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शिखा दुबे हत्याकांड : गवाही देने नहीं आए विवेचक, अब 21 को सुनवाई
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विवेचक रहे सेवानिवृत दरोगा की होनी है गवाही, लकवाग्रस्त होने की वजह से नहीं आ सके
इंजीनियरिंग कॉलेज इलाके में वर्ष 2011 में हुई थी वारदात, छह गवाहों की पूरी हो चुकी है गवाही
इंजीनियरिंग कॉलेज इलाके की शिखा और उसके प्रेमी दीपू व ट्रांसपोर्ट कारोबारी पर है हत्या का आरोप
गोरखपुर। इंजीनियरिंग कॉलेज इलाके में वर्ष 2011 में हुए चर्चित शिखा दुबे हत्याकांड में अब 14 साल बाद अदालत के फैसले की घड़ी नजदीक आ गई है। इस केस में छह गवाहों की गवाही हो चुकी है। केस के विवेचक रहे सेवानिवृत दरोगा अश्वनी कुमार सिन्हा की आखिरी गवाह के रूप में मंगलवार को गवाही होनी थी। बीमार होने के कारण वह कोर्ट में नहीं आ सके। सिविल कोर्ट ने अब सुनवाई की अगली तारीख 21 अप्रैल तय की है।
कैंट थाने के पैरोकार के मुताबिक, सिविल कोर्ट में एडीजे-02 के यहां यह केस चल रहा है। शाहपुर इलाके में रहने वाले विवेचक अश्वनी कुमार सिन्हा को लकवा मार गया है, इस वजह से वह करीब छह माह से कोर्ट में नहीं आ पा रहे हैं। मंगलवार को उनकी गवाही होनी थी, लेकिन बीमार होने की वजह से नहीं आ सके। विवेचक की गवाही होने के बाद इस केस में फैसला आ जाएगा। सोनभद्र की पूजा की हत्या के आरोप में शिखा दुबे, उसके प्रेमी दीपू और ट्रांसपोर्ट कारोबारी सुग्रीव को पुलिस ने आरोपी बनाया है। पैरोकार कहना है कि अगली तारीख पर विवेचक को कोर्ट लाने का प्रयास किया जाएगा।
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अधिवक्ता बोले-गवाही का इंतजार
मामले में आरोपियों की तरफ से केस की पैरवी कर रहे सिविल कोर्ट के अधिवक्ता बच्चू सिंह ने बताया कि केस ट्रॉयल में है। सभी गवाहों की गवाही हो चुकी है। विवेचक की गवाही न हो पाने की वजह से छह माह से फैसला नहीं आ पा रहा है। अब तो गवाही का इंतजार है। सुनवाई के बाद पक्ष में ही फैसला आने की पूरी उम्मीद है।
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शिखा की नहीं, पूजा की हुई थी हत्या
मामला 11 जून 2011 का है। सिंघड़िया क्षेत्र में एक युवती का शव मिला था। कद-काठी और उम्र से अंदाजा लगाया गया कि शव इंजीनियरिंग कॉलेज के कमलेशपुरम कॉलोनी इलाके से लापता युवती शिखा दुबे का है। शिखा के पिता को बुलाया गया। रिश्तेदार भी जुटे, सबने माना कि शव शिखा का ही है। इस दौरान पिता रामप्रकाश दुबे ने पड़ोसी दीपू पर बेटी की हत्या का आरोप लगाते हुए केस दर्ज करा दिया। साथ ही शव का अंतिम संस्कार भी किया। पुलिस की जांच शुरू हुई तो पता चला कि दीपू घर से लापता है। छानबीन में पुलिस को खबर मिली कि आरोपी दीपू, सोनभद्र में है। पुलिस टीम सोनभद्र पहुंची तो वहां दीपू के साथ ही शिखा भी मिली। दोनों से पूछताछ में पता चला कि सिंघड़िया में मिला शव सोनभद्र की पूजा (25) का था।
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तीन बच्चों की मां थी पूजा
पुलिस के मुताबिक, शिखा ने बताया कि पड़ोसी दीपू यादव से उसकी नजदीकी थी। दोनों को पता था कि घरवाले इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं होंगे। ऐसे में दोनों ने घर से भागने और परिजनों से पीछा छुड़ाने के लिए साजिश रची। तय किया कि शिखा की कद-काठी की किसी महिला की हत्या कर उसे शिखा की पहचान दे दी जाए। इस साजिश में दीपू का दोस्त ट्रांसपोर्ट कारोबारी सुग्रीव भी शामिल था। उसका अक्सर सोनभद्र जाना था। वहां वह एक ऐसी महिला को जानता था, जो कद-काठी में शिखा से मिलती थी। पूजा (25) नाम की वह महिला तीन बच्चों की मां थी। दीपू और सुग्रीव उसे गोरखपुर में तीन हजार रुपये की नौकरी दिलाने के बहाने ले आए। आरोप है कि सुग्रीव 10 जून 2011 की रात में पूजा को ट्रक से कुनराघाट ले आया और उधर, शिखा दीपू के साथ घर से भागकर कुसम्ही जंगल पहुंच गई। जंगल में ट्रक में सवार पूजा को शिखा ने वह कपड़े पहना दिए, जिन्हें पहनकर वह घर से निकली थी। इतना ही नहीं, उसके गले में एक धागा डाला गया, जो शिखा हमेशा पहनती थी। इसके बाद ट्रक में ही पूजा की हत्या कर दी गई। पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरे पर प्रहार कर किए गए थे।
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इंजीनियरिंग कॉलेज इलाके में वर्ष 2011 में हुई थी वारदात, छह गवाहों की पूरी हो चुकी है गवाही
इंजीनियरिंग कॉलेज इलाके की शिखा और उसके प्रेमी दीपू व ट्रांसपोर्ट कारोबारी पर है हत्या का आरोप
गोरखपुर। इंजीनियरिंग कॉलेज इलाके में वर्ष 2011 में हुए चर्चित शिखा दुबे हत्याकांड में अब 14 साल बाद अदालत के फैसले की घड़ी नजदीक आ गई है। इस केस में छह गवाहों की गवाही हो चुकी है। केस के विवेचक रहे सेवानिवृत दरोगा अश्वनी कुमार सिन्हा की आखिरी गवाह के रूप में मंगलवार को गवाही होनी थी। बीमार होने के कारण वह कोर्ट में नहीं आ सके। सिविल कोर्ट ने अब सुनवाई की अगली तारीख 21 अप्रैल तय की है।
कैंट थाने के पैरोकार के मुताबिक, सिविल कोर्ट में एडीजे-02 के यहां यह केस चल रहा है। शाहपुर इलाके में रहने वाले विवेचक अश्वनी कुमार सिन्हा को लकवा मार गया है, इस वजह से वह करीब छह माह से कोर्ट में नहीं आ पा रहे हैं। मंगलवार को उनकी गवाही होनी थी, लेकिन बीमार होने की वजह से नहीं आ सके। विवेचक की गवाही होने के बाद इस केस में फैसला आ जाएगा। सोनभद्र की पूजा की हत्या के आरोप में शिखा दुबे, उसके प्रेमी दीपू और ट्रांसपोर्ट कारोबारी सुग्रीव को पुलिस ने आरोपी बनाया है। पैरोकार कहना है कि अगली तारीख पर विवेचक को कोर्ट लाने का प्रयास किया जाएगा।
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अधिवक्ता बोले-गवाही का इंतजार
मामले में आरोपियों की तरफ से केस की पैरवी कर रहे सिविल कोर्ट के अधिवक्ता बच्चू सिंह ने बताया कि केस ट्रॉयल में है। सभी गवाहों की गवाही हो चुकी है। विवेचक की गवाही न हो पाने की वजह से छह माह से फैसला नहीं आ पा रहा है। अब तो गवाही का इंतजार है। सुनवाई के बाद पक्ष में ही फैसला आने की पूरी उम्मीद है।
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शिखा की नहीं, पूजा की हुई थी हत्या
मामला 11 जून 2011 का है। सिंघड़िया क्षेत्र में एक युवती का शव मिला था। कद-काठी और उम्र से अंदाजा लगाया गया कि शव इंजीनियरिंग कॉलेज के कमलेशपुरम कॉलोनी इलाके से लापता युवती शिखा दुबे का है। शिखा के पिता को बुलाया गया। रिश्तेदार भी जुटे, सबने माना कि शव शिखा का ही है। इस दौरान पिता रामप्रकाश दुबे ने पड़ोसी दीपू पर बेटी की हत्या का आरोप लगाते हुए केस दर्ज करा दिया। साथ ही शव का अंतिम संस्कार भी किया। पुलिस की जांच शुरू हुई तो पता चला कि दीपू घर से लापता है। छानबीन में पुलिस को खबर मिली कि आरोपी दीपू, सोनभद्र में है। पुलिस टीम सोनभद्र पहुंची तो वहां दीपू के साथ ही शिखा भी मिली। दोनों से पूछताछ में पता चला कि सिंघड़िया में मिला शव सोनभद्र की पूजा (25) का था।
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तीन बच्चों की मां थी पूजा
पुलिस के मुताबिक, शिखा ने बताया कि पड़ोसी दीपू यादव से उसकी नजदीकी थी। दोनों को पता था कि घरवाले इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं होंगे। ऐसे में दोनों ने घर से भागने और परिजनों से पीछा छुड़ाने के लिए साजिश रची। तय किया कि शिखा की कद-काठी की किसी महिला की हत्या कर उसे शिखा की पहचान दे दी जाए। इस साजिश में दीपू का दोस्त ट्रांसपोर्ट कारोबारी सुग्रीव भी शामिल था। उसका अक्सर सोनभद्र जाना था। वहां वह एक ऐसी महिला को जानता था, जो कद-काठी में शिखा से मिलती थी। पूजा (25) नाम की वह महिला तीन बच्चों की मां थी। दीपू और सुग्रीव उसे गोरखपुर में तीन हजार रुपये की नौकरी दिलाने के बहाने ले आए। आरोप है कि सुग्रीव 10 जून 2011 की रात में पूजा को ट्रक से कुनराघाट ले आया और उधर, शिखा दीपू के साथ घर से भागकर कुसम्ही जंगल पहुंच गई। जंगल में ट्रक में सवार पूजा को शिखा ने वह कपड़े पहना दिए, जिन्हें पहनकर वह घर से निकली थी। इतना ही नहीं, उसके गले में एक धागा डाला गया, जो शिखा हमेशा पहनती थी। इसके बाद ट्रक में ही पूजा की हत्या कर दी गई। पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरे पर प्रहार कर किए गए थे।