की शाम 7:10 बजे लग गई। यह तिथि 29 जनवरी बुधवार को शाम 6:28 बजे तक रहेगी। उदया तिथि में अमावस्या होने पर मौनी अमावस्या का स्नान भी बुधवार को ही होगा।
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गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ के सहायक आचार्य डॉ. प्रांगेश कुमार मिश्र ने बताया कि मौनी अमावस्या का अलग ही महत्व है। साधक इस दिन मौन रहकर व्रत करते हैं क्योंकि मौन रहकर मन को नियंत्रित करना और ध्यान में एकाग्रता लाना सरल हो जाता है। मौनी अमावस्या पर दान का महत्व है। इस दिन तिल, अन्न, वस्त्र और धन का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। गरीबों और जरूरतमंदों की मदद करने से जीवन में सुख और समृद्धि आती है। गुरु गोरक्षनाथ आरती समिति के महामंत्री अनुराग मझवार ने बताया कि राप्ती तट पर दीपोत्सव कार्यक्रम किया जा सकता है। इसके बारे में मंथन चल रहा है।
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