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Gorakhpur News: निलंबित पुलिसकर्मियों के मेडिकल रिपोर्ट जांच में सही मिले पर अभी कई संशय बरकरार
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12 अगस्त को उज्जैन के माधव नगर चिकित्सालय में ओपीडी में दिखाए थे तीनों निलंबित पुलिसकर्मी
डॉक्टर ने 10 दिन के आराम की सलाह दी, दिखाने के बाद गए थे नाना खेड़ा थाना
गोरखपुर। राजस्थान से आए युवक रवि शंकर से लूटपाट के मामले में संदेह के घेरे में आए चौकी इंचार्ज शुभम श्रीवास्तव समेत तीन पुलिसकर्मी अब भी लापता हैं। इधर, उनके मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच के लिए इंदौर गई टीम लौट आई है। जांच में पुष्टि हुई कि तीनों ने 12 अगस्त को उज्जैन के माधव नगर चिकित्सालय की ओपीडी में इलाज कराया था। डॉक्टर ने उन्हें दस दिन आराम की सलाह भी दी थी। लेकिन सवाल यह खड़ा हो गया है कि इलाज कराने के महज दो घंटे बाद वे नाना खेड़ा थाने पहुंच गए। एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट और उससे जुड़े तथ्यों को जांच का हिस्सा बनाया गया है। फिलहाल, तीनों पुलिसकर्मी अब भी लापता माने जा रहे हैं।
निलंबित पुलिसकर्मियों का दावा था कि अपहृत किशोरी की तलाश में मुंबई जाते समय उसका लोकेशन मध्य प्रदेश में मिला था। इसी दौरान इंदौर में खाना खाने से उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। 10 दिन का मेडिकल पुलिस अधिकारी को उनकी तरफ से भेजा गया था। पुलिस टीम मेडिकल बनाने वाले डॉक्टर से सत्यापन करने पहुंची तो उनके अस्पताल जाने की पुष्टि हुई। हालांकि उसके दो घंटे बाद नाना खेड़ा थाने जाकर पुलिस कोे लड़की तलाश में आने की जानकारी देने पर सवाल खड़ा हो रहा है। फिलहाल इसे पुलिस टीम ने जांच में शामिल कर लिया है।
राजस्थान से आए बेलीपार इलाके के पिछौरा निवासी रवि शंकर को बीते 9 अगस्त को कार सवारों ने अगवा कर 90 हजार रुपये लूट लिए थे। अगले ही दिन बदमाशों ने चार लाख रुपये और मांगे। पीड़ित ने एसपी सिटी से शिकायत की, जिसके बाद राजघाट थाने में केस दर्ज हुआ। लुटेरों ने खुद को क्राइम ब्रांच का बताया था। इसी दौरान चौकी इंचार्ज शुभम श्रीवास्तव, दरोगा अर्चना राणा और सिपाही प्रवीण यादव के लापता होने पर निलंबित कर दिया गया था। वहीं अब दो और पुलिस वालों पर गाज गिर गई। घटना वाले दिन से ही सभी के मोबाइल नंबर बंद हैं। इस वजह से उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। बाद में पता चला कि तीनों पुलिस वाले जीडी में अंकित कर किशोरी को बरामद करने के नाम पर मुंबई गए, जबकि इसकी अनुमति नहीं ली गई थी। विभागीय कार्रवाई तो हो गई लेकिन असल में वारदात किसने की यह पुलिस साफ नहीं कर सकी है।
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एसपी सिटी का कहना है कि लापता पुलिसकर्मियों की गतिविधियों की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। मेडिकल रिपोर्ट की पुष्टि हो चुकी है, मगर थाने पहुंचने और बीमारी का हवाला देने के बीच विरोधाभास पर जांच तेज कर दी गई है। फिलहाल, लापता किशोरी और संदिग्ध पुलिसकर्मियों दोनों की तलाश जारी है।
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डॉक्टर ने 10 दिन के आराम की सलाह दी, दिखाने के बाद गए थे नाना खेड़ा थाना
गोरखपुर। राजस्थान से आए युवक रवि शंकर से लूटपाट के मामले में संदेह के घेरे में आए चौकी इंचार्ज शुभम श्रीवास्तव समेत तीन पुलिसकर्मी अब भी लापता हैं। इधर, उनके मेडिकल सर्टिफिकेट की जांच के लिए इंदौर गई टीम लौट आई है। जांच में पुष्टि हुई कि तीनों ने 12 अगस्त को उज्जैन के माधव नगर चिकित्सालय की ओपीडी में इलाज कराया था। डॉक्टर ने उन्हें दस दिन आराम की सलाह भी दी थी। लेकिन सवाल यह खड़ा हो गया है कि इलाज कराने के महज दो घंटे बाद वे नाना खेड़ा थाने पहुंच गए। एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि मेडिकल रिपोर्ट और उससे जुड़े तथ्यों को जांच का हिस्सा बनाया गया है। फिलहाल, तीनों पुलिसकर्मी अब भी लापता माने जा रहे हैं।
निलंबित पुलिसकर्मियों का दावा था कि अपहृत किशोरी की तलाश में मुंबई जाते समय उसका लोकेशन मध्य प्रदेश में मिला था। इसी दौरान इंदौर में खाना खाने से उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। 10 दिन का मेडिकल पुलिस अधिकारी को उनकी तरफ से भेजा गया था। पुलिस टीम मेडिकल बनाने वाले डॉक्टर से सत्यापन करने पहुंची तो उनके अस्पताल जाने की पुष्टि हुई। हालांकि उसके दो घंटे बाद नाना खेड़ा थाने जाकर पुलिस कोे लड़की तलाश में आने की जानकारी देने पर सवाल खड़ा हो रहा है। फिलहाल इसे पुलिस टीम ने जांच में शामिल कर लिया है।
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राजस्थान से आए बेलीपार इलाके के पिछौरा निवासी रवि शंकर को बीते 9 अगस्त को कार सवारों ने अगवा कर 90 हजार रुपये लूट लिए थे। अगले ही दिन बदमाशों ने चार लाख रुपये और मांगे। पीड़ित ने एसपी सिटी से शिकायत की, जिसके बाद राजघाट थाने में केस दर्ज हुआ। लुटेरों ने खुद को क्राइम ब्रांच का बताया था। इसी दौरान चौकी इंचार्ज शुभम श्रीवास्तव, दरोगा अर्चना राणा और सिपाही प्रवीण यादव के लापता होने पर निलंबित कर दिया गया था। वहीं अब दो और पुलिस वालों पर गाज गिर गई। घटना वाले दिन से ही सभी के मोबाइल नंबर बंद हैं। इस वजह से उनकी भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। बाद में पता चला कि तीनों पुलिस वाले जीडी में अंकित कर किशोरी को बरामद करने के नाम पर मुंबई गए, जबकि इसकी अनुमति नहीं ली गई थी। विभागीय कार्रवाई तो हो गई लेकिन असल में वारदात किसने की यह पुलिस साफ नहीं कर सकी है।
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एसपी सिटी का कहना है कि लापता पुलिसकर्मियों की गतिविधियों की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। मेडिकल रिपोर्ट की पुष्टि हो चुकी है, मगर थाने पहुंचने और बीमारी का हवाला देने के बीच विरोधाभास पर जांच तेज कर दी गई है। फिलहाल, लापता किशोरी और संदिग्ध पुलिसकर्मियों दोनों की तलाश जारी है।