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Gorakhpur News: जेल भेजी गईं महिलाओं का दावा सच..जांच में फर्जी निकले मृत्यु प्रमाणपत्र

Thu, 27 Mar 2025 12:38 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 27 Mar 2025 12:38 AM IST
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Gorakhpur News: The claims of the women sent to jail are true...death certificates turned out to be fake during investigation
समूह लोन प्रकरण: पुलिस की जांच में माइक्रो फाइनेंस कर्मियों की ओर से जमा कराए गए मृत्यु प्रमाणपत्र फर्जी निकले
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गोला (गोरखपुर)। पति का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनाकर समूह लोन लेने के मामले में घेरे में आईं 19 महिलाओं के लिए राहत भरी खबर है। पुलिस की शुरुआती जांच में पता लगा है कि महिलाओं का लोन माफ कराने के लिए लगाए गए मृत्यु प्रमाणपत्र नगर पंचायत या फिर सरकारी कार्यालय से नहीं जारी किए गए थे। इसे माइक्रो फाइनेंस बैंक के कर्मियों ने जालसाजी से तैयार किया था। अब तक की जांच में मिले मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं।
इस मामले में गोला नगर पंचायत वार्ड संख्या आठ बड़ी मस्जिद निवासी इस्लाम की पत्नी आशिया उर्फ आशा, वार्ड संख्या 21 मछलीहट्टा निवासी नीरज जायसवाल की पत्नी राजकुमारी देवी, सुअरज गांव निवासी विनय कुमार मौर्य की पत्नी साधना व डेईडीहा गांव निवासी गौरीशंकर प्रजापति की पत्नी मोती देवी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भिजवाया था।
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अमर उजाला ने महिलाओं के परिवारों से बात करके इस सच को पहले ही उजागर कर दिया था। पुलिस की जांच में भी यह अहम बात सामने आई हैं। विवेचक के अनुसार, फिलहाल अभी जेल भेजी गईं चार महिलाओं के पतियों के मृत्यु प्रमाणपत्र की जांच हो सकी है। अन्य की जांच चल रही है। उसी के बाद इस मामले में तेजी से जांच शुरू हुई। इस केस में आरोपी बनाकर जेल भेजी गईं महिलाएं खुद को निर्दोष बता रही हैं। गोला कस्बा स्थित भारत फाइनेंसियल इंक्लूजन लिमिटेड सब्सिडीयरी इंडसइंड बैंक (माइक्रो फाइनेंस बैंक) से लोन लेने वाली करीब 19 महिलाओं पर पति के मृत्यु प्रमाणपत्र लगाकर लोन माफ कराने के आरोप लगे हैं। प्रबंधक की तहरीर पर पूर्व प्रबंधक पर केस दर्ज कराया गया। जांच होने पर सबसे पहले चार महिलाओं के नाम सामने आए, तब उन्हें महिलाओं को गिरफ्तार कर पुलिस ने जेल भिजवाया।
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केस के विवेचक गोला थाने के एसआई देवेंद्र सिंह यादव ने बताया लोन की रकम लेने वाली महिलाओं की जमा किस्तों की जानकारी लेने के बाद माइक्रो फाइनेंस बैंक के अधिकारी व कर्मियों ने अपने स्तर से फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र तैयार किया था। हालांकि महिलाओं ने पहले तो लोन लेने से इनकार कर दिया था, लेकिन जब उनके खाते का स्टेटमेंट दिखाया तो वह सकते में आ गईं।



उन्होंने बताया कि महिलाओं ने कर्मियों को पैसा लौटाने की बात कही। इसके बाद पुलिस ने उनके खाते का स्टेटमेंट देखा तो जानकारी मिली कि लोन के साथ-साथ महिलाओं के खाते में सेटलमेंट के बाद उनकी जमा की गई राशि भी आई थी। पुलिस ने जब पति का मृत्यु प्रमाणपत्र जमा कर लोन सेटलमेंट कराने की जानकारी दी तो महिलाओं के होश उड़ गए। वे खुद को निर्दोष बताने लगीं।



विवेचक का कहना है कि जेल भेजी गईं महिलाओं के पति के मृत्यु प्रमाणपत्र की जांच में पता चला है कि नगर पंचायत किसी अन्य सरकारी कार्यालय से प्रमाणपत्र जारी नहीं हुआ है। साक्ष्य मिलने पर आरोपियों की गिरफ्तारी की जाएगी।



विवेचक ने कहा, कर्मियों ने किया फर्जीवाड़ा



जालसाजी प्रकरण की जांच कर रहे विवेचक देवेंद्र सिंह यादव ने बताया कि माइक्रो फाइनेंस बैंक लोन पास करते समय नॉमिनी का उतने ही रुपये का बीमा करते हैं। इसमें प्रावधान रहता है कि अगर भविष्य में लोन लेने वाली महिला या फिर नॉमिनी में से किसी एक की मौत हो जाती है, तो लोन सेटलमेंट का प्रावधान है। इसके बाद मृत्यु प्रमाणपत्र जमा करवा कर बीमा कंपनी को भेजा जाता है। इसके बाद बीमा कंपनी लोन की रकम का सेटलमेंट कराने के लिए रिपोर्ट तैयार कर भेजती है। कर्मियों की तरफ जांच भी की जाती है। इस प्रकरण में कर्मियों ने जांच में पहले ही फर्जीवाड़ा किया। इसके बाद फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र जमा करवाकर जालसाजी का खेल खेला गया है। जांच की जा रही है। जल्द ही अन्य दोषियों की गिरफ्तारी की जाएगी।







आयशा, मोती, साधना के खाते में आई थी लोन की राशि



माइक्रो फाइनेंस बैंक से गोला नगर पंचायत वार्ड संख्या आठ बड़ी मस्जिद निवासी इस्लाम की पत्नी आशिया उर्फ आशा, वार्ड संख्या 21 मछलीहट्टा निवासी नीरज जायसवाल की पत्नी राजकुमारी देवी, सुअरज गांव निवासी विनय कुमार मौर्य की पत्नी साधना व डेईडीहा गांव निवासी गौरीशंकर प्रजापति की पत्नी मोती देवी ने लोन लिया था। आरोप है कि लोन सेटलमेंट के लिए उनकी तरफ से पति का मृत्यु प्रमाणपत्र लगाया गया था, जो कि फर्जी था। जांच में फर्जी पाए जाने पर पुलिस ने इन चारों महिलाओं को गिरफ्तार कर जेल भिजवा चुकी है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आयशा ने 49 हजार रुपये, साधना के खाते में 1.10 लाख रुपये व मोती के खाते में 40 हजार रुपये लोन की रकम आई थी। आयशा व उसके परिजन कह रहे हैं कि सारा पैसा लौटा दिया गया है। वहीं साधना के परिजन 1.10 लाख रुपये में 95 हजार रुपये जमा करने की बात कह रहे हैं। उन्होंने मकान बनवाने के लिए लोन लेने की बात कही थी। मोती देवी ने पैर टूटने पर इलाज के लिए रकम लेने की बात कही थी। इसमें वह 20 हजार रुपये के करीब जमा भी कर चुकी थीं।




वहीं राजकुमारी के परिजन शुरू से ही किसी प्रकार की रकम नहीं लेने की बात कह रहे हैं। फिलहाल जांच में लोन की रकम उनके खाते में आने की जानकारी मिली हैं। सेटलमेंट के बाद उनकी तरफ से जमा कराई गई राशि को उनके खाते में भेजने का प्रमाण पुलिस एकत्रित कर रही है।
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