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Gorakhpur News: जिन हाथों को पीला करने की थी तैयारी..दादी के खून से ही लाल रंग डाले
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कलावती हत्याकांड : पिता बोले- बेटी खुशी के हाथों में मेंहदी रचाने की तैयारी थी मगर अब सब खत्म
पत्नी-बेटी के जेल जाने के बाद कहा-अब उनसे कोई रिश्ता नहीं, दोनों का सामान एक बक्से में कर दिया पैक
भरोहिया (गोरखपुर)। पीपीगंज इलाके में भुईधरपुर गांव में कलावती हत्याकांड की गुत्थी सुलझने के बाद आरोपी खुशी के पिता परदेसी यादव बेहाल हैं। वह इस वारदात से टूट गए हैं। उन्होंने बताया कि छोटे भाई राजेश यादव की शादी के बाद बेटी खुशी के हाथ पीले करने की बात चल रही थी। कौन जानता था कि जिसके हाथों में मेहंदी रचाने की तैयारी थी, वह अपनी दादी के खून से ही उन्हें रंग डालेगी..।
पत्नी उतरा व बेटी खुशी के जेल जाने के बाद उन्होंने दोनों का सारा सामान एक बक्से में पैक कर घर के कोने में रख दिया। उन्होंने कहा कि अब दोनों से कोई रिश्ता नहीं बचा। जिस बेटी पर गर्व था, उसी ने घर की लाज मिटा दी। जिस पत्नी को बेटी को समझाना चाहिए था, उसने खुशी का साथ दे दिया। अब सबकुछ खत्म हो चुका है।
उधर, हत्या का पर्दाफाश होते ही गांव के लोग हैरान रह गए। किसी को भरोसा नहीं हो रहा कि 18 साल की एक लड़की इतनी निर्मम वारदात को अंजाम दे सकती है। पटीदार राकेश यादव का कहना है कि कलावती देवी बहुत मिलनसार थीं, सबके सुख-दुख में साथ देती थीं। कोई सोच भी नहीं सकता था कि उनकी अपनी पोती ही उनकी जान ले लेगी। उनके पास बैठे खुशी के पिता परदेसी की आंखें भर आईं।
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परदेसी ने बताया कि जब वह तीन साल की थी तो उसे पत्नी उतरा के साथ घर लाया था। उतरा पर बहुत भरोसा था। उससे बहुत प्यार करता था पर उसने भी बेटी का साथ दिया। उसे कभी माफ नहीं करेंगे। कलावती के छोटे बेटे राजेश ने कहा कि मां हमेशा खुशी को काम में हाथ बंटाने को कहती थीं, न मानने पर डांटती थीं। खुशी हमेशा शांत रहती थी। हमें कभी अंदाजा नहीं था कि वही हमारी मां की हत्या कर देगी। ये कहते हुए उनकी आंखें भर आईं।
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पत्नी-बेटी के जेल जाने के बाद कहा-अब उनसे कोई रिश्ता नहीं, दोनों का सामान एक बक्से में कर दिया पैक
भरोहिया (गोरखपुर)। पीपीगंज इलाके में भुईधरपुर गांव में कलावती हत्याकांड की गुत्थी सुलझने के बाद आरोपी खुशी के पिता परदेसी यादव बेहाल हैं। वह इस वारदात से टूट गए हैं। उन्होंने बताया कि छोटे भाई राजेश यादव की शादी के बाद बेटी खुशी के हाथ पीले करने की बात चल रही थी। कौन जानता था कि जिसके हाथों में मेहंदी रचाने की तैयारी थी, वह अपनी दादी के खून से ही उन्हें रंग डालेगी..।
पत्नी उतरा व बेटी खुशी के जेल जाने के बाद उन्होंने दोनों का सारा सामान एक बक्से में पैक कर घर के कोने में रख दिया। उन्होंने कहा कि अब दोनों से कोई रिश्ता नहीं बचा। जिस बेटी पर गर्व था, उसी ने घर की लाज मिटा दी। जिस पत्नी को बेटी को समझाना चाहिए था, उसने खुशी का साथ दे दिया। अब सबकुछ खत्म हो चुका है।
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उधर, हत्या का पर्दाफाश होते ही गांव के लोग हैरान रह गए। किसी को भरोसा नहीं हो रहा कि 18 साल की एक लड़की इतनी निर्मम वारदात को अंजाम दे सकती है। पटीदार राकेश यादव का कहना है कि कलावती देवी बहुत मिलनसार थीं, सबके सुख-दुख में साथ देती थीं। कोई सोच भी नहीं सकता था कि उनकी अपनी पोती ही उनकी जान ले लेगी। उनके पास बैठे खुशी के पिता परदेसी की आंखें भर आईं।
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परदेसी ने बताया कि जब वह तीन साल की थी तो उसे पत्नी उतरा के साथ घर लाया था। उतरा पर बहुत भरोसा था। उससे बहुत प्यार करता था पर उसने भी बेटी का साथ दिया। उसे कभी माफ नहीं करेंगे। कलावती के छोटे बेटे राजेश ने कहा कि मां हमेशा खुशी को काम में हाथ बंटाने को कहती थीं, न मानने पर डांटती थीं। खुशी हमेशा शांत रहती थी। हमें कभी अंदाजा नहीं था कि वही हमारी मां की हत्या कर देगी। ये कहते हुए उनकी आंखें भर आईं।