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Gorakhpur News: टेराकोटा के दीयों से रोशन हो रही दिवाली, जमकर बिक रहे टेराकोटा उत्पाद

Sun, 19 Oct 2025 02:11 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 19 Oct 2025 02:11 AM IST
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Gorakhpur News: Terracotta diyas illuminate Diwali, terracotta products are selling like hot cakes.
हर तरफ बिक रहे टेराकोटा के उत्पाद, फुटपाथ पर लगी अस्थाई दुकानें
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घर को सजाने के लिए लोग खरीद रहे हैं टेराकोटा के उत्पाद

गोरखपुर। दिवाली को लेकर टेराकोटा के खूबसूरत सजावट के सामानों से शनिवार को शहर सज गया। अधिकांश चौराहों या प्रमुख सार्वजनिक जगहों पर टेराकोटा के उत्पादों की अस्थाई दुकानें दिख रही हैं। धनतेरस के दिन लोग बर्तन, लक्ष्मी-गणेश प्रतिमा, आभूषण सहित अन्य जरूरी वस्तुओं की खरीदारी के साथ ही घर को सजाने के लिए टेराकोटा के उत्पादों को खरीद रहे हैं।

शनिवार को शहर के प्रमुख चौराहों सहित फुटपाथों पर लगाए गए टेराकोटा के उत्पादों की लोग खरीदारी करते दिखे। सबसे अधिक लोगों ने टेराकोटा के कछुआ को पसंद किया। साथ ही मिट्टी के बने कछुआ में लगा दीया की भी बिक्री लगातार हो रही थी। यह अलग-अलग आकार में 100 से लेकर 500 रुपये तक के बीच बिका। हाथी के सिर जैसा दिखने वाले टेबल की भी बिक्री अधिक हुई। अलग-अलग आकार के यह टेबल 400 से लेकर 1000 रुपये तक में मिल रहे थे। इसके अलावा टेराकोटा के दीये 20 रुपये प्रति पीस की दर से बिक रहे थे।
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शहर के मोहद्दीपुर, असुरन, पादरी बाजार, कुनराघाट, गोरखनाथ आदि क्षेत्रों की दुकानों पर लोगों ने खरीदारी की। थोक व फुटकर के व्यापारी व शिल्पकार राजन प्रजापति ने बताया कि इस दीपावली पर गोरखपुर के टेराकोटा उत्पादों की सप्लाई का आंकड़ा 100 ट्रक पार कर चुका है। दीपावली में करीब 10 करोड़ रुपये के टर्नओवर का अनुमान है। दिवाली पर लोकल स्तर पर व्यापार शुरू हो चुका है। लोकल स्तर पर लगभग पांच करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान है।
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शिल्प से उद्यम की तरफ बढ़ा टेराकोटा
2017 के पहले तक टेराकोटा शिल्पकारों के पास संसाधनों का अभाव था। वह सारा काम हाथ से ही करते थे। ओडीओपी में शामिल होने के बाद उन्हें इलेक्ट्रिक चाक मिले और पगमील मशीनें मिलीं। हस्तचालित चाक की तुलना में इलेक्ट्रिक चाक पर तेजी से कलाकृतियां बन जाती हैं। जबकि पगमील के जरिए 24 घंटे के बराबर मिट्टी की गुथाई एक घंटे में हो जाती है। इसका असर यह हुआ कि जितने उत्पाद एक दिन में तैयार होते थे, उतने अब दो घंटों में तैयार किए जाने लगे। भारी अनुदान पर आसानी से ऋण मिलने से काम और भी आसान हो गया। शिल्पकारों को संसाधन उपलब्ध कराने के साथ ही सरकार ने इसकी ब्रांडिंग की। बड़े-बड़े महानगरों में प्रदर्शनी लगवाई और शिल्पकारों को पुरस्कार देकर उत्साहित किया। राष्ट्रपति सहित अन्य बड़ी हस्तियों को भेंट करने के लिए टेराकोटा के उत्पादों को प्राथमिकता दी गई।
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