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Gorakhpur News: जबरन कर दिए दो-दो लोन...फिर बनाने लगे दबाव
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समूह लोन प्रकरण: गोला इलाके के कोहना मठिया गांव की महिलाएं भी जालसाजी की शिकार
गोला (गोरखपुर)। जरूरतमंदों की मदद के बहाने ग्रामीण इलाकों में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारी सूदखोरों की तरह महिलाओं को जाल में फंसा रहे हैं। गोला इलाके के कोहना मठिया गांव की 20 से अधिक महिलाओं को एक अन्य फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने एक की जगह दो-दो लोन दे दिए। अब दबाव डालकर किस्त में रुपयों की वसूली कर रहे हैं।
गोला इलाके में चार महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद इसी तरह के मामले में कोहना मठिया गांव भी चर्चा में आ गया है। इस गांव में शायद ही कोई घर है, जहां महिलाओं ने समूह से लोन न लिया हो। उन्होंने लोन की किस्त चुकाने के लिए दिन-रात मेहनत की, अपने कई जरूरी सामान तक बेच दिए, लेकिन कर्ज बरकरार है।
इस गांव की संगीता पत्नी रामबदन ने बताया कि बकरी पालन के लिए समूह से 30 हजार का कर्ज लिया था। अभी वह कर्ज भर ही रही थी कि कंपनी के कर्मचारियों ने वोटर आईडी व आधार कार्ड लेकर 20 हजार रुपये का दूसरा लोन पास कर दिया। बदले में एक हजार रुपये कागजात के व पांच हजार रुपये बीमा के नाम पर ले लिया। बाकी बचे 14 हजार बच्चों की पढ़ाई व दवाई आदि में धीरे-धीरे खर्च हो गए। कर्ज ज्यादा होने पर उसे भरना कठिन हो गया। अब कंपनी के एजेंट रोज वसूली का दबाव बना रहे हैं।
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कलावती पत्नी सामरथी ने बताया कि उन्होंने रोजगार के लिए 40 हजार रुपये का लोन लिया था। कंपनी के कर्मचारियों ने सभी महिलाओं को मिलकर बड़ा बिजनेस करने को कहा था और मदद करने को भी कहा था। बाद में फर्जी वोटर आईडी व आधार से चार लाख का लोन पास कर दिया और बदले में छह हजार रुपये ले लिए। अब दूसरा कर्मचारी आ गया है। वह वसूली के लिए लगातार धमका रहा है। गृहस्थी के कुछ सामान बेचकर किस्त चुकाई है लेकिन अभी काफी पैसा बाकी है।
गांव की ऊषा पत्नी सिकंदर, मेवाती पत्नी रुदल, गुलैची पत्नी रामाज्ञा, निशा पत्नी वीरेंद्र, रवीना पत्नी दिलिप, चानमती पत्नी राजेश, सुधा पत्नी सूर्यभान, गिरिजा पत्नी सुनील, संध्या पत्नी रिखई, इंदू पत्नी होशिला, गीता पत्नी संजय आदि को भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन दिया गया है और वसूली के लिए प्रत्येक सप्ताह कर्मचारी दबाव बना रहे हैं।
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गोला प्रकरण के बाद सामने आईं और महिलाएं
माइक्रो फाइनेंस कंपनी में धोखाधड़ी के मामले में आशिया उर्फ आशा, राजकुमारी देवी, सुअरज गांव निवासी साधना व डेईडीहा गांव निवासी मोती देवी की गिरफ्तारी का प्रकरण चर्चा में आने के बाद माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारियों के मकड़जाल में फंसी अन्य महिलाएं भी सामने आने लगी हैं। महिलाओं का कहना है कि फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी कमीशन के लालच में फर्जी आईडी कार्ड बनाकर दूसरा लोन पास कर देते हैं। इसके बाद दूसरे कर्मचारी आकर किस्त के लिए दबाव बनाते हैं। उन लोगों ने कई बार आवाज उठाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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मरने के बाद भी पैसा जमा करने का बना रहे दबाव
कोहना मठिया गांव की निर्मला देवी ने समूह से लोन लिया था। कुछ दिनों के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई। सारा पैसा इलाज में लग गया। पैसा कम पड़ा तो उनकी सास लीलावती पत्नी अच्छेलाल ने भी लगभग चार लाख का लोन ले लिया और इलाज कराने लगीं। इलाज के दौरान निर्मला की मौत हो गई। सास ने बताया कि जिस दिन उसका अंतिम संस्कार किया गया, उसी दिन कर्मचारी वसूली करने आ गए। रिश्तेदारों के सामने बेइज्जत करने लगे। हमने उन्हें यह भी बताया कि बहू का अंतिम संस्कार चंदा लगाकर किया जा रहा है, फिर भी वे नहीं माने।
कलावती पत्नी सामरथी ने बताया कि उन्होंने डेढ़ वर्ष पूर्व लगभग चार लाख रुपये का समूह से कर्ज लिया था। इसे भरते-भरते घर के मरम्मत के लिए रखा ईंट, लोहे का दरवाजा व गृहस्थी की कई चीजें बेच दीं, लेकिन कर्ज खत्म नहीं हो रहा है। गुलैचा पत्नी रामाज्ञा ने बताया कि तीन लाख का लोन लिया।इसे डेढ़ वर्ष से भर रही हैं। अभी तक पूरा नहीं हुआ। गिरिजा पत्नी सुनील ने बताया कि चार लाख का लोन चुकाते-चुकाते दोपहिया वाहन, सिलिंडर, पंखा व गृहस्थी के कई सामान बिक गए, लेकिन कर्ज अभी भी शेष है। एजेंट उन्हें धमकी दे रहे हैं।
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खाते में आई थी सेटलमेंट की राशि
गोला प्रकरण की जांच कर रहे एसआई देवेंद्र सिंह यादव ने बताया कि महिलाओं के खाते में ही लोन की रकम के अलावा सेटलमेंट की रकम भी पहुंची थी। हालांकि, महिलाओं ने अपने बयान में बताया है कि उन्होंने यह पैसा फाइनेंस कंपनियों को दे दिया था। इस प्रकरण से जुड़ीं सभी महिलाओं के खातों की जांच की जा रही है।
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गोला (गोरखपुर)। जरूरतमंदों की मदद के बहाने ग्रामीण इलाकों में माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारी सूदखोरों की तरह महिलाओं को जाल में फंसा रहे हैं। गोला इलाके के कोहना मठिया गांव की 20 से अधिक महिलाओं को एक अन्य फाइनेंस कंपनी के कर्मचारियों ने एक की जगह दो-दो लोन दे दिए। अब दबाव डालकर किस्त में रुपयों की वसूली कर रहे हैं।
गोला इलाके में चार महिलाओं की गिरफ्तारी के बाद इसी तरह के मामले में कोहना मठिया गांव भी चर्चा में आ गया है। इस गांव में शायद ही कोई घर है, जहां महिलाओं ने समूह से लोन न लिया हो। उन्होंने लोन की किस्त चुकाने के लिए दिन-रात मेहनत की, अपने कई जरूरी सामान तक बेच दिए, लेकिन कर्ज बरकरार है।
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इस गांव की संगीता पत्नी रामबदन ने बताया कि बकरी पालन के लिए समूह से 30 हजार का कर्ज लिया था। अभी वह कर्ज भर ही रही थी कि कंपनी के कर्मचारियों ने वोटर आईडी व आधार कार्ड लेकर 20 हजार रुपये का दूसरा लोन पास कर दिया। बदले में एक हजार रुपये कागजात के व पांच हजार रुपये बीमा के नाम पर ले लिया। बाकी बचे 14 हजार बच्चों की पढ़ाई व दवाई आदि में धीरे-धीरे खर्च हो गए। कर्ज ज्यादा होने पर उसे भरना कठिन हो गया। अब कंपनी के एजेंट रोज वसूली का दबाव बना रहे हैं।
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कलावती पत्नी सामरथी ने बताया कि उन्होंने रोजगार के लिए 40 हजार रुपये का लोन लिया था। कंपनी के कर्मचारियों ने सभी महिलाओं को मिलकर बड़ा बिजनेस करने को कहा था और मदद करने को भी कहा था। बाद में फर्जी वोटर आईडी व आधार से चार लाख का लोन पास कर दिया और बदले में छह हजार रुपये ले लिए। अब दूसरा कर्मचारी आ गया है। वह वसूली के लिए लगातार धमका रहा है। गृहस्थी के कुछ सामान बेचकर किस्त चुकाई है लेकिन अभी काफी पैसा बाकी है।
गांव की ऊषा पत्नी सिकंदर, मेवाती पत्नी रुदल, गुलैची पत्नी रामाज्ञा, निशा पत्नी वीरेंद्र, रवीना पत्नी दिलिप, चानमती पत्नी राजेश, सुधा पत्नी सूर्यभान, गिरिजा पत्नी सुनील, संध्या पत्नी रिखई, इंदू पत्नी होशिला, गीता पत्नी संजय आदि को भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन दिया गया है और वसूली के लिए प्रत्येक सप्ताह कर्मचारी दबाव बना रहे हैं।
गोला प्रकरण के बाद सामने आईं और महिलाएं
माइक्रो फाइनेंस कंपनी में धोखाधड़ी के मामले में आशिया उर्फ आशा, राजकुमारी देवी, सुअरज गांव निवासी साधना व डेईडीहा गांव निवासी मोती देवी की गिरफ्तारी का प्रकरण चर्चा में आने के बाद माइक्रो फाइनेंस कंपनियों के कर्मचारियों के मकड़जाल में फंसी अन्य महिलाएं भी सामने आने लगी हैं। महिलाओं का कहना है कि फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी कमीशन के लालच में फर्जी आईडी कार्ड बनाकर दूसरा लोन पास कर देते हैं। इसके बाद दूसरे कर्मचारी आकर किस्त के लिए दबाव बनाते हैं। उन लोगों ने कई बार आवाज उठाई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
मरने के बाद भी पैसा जमा करने का बना रहे दबाव
कोहना मठिया गांव की निर्मला देवी ने समूह से लोन लिया था। कुछ दिनों के बाद उनकी तबीयत खराब हो गई। सारा पैसा इलाज में लग गया। पैसा कम पड़ा तो उनकी सास लीलावती पत्नी अच्छेलाल ने भी लगभग चार लाख का लोन ले लिया और इलाज कराने लगीं। इलाज के दौरान निर्मला की मौत हो गई। सास ने बताया कि जिस दिन उसका अंतिम संस्कार किया गया, उसी दिन कर्मचारी वसूली करने आ गए। रिश्तेदारों के सामने बेइज्जत करने लगे। हमने उन्हें यह भी बताया कि बहू का अंतिम संस्कार चंदा लगाकर किया जा रहा है, फिर भी वे नहीं माने।
कलावती पत्नी सामरथी ने बताया कि उन्होंने डेढ़ वर्ष पूर्व लगभग चार लाख रुपये का समूह से कर्ज लिया था। इसे भरते-भरते घर के मरम्मत के लिए रखा ईंट, लोहे का दरवाजा व गृहस्थी की कई चीजें बेच दीं, लेकिन कर्ज खत्म नहीं हो रहा है। गुलैचा पत्नी रामाज्ञा ने बताया कि तीन लाख का लोन लिया।इसे डेढ़ वर्ष से भर रही हैं। अभी तक पूरा नहीं हुआ। गिरिजा पत्नी सुनील ने बताया कि चार लाख का लोन चुकाते-चुकाते दोपहिया वाहन, सिलिंडर, पंखा व गृहस्थी के कई सामान बिक गए, लेकिन कर्ज अभी भी शेष है। एजेंट उन्हें धमकी दे रहे हैं।
खाते में आई थी सेटलमेंट की राशि
गोला प्रकरण की जांच कर रहे एसआई देवेंद्र सिंह यादव ने बताया कि महिलाओं के खाते में ही लोन की रकम के अलावा सेटलमेंट की रकम भी पहुंची थी। हालांकि, महिलाओं ने अपने बयान में बताया है कि उन्होंने यह पैसा फाइनेंस कंपनियों को दे दिया था। इस प्रकरण से जुड़ीं सभी महिलाओं के खातों की जांच की जा रही है।