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Gorakhpur News: निगम की दुकानों के बढ़े किराए की होगी समीक्षा
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हाईकोर्ट की डबल बेंच ने याचिकाकर्ता व्यापारियों को दी राहत
गोरखपुर। हाईकोर्ट ने नगर निगम की दुकानों के बढ़े किराए के मामले में दुकानदारों को राहत दी है। आदेश दिया है कि जब तक नगर निगम किराए की समीक्षा कर नया आदेश पारित नहीं करता, तब तक याचिकाकर्ताओं से बढ़ा हुआ किराया वसूला नहीं जाएगा।
मामले की सुनवाई जस्टिस अंजनी कुमार मिश्र और जस्टिस जयंत बनर्जी की डबल बेंच ने की। बेंच ने यह निर्णय याचिकाकर्ता अनुराधा कक्कड़ और याचिकाकर्ता संजय कुमार पाठक और पांच अन्य की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत में प्रतिवादी नगर निगम के अधिवक्ता विभु राय ने नगर आयुक्त को मध्यस्त नियुक्त करते हुए मध्यस्थता समझौता का प्रस्ताव दिया। अदालत को विश्वास दिलाया कि सभी याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का मौका दिया जाएगा। नगर निगम अपने आदेश का पुनरीक्षण करेगा, सुनवाई उपरांत ही आदेश पारित किया जाएगा। अनुराधा कक्कड़ के अधिवक्ता वेदांत अग्रवाल ने बताया कि विद्वान न्यायाधीश ने स्वीकार करते हुए दोनों याचिकाएं उत्तरदाताओं को निर्देश देने के साथ निस्तारित कर दी। आदेश दिया कि याचिकाकर्ता व्यापारियों को संपत्ति से बेदखल नहीं किया जाएगा, बशर्ते कि वह स्वीकृत किराए का भुगतान करना जारी रखे। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर देंगे और नया आदेश पारित करेंगे। जब तक कोई नया आदेश पारित नहीं हो जाता, तब तक वसूली नहीं की जाएगी।
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गोरखपुर। हाईकोर्ट ने नगर निगम की दुकानों के बढ़े किराए के मामले में दुकानदारों को राहत दी है। आदेश दिया है कि जब तक नगर निगम किराए की समीक्षा कर नया आदेश पारित नहीं करता, तब तक याचिकाकर्ताओं से बढ़ा हुआ किराया वसूला नहीं जाएगा।
मामले की सुनवाई जस्टिस अंजनी कुमार मिश्र और जस्टिस जयंत बनर्जी की डबल बेंच ने की। बेंच ने यह निर्णय याचिकाकर्ता अनुराधा कक्कड़ और याचिकाकर्ता संजय कुमार पाठक और पांच अन्य की रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। अदालत में प्रतिवादी नगर निगम के अधिवक्ता विभु राय ने नगर आयुक्त को मध्यस्त नियुक्त करते हुए मध्यस्थता समझौता का प्रस्ताव दिया। अदालत को विश्वास दिलाया कि सभी याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का मौका दिया जाएगा। नगर निगम अपने आदेश का पुनरीक्षण करेगा, सुनवाई उपरांत ही आदेश पारित किया जाएगा। अनुराधा कक्कड़ के अधिवक्ता वेदांत अग्रवाल ने बताया कि विद्वान न्यायाधीश ने स्वीकार करते हुए दोनों याचिकाएं उत्तरदाताओं को निर्देश देने के साथ निस्तारित कर दी। आदेश दिया कि याचिकाकर्ता व्यापारियों को संपत्ति से बेदखल नहीं किया जाएगा, बशर्ते कि वह स्वीकृत किराए का भुगतान करना जारी रखे। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल याचिकाकर्ताओं को सुनवाई का अवसर देंगे और नया आदेश पारित करेंगे। जब तक कोई नया आदेश पारित नहीं हो जाता, तब तक वसूली नहीं की जाएगी।
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