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Gorakhpur News: गोरखपुर पहुंची श्रीसत्य साईं प्रेम प्रवाहिनी रथ यात्रा, हुआ स्वागत
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गोरखनाथ स्थित पैलेस में आयोजित हुए विभिन्न कार्यक्रम
गोरखपुर। श्रीसत्य साईं प्रेम वाहिनी रथ यात्रा पूरे भारत में भ्रमण करते हुए आंध्र प्रदेश से शनिवार को गोरखपुर पहुंची। इसमें भगवान ''''श्रीसत्य साईं बाबा'''' सूक्ष्म रूप में विराजमान रहे। प्रेम प्रवाहिनी रथ पर विराजित भगवान के पावन चरण पादुका के दर्शन का लाभ लोगों ने उठाया।
इस अवसर पर गोरखनाथ स्थित पैलेस में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बच्चों की ओर से भजन-कीर्तन की प्रस्तुति दी गई। रविवार को यह यात्रा शहर में भ्रमण करेगी। संगठन के प्रदेश समन्वयक संजय तिवारी व पीके मल्ल ने बताया कि भगवान ''''श्रीसत्य साईं बाबा'''' जो 23 नवंबर को संपूर्ण मानव जाति को सत्य, धर्म, शांति, प्रेम और अहिंसा जैसे मानवीय मूल्यों का सरल व प्रभावी संदेश देने के लिए अवतरित हुए। उनका शताब्दी जन्मोत्सव पूरे विश्व में व्यापक रूप से मनाया जा रहा है। सभी भक्तों के लिए यह अति सौभाग्य और हर्ष का विषय है कि ''''श्रीसत्य साईं'''' प्रेम प्रवाहिनी रथ प्रशांति निलयम, पुट्टपर्ती, आंध्र प्रदेश से भारत के सभी राज्यों की यात्रा पर है और हम सभी को अपने दर्शन और आशिर्वाद देने के लिए गुरू गोरक्षनाथ की तपोभूमि पर इसका आगमन हुआ। संचालन देवीदास ने किया।
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गोरखपुर। श्रीसत्य साईं प्रेम वाहिनी रथ यात्रा पूरे भारत में भ्रमण करते हुए आंध्र प्रदेश से शनिवार को गोरखपुर पहुंची। इसमें भगवान ''''श्रीसत्य साईं बाबा'''' सूक्ष्म रूप में विराजमान रहे। प्रेम प्रवाहिनी रथ पर विराजित भगवान के पावन चरण पादुका के दर्शन का लाभ लोगों ने उठाया।
इस अवसर पर गोरखनाथ स्थित पैलेस में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। बच्चों की ओर से भजन-कीर्तन की प्रस्तुति दी गई। रविवार को यह यात्रा शहर में भ्रमण करेगी। संगठन के प्रदेश समन्वयक संजय तिवारी व पीके मल्ल ने बताया कि भगवान ''''श्रीसत्य साईं बाबा'''' जो 23 नवंबर को संपूर्ण मानव जाति को सत्य, धर्म, शांति, प्रेम और अहिंसा जैसे मानवीय मूल्यों का सरल व प्रभावी संदेश देने के लिए अवतरित हुए। उनका शताब्दी जन्मोत्सव पूरे विश्व में व्यापक रूप से मनाया जा रहा है। सभी भक्तों के लिए यह अति सौभाग्य और हर्ष का विषय है कि ''''श्रीसत्य साईं'''' प्रेम प्रवाहिनी रथ प्रशांति निलयम, पुट्टपर्ती, आंध्र प्रदेश से भारत के सभी राज्यों की यात्रा पर है और हम सभी को अपने दर्शन और आशिर्वाद देने के लिए गुरू गोरक्षनाथ की तपोभूमि पर इसका आगमन हुआ। संचालन देवीदास ने किया।
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